भ्रष्टाचार में सेवानिवृत्त अधिकारियों को छूट नहीं, हाईकोर्ट का सख्त रुख
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि सेवानिवृत्त अधिकारियों को भ्रष्टाचार में छूट नहीं मिलनी चाहिए। कोर्ट ने एक याचिका खारिज करते हुए कहा कि जनप्रतिनिधियों द्वारा की गई शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने फर्रुखाबाद के एक सेवानिवृत्त कनिष्ठ अभियंता को जारी नोटिस में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया और उसे नोटिस का जवाब देने का निर्देश दिया, क्योंकि उनके खिलाफ अनियमितता की शिकायत की गई थी।

सांकेतिक तस्वीर।
विधि संवाददाता, जागरण, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि सरकारी कर्मचारी की जिम्मेदारी बहुत ऊंची होती है। वह सिर्फ सैलरी कमाने के लिए ही काम नहीं करता, बल्कि उसका काम देश बनाने में भी मदद करना है। सरकारी महकमे में तेजी से बढ़ रहे भ्रष्टाचार की रोकथाम की दिशा में उठाए जा रहे कदमों के अंतर्गत सेवानिवृत्त अधिकारियों को भी कोई छूट नहीं मिलनी चाहिए। जनता अथवा उसके प्रतिनिधियों को छूट मिलनी चाहिए कि वे किसी भी सरकारी कर्मचारी, चाहे सेवानिवृत्त हो अथवा नौकरी में, ड्यूटी करते समय उनकी लापरवाही के बारे में बता सकें।
सेवानिवृत्त अधिकारियों को भ्रष्टाचार की रोकथाम में छूट नहीं मिलनी चाहिए: कोर्ट
जनप्रतिनिधि की समाज में अहम भूमिका रहती है। उसे जमीनी स्तर पर आम जनता की कई शिकायतें झेलनी पड़ती हैं, इसलिए हर शिकायत को राजनीति से प्रेरित नहीं कहा जा सकता। यह टिप्पणी न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने विपिन चंद्र वर्मा की याचिका को खारिज करते हुए की है।
कोर्ट ने फर्रुखाबाद में कनिष्ठ अभियंता (तकनीकी) पद से सेवानिवृत्त याची को जांच में अनियमितता पाए जाने जारी कारण बताओ नोटिस पर हस्तक्षेप से इन्कार कर दिया है। याची को नोटिस का जवाब देने तथा सक्षम अधिकारी को याची की सेवानिवृत्ति को ध्यान में रखते हुए नियमानुसार अनुमन्य कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा, शिकायत में लगाए गए आरोपों को इस आधार पर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता कि वे किसी जनप्रतिनिधि अथवा उसके रिश्तेदार ने लगाए हैं।
फर्रुखाबाद में सेवानिवृत्त कनिष्ठ इंजीनियर को जारी नोटिस में हस्तक्षेप से किया इनकार
याची के खिलाफ विधायक के साले ने विधानसभा अध्यक्ष से अनियमितता की शिकायत की जांच करने की मांग की थी। इस पर जिलाधिकारी को जांच करने का आदेश दिया गया। जिलाधिकारी फर्रुखाबाद ने तीन सदस्यीय जांच कमेटी बनाई। इसने अनियमितता बरतने की पुष्टि के साथ अपनी रिपोर्ट सौंपी। तब तक याची सेवानिवृत्त हो चुका था। जिलाधिकारी ने याची को अनियमितता के आरोपों का जवाब देने के लिए कारण बताओ नोटिस दिया। इसे यह कहते हुए चुनौती दी गई कि वह अब सेवानिवृत्त हो चुका है।
स्वामी-सेवक का संबंध नहीं रह गया है। इसलिए सेवानिवृत्त कर्मचारी के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की जा सकती। नोटिस रद की जाए। सरकार की तरफ से विरोध किया गया। कहा गया कि केवल कारण बताओ नोटिस दी गई है। इसका जवाब मांगा गया है। ऐसे में याचिका पोषणीय नहीं है।

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