संभल लौटेगा 1978 दंगे में पलायन करने वाले पीड़ित का परिवार, प्रशासन से मांगी जमीन, कहा- दादा की यादें…
संभल के 1978 दंगों में अपने दादा रामशरण रस्तोगी को खोने वाला परिवार अब शहर लौटना चाहता है। पोते कपिल रस्तोगी ने प्रशासन से जमीन का पट्टा मांगा है ताकि ...और पढ़ें


समय कम है?
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दिलीप कुमार, संभल। 1978 के सांप्रदायिक दंगों में अपनों को खोकर शहर छोड़ने को मजबूर हुआ परिवार अब फिर से शहर की ओर लौटना चाहता है। दंगों में मारे गए व्यापारी रामशरण रस्तोगी के पोते कपिल रस्तोगी ने प्रशासन से जमीन का पट्टा मांगा है, जिससे वे अपने शहर में सम्मान और पहचान के साथ दोबारा जीवन शुरू कर सकें। इससे पहले भी उन्होंने अपने दादा जी के सम्मान में शहर में स्मारक और चौका का नाम भी उनके रखने की मांग की है।
करीब 48 साल पहले 1978 में संभल में भड़के सांप्रदायिक दंगों ने कई परिवारों को उजाड़ दिया था। उन्हीं में से एक था व्यापारी रामशरण रस्तोगी का परिवार, जिसने न केवल अपना आशियाना खोया बल्कि परिवार के मुखिया की निर्मम हत्या का दर्द भी झेला।
अब उनके पोते कपिल रस्तोगी ने एक बार फिर संभल की धरती पर बसने की इच्छा जताई है। दिल्ली के उत्तम नगर में रह रहे कपिल रस्तोगी ने बताया कि दंगों से पहले उनका परिवार मुहल्ला कोटपूर्वी में रहता था। वहां पर उनका लगभग 100 गज का एक मकान और नखासा तिराहे पर उनके दादा रामशरण रस्तोगी की परचून की दुकान थी।
29 मार्च 1978 को दंगों के दौरान उग्र भीड़ ने उनके दादा को दुकान से उठा लिया था। दुकान को लूटने के बाद आग के हवाले कर दिया गया और रामशरण रस्तोगी के की हत्या कर शव को दुकान के सामने स्थित कुएं में फेंक दिया गया।
कपिल ने बताया कि जब तीन दिन बाद शव बरामद हुआ तो उस पर चाकुओं के कई घाव और पैंरों पर कुल्हाड़ी के निशान थे। इस घटना के बाद परिवार को संभल छोड़कर पलायन करना पड़ा। कपिल के पिता सुभाष चंद्र रस्तोगी परिवार को लेकर दिल्ली चले गए और वहीं से जीवन की नई शुरुआत की।
कपिल बताते हैं कि उनके पिता सुभाष चंद्र रस्तोगी ने 30 मार्च 1978 को हत्या की प्राथमिकी दर्ज कराई थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उस समय प्रदेश में रामनरेश यादव की सरकार थी और केंद्र में मोरारजी देसाई प्रधानमंत्री थे। सहायता का आश्वासन दिया गया था, लेकिन समय के साथ सब कुछ अधूरा ही रह गया। अब वर्षों बाद कपिल रस्तोगी संभल लौटे हैं और उन्होंने जिलाधिकारी डा. राजेंद्र पैंसिया व पुलिस अधीक्षक कृष्ण बिश्नोई से मुलाकात कर न्याय और पुनर्वास की मांग रखी थी।
डीएम ने पलायन करने वाले दंगा पीड़ितों को संभल में बसने के लिए जमीन आवंटित करने का आश्वासन दिया था। अब कपिल दोबारा संभल पहुंचे और प्रशासन को याद दिलाया कि उन्हें पहले जमीन आवंटन का आश्वासन दिया गया था, जिसे अब पूरा किया जाना चाहिए। इसके लिए वह पहले तहसीलदार कार्यालय पहुंचे और फिर पालिका में ईओ से वार्ता की।
40 रस्तोगी परिवारों को घर छोड़कर भागना पड़ा था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी पूर्व में विधानसभा में संभल दंगे पर बयान दिया था। कहा था कि 1947 से लेकर अभी तक संभल में 209 हिंदुओं की जान दंगों के चलते गई है। संभल में 29 मार्च 1978 को दंगे के दौरान आगजनी की घटनाएं हुई थीं। इस घटना में कई हिंदू मारे गए। भय के चलते 40 रस्तोगी परिवारों को घर छोड़कर भागना पड़ा था। पलायन के गवाह अभी मौजूद हैं। मंदिर में कोई पूजा करने वाला बचा नहीं था।
1978 के दंगे में संभल कई दिन झुलसा था। इससे लोगों में दहशत का माहौल बना रहा। शहर में असुरक्षा का माहौल बन गया था। इसके बाद हिंदू संप्रदाय के लोग औने पाैने दामों पर अपने मकान बेचकर दूसरे शहरों और मुहल्लों में चले गए थे। घटना के 46 साल बाद अभी तक किसी को सजा तक नहीं मिली। मुख्यमंत्री के संबोधन के बाद अधिकारियों ने सभी दंगा पीड़िताें से मुलाकात की थी।
कुएं और चौक को रामशरण रस्तोगी के नाम पर रखने का दिया था प्रस्ताव
जिस कुएं में रामशरण रस्तोगी का शव बरामद हुआ था, जनवरी में उस कुएं की खोदाई कराई गई थी। उसे पांच फीट तक खोदाई कराके उसके चारों ओर बाउंड्री वाल कराई गई है। कपिल चाहते हैं कि जिस कुएं में उनके दादा का शव फेंका गया था, उसे स्मारक के रूप में विकसित किया जाए। साथ ही वहां रामशरण रस्तोगी की प्रतिमा स्थापित की जाए और चौराहे का नाम स्व. रामशरण दास चौराहा रखा जाए।
कपिल रस्तोगी की ओर से पत्र मिला है। जिसमें उन्होंने 1978 के दंगे का जिक्र करते हुए पलायन करने की बात लिखी है। उसकी मांग के बारे में उच्चाधिकारियों से बात करते हुए जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-धीरेंद्र कुमार सिंह, तहसीलदार, संभल।
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