सहारनपुर में तैयार किए जा रहे पानी में तैरने वाले गोबर से बने अनोखे दीये, देश के कोने-कोने से आ रही डिमांड
सहारनपुर की मां शाकंभरी कान्हा उपवन गोशाला में दीपावली के लिए गाय के गोबर से अनोखे दीपक बनाए जा रहे ...और पढ़ें

नगर निगम की गौशाला कान्हा उपवन में रंगबिरंगे दीये तैयार करता कारीगर
HighLights
गोबर से बने अनोखे दीपक पानी में तैरते हैं।
इनमें तुलसी के बीज हैं, जो पौधा उगाते हैं।
दीपावली के लिए दो लाख दीपक तैयार किए जा रहे हैं।
जागरण संवाददाता, सहारनपुर। दीपावली पर इस बार नगर निगम की मां शाकंभरी कान्हा उपवन गोशाला में खास तरह के दीपक तैयार किए जा रहे हैं, जो जलने के बाद भी काम आएंगे। गाय के गोबर से बने इन दीपकों की खास बात यह है कि ये पानी में तैर सकते हैं और इनमें तुलसी के बीज भी डाले गए हैं।
दीपावली के बाद इन्हें गमलों में डालने पर खाद के साथ तुलसी का पौधा भी उग सकता है। इन दीपकों की कीमत महज दो से तीन रुपये रखी गई है। इसके अलावा श्री गणेश और मां लक्ष्मी जी की मूर्ति, धूपबत्ती, त्वरण द्वार, गो मूत्र फिनाइल, गोबर से पेंट आदि तैयार किया रहा है।
दीपावली के मद्देनजर सहारनपुर की इसी मां शाकंभरी कान्हा उपवन गोशाला में करीब 500 गोवंश है। गाय के गोबर और गाेमूत्र से विभिन्न तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे है। इन दीपकों को गोबर, गोमूत्र, मुल्तानी मिट्टी, चूना, मैदा, लकड़ी के पाउडर और तुलसी के बीज मिलाकर तैयार किया जा रहा है।
इनकी खासियत यह है कि ये पानी में तैर सकते हैं और इस्तेमाल के बाद गमलों या क्यारियों में खाद के रूप में काम आ सकते हैं। इसके अलावा गोमूत्र से साफ-सफाई के लिए फिनाइल भी तैयार किया जा रहा है।
यह सभी गोमय उत्पाद अमेजन पर उपलब्ध है। इसके लिए ऑनलाइन बुकिंग भी की जा रही है। पानी में तैरने वाले करीब दो लाख दीपक गोशाला में तैयार किए जा रहे है। नगर निगम द्वारा गोमय उत्पादों के बाजारों में स्टाल भी लगाए जाएगे।
दीपावली पर्व को लेकर गोशाला में विभिन्न तरह के गोमय उत्पाद तैयार किए जा रहे है। इन्ही में गाय के गोबर से पानी में तैरने वाले दो लाख दीपक भी तैयार किए जा रहे है।- संदीप मिश्रा, पशु कल्याण चिकित्सा अधिकारी
