रायबरेली पुलिस की बड़ी कार्रवाई, फर्जी सैलरी स्लिप और नियुक्ति पत्र से लोन लेने और दिलाने वाले 5 आरोपी गिरफ्तार
रायबरेली पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर लोन लेने और दिलाने वाले अंतर जनपदीय गिरोह के पांच सदस्यों को गिरफ्तार किया है। ...और पढ़ें
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पुलिस अधीक्षक कार्यालय में मामले का राजफाश करते एसपी रवि कुमार

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जागरण संवाददाता, रायबरेली। फर्जी दस्तावेज के आधार पर लोन लेने और दिलाने के मामले में पुलिस ने अंतर जनपदीय गिरोह के पांच आरोपितों को गिरफ्तार किया है। ये लोग फर्जी सैलरी स्लिप और नियुक्ति पत्र बनाकर फ्राड कराते थे। गिरफ्तार जालसाजों में दो लखनऊ, दो सीतापुर और एक उन्नाव का रहने वाला है।
बैंक ऑफ बड़ौदा के मुख्य शाखा के प्रबंधक मुकेश ने 29 दिसंबर को पुलिस अधीक्षक को शिकायती पत्र देकर फर्जी तरीके से लोन कराए जाने की शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी तहरीर पर पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
गुरुवार को प्रकरण का राजफाश करते हुए पुलिस अधीक्षक रवि कुमार ने बताया कि जांच के आधार पर लोन दिलाने वाले उन्नाव के हैदराबाद के इंदिरा नगर प्रथम के राजेश सिंह, लखनऊ के बक्शी का तालाब के भैंसामऊ निवासी गोपाल सिंह व उसकी पत्नी राधिका देवी और कर्ज लेने वाले सीतापुर के तरीनपुर गीता कॉलोनी के बबलू राठौर उसकी पत्नी कामिनी राठौर को गिरफ्तार कर लिया।
आरोपितों ने बताया कि गोपाल ने अपनी पत्नी राधिका का यूको बैंक में खाता खुलवाया था। फिर आरोपितों ने अपने परिचित व रिश्तेदारों के खाते बैंक आफ बड़ौदा में खुलवाए। इसके बाद आधार कार्ड पर पता बदलकर फर्जी सैलरी स्लिप व नियुक्ति पत्र बनाते हुए पर्सनल लोन कराया।
एसपी ने बताया कि लोन कराने से पूर्व आरोपित ट्रेजर खाते से बैंक आफ बड़ौदा के अकाउंट में कुछ माह तक लगातार पैसे भी भेजते थे। फर्जी नियुक्ति पत्र व आधार कार्ड में पता बदलकर बबलू राठौर व कामिनी राठौर ने 38 लाख का पर्सनल लोन कराया था। सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा रहा है।
प्रबंधक ने 48 खाताधारकों पर लगाया था आरोप
बैंक प्रबंधक ने एसपी को दिए शिकायती पत्र में शहर, सलोन, नसीराबाद, डलमऊ समेत अन्य शाखाओं के 48 खाताधारकों पर पहचान छिपाकर या गलत पहचान लगाकर लोन कराने का आरोप लगाया था।
प्रबंधक के अनुसार, मामले में करीब नौ करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की गई थी। प्रबंधक की तहरीर पर पुलिस अधिकारियों ने सभी नामजद आरोपितों पर मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की। जांच अधिकारी ने बैंक से सभी खाताधारकों का पूर्ण विवरण व लोन के लिए बैंक की प्रक्रिया समेत कई बिंदुओं पर विवरण मांगा, जिसके बाद जांच आगे बढ़ी और करीब ढाई माह बाद पुलिस ने वारदात का राजफाश कर दिया।
पकड़े गए पांचों आरोपित लोन लेने वालों में शामिल हैं। पुलिस अधिकारी के अनुसार बाकी बचे खाता धारकों के बारे में पड़ताल की जा रही है। कुछ ऐसे भी हो सकते हैं जिनको पता भी न हो और उनके दस्तावेजों पर कर्ज ले लिया गया हो। इस नाते प्रकरण में गहराई से जांच की जा रही है।
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