बीएचयू में साइकिल चलाकर दिया पर्यावरण और सार्वजनिक स्वास्थ्य का संदेश, उठी सुरक्षित साइकिल लेन की मांग
बीएचयू में 'साइकिल पर सन्डे' कार्यक्रम आयोजित हुआ, जिसमें क्लाइमेट एजेंडा और छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। इसका उद्देश्य साइकिल चलाने की संस्कृति को बढ़ ...और पढ़ें

बीएचयू में 'साइकिल पर सन्डे' कार्यक्रम: पर्यावरण संरक्षण और सुरक्षित साइकिल लेन की मांग।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। शहर को प्रदूषण से मुक्त करने के प्रयास के क्रम में रविवार की सुबह 8 बजे से 10 बजे तक बीएचयू विश्वनाथ मंदिर, बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय परिसर में क्लाइमेट एजेंडा संस्था के तहत संचालित हरित सफ़र अभियान के तत्वावधान में साइकिल पर सन्डे कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस आयोजन में क्लाइमेट एजेंडा की टीम के साथ बीएचयू और वसंत कन्या महाविद्यालय एवं म.ग. काशी विद्यापीठ के छात्र-छात्राओं, विशेषकर मास्टर ऑफ सोशल वर्क विभाग के इंटर्न और वोलंटियरों, ने सक्रिय भूमिका निभाई।
इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों के बीच साइकिल चलाने की संस्कृति को पुनर्जीवित करना था। जलवायु परिवर्तन के इस दौर में साइकिल एक सुलभ, शून्य-उत्सर्जन परिवहन विकल्प है। परिवहन क्षेत्र वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का एक बड़ा हिस्सा है, और भारत के तेजी से बढ़ते शहरों में निजी मोटर वाहनों की बढ़ती संख्या वायु प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन को गंभीर रूप से बढ़ा रही है।
बताया कि ऐसे में साइकिल जैसे नॉन-मोटराइज़्ड ट्रांसपोर्ट (NMT) को अपनाना न केवल व्यक्तिगत स्वास्थ्य के लिए लाभकारी है, बल्कि यह शहरी कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन को कम करने, यातायात की भीड़ घटाने और शहरों को अधिक रहने योग्य बनाने की दिशा में एक ठोस कदम भी है।
कार्यक्रम का एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू था — शहर प्रशासन से सुरक्षित साइकिल लेन और NMT के लिए सुरक्षित शहरी अवसंरचना की मांग उठाना। यह मांग इसलिए आवश्यक है क्योंकि जब तक शहरों में साइकिल चलाने वालों के लिए सुरक्षित लेन और पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित फुटपाथ नहीं होंगे, तब तक साइकिल को प्रोत्साहित करना केवल एक आदर्श की बात बनकर रह जाएगा। बीएचयू जैसे सुरक्षित परिसर के बाहर सड़कों पर साइकिल चलाना आम नागरिकों के लिए जोखिम भरा है।
इस आयोजन में मास्टर आफ सोशल वर्क विभाग के छात्र-छात्राओं ने अग्रणी भूमिका निभाई। प्रमुख वोलंटियरों में दीपक कोरी, तन्मय कुमार, वैभव, ऋतिका, अनन्या उपाध्याय, वैष्णव, प्रियांशी, रोहित और पवन शामिल रहे। क्लाइमेट एजेंडा की ओर से गीता पासवान ने वोलंटियरों और इंटर्न की पूरी टीम का नेतृत्व किया।
कार्यक्रम के उपरांत क्लाइमेट एजेंडा की प्रोग्राम डायरेक्टर एकता शेखर ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि साइकिल का आविष्कार एक समय आवाजाही के संकट को हल करने के लिए हुआ था। आज जलवायु संकट को देखते हुए हमें साइकिल को अपनाने की ज़रूरत है।
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