वाराणसी के आदर्श ग्राम नागेपुर में घरेलू महिला हिंसा के खिलाफ कार्यशाला का आयोजन
वाराणसी के आदर्श ग्राम नागेपुर में घरेलू महिला हिंसा के खिलाफ कार्यशाला आयोजित की गई। इसका उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करना था। महिलाओं को विभिन्न प्रकार की हिंसा और कानूनी मदद के बारे में जानकारी दी गई। महिलाओं ने हिंसा के खिलाफ आवाज उठाने का संकल्प लिया।

आराजी लाइन ब्लाक के दर्जनों गाँवों में साइकिल रैली निकालकर तहसील राजातालाब में प्रदर्शन किया जाएगा।
जागरण संवाददाता, वाराणसी (मिर्जामुराद)। प्रधानमंत्री आदर्श गाँव नागेपुर में शनिवार को महिला हिंसा विरोधी पखवाड़ा की शुरुआत की गई। पहले दिन लोक समिति आश्रम नागेपुर में महिला हिंसा और लैंगिक भेदभाव के खिलाफ कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस अवसर पर गाँव में एक रैली भी निकाली गई। कार्यशाला के बाद उपस्थित लोगों ने "चुप नहीं रहना है, हिंसा नहीं सहना है, बाल विवाह बंद करो, महिला हिंसा बंद करो, दहेज प्रथा पर रोक लगाओ, यौन हिंसा पर रोक लगाओ" जैसे नारे लगाकर जोरदार प्रदर्शन किया।
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाए जा रहे महिला हिंसा विरोधी पखवाड़े के तहत लोक समिति और आशा ट्रस्ट की ओर से आगामी 16 दिसंबर तक मनाए जाने वाले इस पखवाड़े का संदेश है "भेदभाव मिटाएंगे, नया समाज बनाएंगे।" 16 दिसंबर को निर्भया दिवस के अवसर पर आराजी लाइन ब्लाक के दर्जनों गाँवों में साइकिल रैली निकालकर तहसील राजातालाब में प्रदर्शन किया जाएगा।
इस अवसर पर महिला संगठन की अनीता ने कहा कि महिलाओं के विरुद्ध हिंसा की बात करना अत्यंत आवश्यक है और हमें मिलकर इसे समाप्त करना होगा। लोक समिति के संयोजक नंदलाल मास्टर ने कहा कि हमें पुरुष प्रधान ढांचागत व्यवस्था को भी बदलना होगा। उन्होंने कहा कि हमें यह निर्णय लेना है कि अब और हिंसा नहीं सहेंगे। हमें प्रश्न पूछने की आदत डालनी चाहिए और महिलाओं को जागरूक रहने तथा हिंसा का विरोध करने की आवश्यकता है। अंधविश्वास को तोड़ने की भी आवश्यकता है, क्योंकि ये भी हिंसा का साधन बनते हैं।
इस कार्यक्रम में नंदलाल मास्टर, सुनील मास्टर, श्यामसुंदर, मधुबाला, पंचमुखी, मनजीता, सीमा, अनीता, मनीष, आशा, आशीष, विद्या, मनीषा, बेबी, राजकुमारी, प्रेमा, मैनब बानो, सिताबुन, आशारानी सहित कई अन्य लोग शामिल रहे। इस कार्यशाला का उद्देश्य न केवल महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाना है, बल्कि समाज में व्याप्त भेदभाव और हिंसा के खिलाफ एकजुट होकर आवाज उठाना भी है। यह पखवाड़ा महिलाओं के प्रति सम्मान और सुरक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।