उम्रकैदी की समय पूर्व रिहाई को याचिका, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सरकार से मांगा जवाब
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केंद्रीय कारागार वाराणसी में उम्रकैद की सजा काट रहे कैदी बैजू की समय पूर्व रिहाई की याचिका पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब ...और पढ़ें

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने केंद्रीय कारागार वाराणसी में उम्रकैद की सजा भुगत रहे सिद्धदोष कैदी बैजू पुत्र गंगा कुम्हार निवासी थाना पुरंदरपुर जिला महाराजगंज की समय पूर्व रिहाई की याचिका पर राज्य सरकार से दो सप्ताह में जवाब मांगा है। प्रकरण में अगली सुनवाई 17 अप्रैल को होगी।
यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर तथा न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने बैजू की याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है।कोर्ट ने आदेश की प्रति अपर मुख्य सचिव (गृह) , प्रमुख सचिव कारागार एवं रिफार्म सेवाएं, डायरेक्टर जनरल कारागार को सीजेएम लखनऊ, जेल अधीक्षक वाराणसी को वहां के सीजेएम तथा डीएम महाराजगंज को वहां के सीजेएम के मार्फत 48 घंटे में भेजने का आदेश दिया है।
याची के अधिवक्ता आदर्श शुक्ला का कहना है कि शासन में स्थाई नीति के तहत समय पूर्व रिहाई के लिए अर्जी वरिष्ठ अधीक्षक केंद्रीय कारागार वाराणसी के समक्ष 22 सितंबर 2025 से विचाराधीन है। थाना पुरंदरपुर में धारा 304 बी 498 ए आइपीसी व 3/4 दहेज प्रतिषेध अधिनियम में एफआइआर दर्ज हुई थी।
बैजू को एडिशनल सेशन जज कोर्ट महाराजगंज द्वारा 21 नवंबर 2013 को आजीवन कारावास एवं 20 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया गया था। इसके खिलाफ अपील इलाहाबाद हाई कोर्ट ने खारिज करते हुए सजा की पुष्टि कर दी है।
याची के अधिवक्ता ने सुप्रीम कोर्ट के लक्ष्मण नाकुर केस का हवाला दिया। इसमें कहा गया है कि समय पूर्व रिहाई की अर्जी पर विचार किए बगैर उम्र कैद की सजा काट रहे किसी कैदी को अनिश्चितकाल के लिए कारागार में बंद नहीं रखा जा सकता। नियमानुसार विचार किया जाना चाहिए।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।