19 घंटे रुका रहा बुजुर्ग का अंतिम संस्कार, वजह जानकर भर आएंगी आंखें; जिंदा रहते अपनों ने व मौत पर सिस्टम ने दिया 'दर्द'
Shamli News: उत्तर प्रदेश के शामली जिले के एक वृद्धाश्रम में 70 वर्षीय वृद्ध का अंतिम संस्कार 5000 रुपये की कमी के कारण 19 घंटे तक रुका रहा।

झिंझाना वृद्ध आश्रम में रखा मृतक चरण सिंह का शव। जागरण
HighLights
शामली जिले के वृद्ध आश्रम में हो गई थी एक वृद्ध की मौत।
केयर टेकर शव ले गए थे शामली, धनराशि नहीं मिलने पर लाना पड़ा।
खाते में धनराशि आने के बाद शव का अंतिम संस्कार हुआ।
संवाद सूत्र, झिंझाना (शामली)। मेरठ-करनाल हाईवे स्थित झिंझाना के एक वृद्धाश्रम में 70 वर्षीय वृद्ध की मौत के बाद धनराशि नहीं मिलने के कारण 19 घंटे तक अंतिम संस्कार नहीं हो सका। केयर टेकर अपने खर्च पर शव को वाहन से शामली भी ले गए, लेकिन अंतिम संस्कार के लिए रुपये नहीं मिलने पर शव को वृद्धाश्रम लाना पड़ा। बाद में केयर टेकर के खाते में अंतिम संस्कार की धनराशि भेजी गई, जिसके बाद शव को दोबारा शामली ले जाकर अंतिम संस्कार किया गया।
केयर टेकर दीपक कुमार ने बताया कि वर्ष 2023 में चरण सिंह को शामली रेलवे स्टेशन से वृद्धाश्रम लाया गया था। उन्होंने अपने नाम के अलावा निवास स्थान या अन्य कोई पता नहीं बताया था। रविवार दोपहर उनकी तबीयत खराब हो गई थी, जिस पर उनको सीएचसी ले जाया गया था। चिकित्सक ने प्राथमिक उपचार के बाद वृद्धाश्रम भेज दिया था।
शाम करीब सात बजे उनकी मौत हो गई थी। एक घंटे बाद उन्होंने अपने खर्च पर शव को शामली पहुंचाया, लेकिन वहां भी धनराशि उपलब्ध नहीं होने के कारण शव को वापस वृद्धाश्रम लाना पड़ा। करीब 19 घंटे बाद सोमवार दोपहर खाते में धनराशि आने पर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई गई। वृद्धाश्रम की संचालिका बेबी रानी ने बताया कि वह छुट्टी पर अपने घर गई हुई थीं।
रविवार को आश्रम में दो वृद्धों की मौत हुई थी। इनमें सुक्कन वर्मा का रविवार दोपहर अंतिम संस्कार करा दिया गया था। वहीं, दूसरे वृद्ध चरण सिंह की शाम करीब सात बजे मौत हुई। संस्था की ओर से अंतिम संस्कार के लिए रुपये आने में कुछ देरी हुई थी। धनराशि प्राप्त होने के बाद अंतिम संस्कार करा दिया गया था।
वर्ष 2017 से संचालित है वृद्धाश्रम
मेरठ-करनाल हाईवे स्थित वृद्धाश्रम वर्ष 2017 से संचालित है। यहां करीब 48 महिला और पुरुष वृद्ध रह रहे हैं। केयर टेकर के अनुसार, एक वृद्ध के लिए प्रतिदिन 112 रुपये का बजट संस्था की ओर से मिलता है, जबकि इलाज के लिए प्रतिमाह 200 रुपये दिए जाते हैं।
अंतिम संस्कार की व्यवस्था संस्था की ओर से की जाती है। संस्था के सचिव दिनेश कुमार, अध्यक्ष विनोद कुमार हैं, जबकि संस्था के मालिक हरिकिशन सूर्यवंशी हैं। अध्यक्ष ने बताया कि जब उनको मामले की जानकारी दी गई तो उन्होंने तुरंत ही रुपये खाते में भेज दिए थे।
इन्होंने कहा
झिंझाना में वृद्ध की मृत्यु का हमें दुख है। सामूहिक विवाह कार्यक्रम के कारण हमें सूचना कुछ विलंब से मिली थी। सूचना मिलते ही हम खुद वहां गए थे, और अंतिम संस्कार करा दिया गया है। इनकी धनराशि खाता संख्या में तकनीकी दिक्कत के कारण देर हो गई थी। हमने खुद अपने पास से धनराशि देने के लिए बोला था, लेकिन फिर अलीगढ़ की संस्था से धनराशि मिल गई।
-रितु रस्तोगी, जिला समाज कल्याण अधिकारी
