काशी विश्वनाथ धाम के मंदिर चौक में वैदिक घड़ी सूर्योदय के साथ शुरू की गई, जान लें इस घड़ी की विशेषता
काशी विश्वनाथ धाम में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी स्थापित की गई है। यह घड़ी सूर्योदय-आधारित भारतीय कालगणना, पंचांग और डिजिटल तकनीक का अनूठा संगम है। ...और पढ़ें

वैदिक घड़ी 30 मुहूर्त, शुभ समय, ग्रहों की स्थिति और मौसम की जानकारी देती है, साथ ही भारतीय संस्कृति व परंपराओं को भी दर्शाती है।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। काशी विश्वनाथ धाम के मंदिर चौक में वैदिक घड़ी सूर्योदय के साथ चालू कर दी गई है। विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को अब काशी विश्वनाथ धाम के मंदिर चौक में स्थापित किया गया है। यह लगभग दस फीट की आयताकार घड़ी हिंदू वैदिक रीति-रिवाज और परंपराओं के अनुसार हिंदू नववर्ष पर आधारित है। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उज्जैन (महाकाल नगरी) में स्थापित विश्व की पहली विक्रमादित्य वैदिक घड़ी को अब वाराणसी में भी स्थापित किया है।
3 अप्रैल 2026 को वाराणसी में महानाट्य 'सम्राट विक्रमादित्य' के दौरान, सीएम ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को यह वैदिक घड़ी भेंट की, जो अब काशी विश्वनाथ धाम में स्थापित हो गई है। यह घड़ी सूर्योदय-आधारित भारतीय कालगणना (30 घंटे) और पंचांग के साथ डिजिटल तकनीक का मिश्रण है, जो 180 से अधिक भाषाओं वाले ऐप से भी जुड़ी है। उज्जैन में प्रधानमंत्री मोदी द्वारा 29 फरवरी 2024 को उद्घाटन के बाद, इसे काशी (वाराणसी) के शंकरचार्य चौक पर भी स्थापित किया गया है।
यह घड़ी सूर्योदय से अगले दिन के सूर्योदय तक की गणना करती है, जिसमें 30 मुहूर्त होते हैं। यह प्रचलित समय (IST) के साथ-साथ पंचांग, शुभ मुहूर्त, ग्रहों की स्थिति, नक्षत्र और मौसम भी बताती है। इसका एक मोबाइल ऐप है, जो 189 से अधिक भाषाओं में उपलब्ध है और इसमें 7,000 वर्षों से अधिक के पंचांग का डेटा शामिल है। यह पहल महाराजा विक्रमादित्य के समय की भारतीय कालगणना पद्धति को पुनर्स्थापित करने के लिए की गई है, जिसे महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ, उज्जैन द्वारा विकसित किया गया है।
काशी के बाद अब अन्य ज्योतिर्लिंगों तक भी इसे पहुँचाने की योजना है, जैसा कि उज्जैन के अलावा भोपाल में भी इसे मुख्यमंत्री निवास पर स्थापित किया गया है। घड़ी 30 मुहूर्तों के साथ वैदिक, भारतीय मानक समय और ग्रीनविच मीन टाइम के साथ समय बता रही है। इसके बैकग्राउंड में हर घंटे देश-दुनिया के खूबसूरत पर्यटन स्थलों की तस्वीर बदल रही हैं।
घड़ी में पल-पल शहर का तापमान, हवा की गति, नमी, हिंदू कैलेंडर अनुरूप माह का नाम भी दर्शाया जा रहा है। यह घड़ी न केवल समय बताने का कार्य करती है, बल्कि यह भारतीय संस्कृति और परंपराओं को भी जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन गई है। इस प्रकार, काशी विश्वनाथ धाम में स्थापित यह वैदिक घड़ी एक नई पहचान और भारतीय वैदिक परंपरा के गौरव का प्रतीक बन गई है।
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