उत्तराखंड के 8 जिलों में जंगलों की आग विकराल, बढ़ता तापमान बना बड़ा कारण
उत्तराखंड के आठ जिलों में जंगल की आग विकराल रूप ले चुकी है, जिससे पर्यावरण, वन्यजीवों और जलस्रोतों को गंभीर खतरा है। ...और पढ़ें

कर्णप्रयाग तहसील के सुंदरगांव, ईडाबधाणी से लगे जंगल में शुक्रवार रात लगी आग। साभार: बिरेन्द्र कुमार

समय कम है?
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राज्य ब्यूरो, देहरादून। पारे की उछाल के साथ ही उत्तराखंड के जंगलों में लग रही आग विकराल होती जा रही है।
इस दृष्टि से पौड़ी, चमोली, रुद्रप्रयाग, पिथौरागढ़, टिहरी, देहरादून, नैनीताल व उत्तरकाशी जिले अधिक संवेदनशील बनकर उभरे हैं। इन्हीं जिलों में जंगल सर्वाधिक धधक रहे हैं। ऐसे में चिंता और चुनौती दोनों ही बढ़ गए हैं।
53,483 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल वाले उत्तराखंड का 71.05 प्रतिशत हिस्सा वनों से घिरा है, लेकिन बढ़ते तापमान, कम होती बारिश और सूखती जमीन जैसे कारण अब जंगलों पर भारी पड़ रहे हैं।
मध्य हिमालयी क्षेत्र में आग की बढ़ती घटनाओं ने पर्यावरण के साथ बहुमूल्य वनस्पतियों और वन्यजीवों के लिए के लिए भी चुनौती खड़ी कर दी है।
वर्तमान में राज्य के आठ जिलों के जंगलों में धधक रही आग का बड़ा कारण वहां पसरे चीड़ वन हैं। चीड़ की सूखी पत्तियों (पिरुल) की जमीन में जमा परत आग में घी का काम कर रही है।
पहाड़ी ढलानों और तेज हवा के कारण आग कुछ ही समय में बड़े क्षेत्र को अपने आगोश में ले रही है।
अल्मोड़ा, नैनीताल और पौड़ी में आबादी के करीब फैले घने चीड़ वन खतरे को और बढ़ा रहे हैं। उत्तरकाशी और टिहरी में कम वर्षा और बढ़ता तापमान जंगलों को सूखा बना रहा है। पिथौरागढ़ के जंगलों में भी आग की घटनाएं बढ़ रही हैं।
यद्यपि, यहां के जंगलों में सतही आग ही अधिक लगती है, लेकिन इससे जैवविविधता पर संकट गहराने के साथ ही वन्यजीवों की जान पर बन रही है।
यही नहीं, जलस्रोत सूखने से दिक्कतें बढ़ रही हैं। जंगलों से उठ रहे धुएं के गुबार ने अलग से दुश्वारियां खड़ी की हुई हैं।
मुख्य वन संरक्षक वनाग्नि एवं आपदा प्रंबंधन सुशांत पटनायक के अनुसार अग्नि नियंत्रण के दृष्टिगत सभी संवेदनशील जिलों में निगरानी बढ़ाने, फायर वाच टावर सक्रिय करने और त्वरित प्रतिक्रिया दलों को अलर्ट मोड पर रखने के निर्देश दिए गए हैं।
2015 से अब तक 24,668.11 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित
विभागीय आंकड़ों को देखें तो वर्ष 2015 से अब तक राज्य के जंगलों में आग की 15,387 घटनाओं में 24,668.11 हेक्टेयर क्षेत्र प्रभावित हुआ। आग से सर्वाधिक क्षति वर्ष 2016 व 2018 में हुई। तब क्रमश: 4433.75 हेक्टेयर व 4480.04 हेक्टेयर जंगल झुलसे।
36 लोगों की हो चुकी मौत
जंगल की आग वर्ष 2015 से अब तक 36 लोगों की जान ले चुकी है, जबकि 76 लोग घायल हुए।
इस वर्ष 15 फरवरी से अब तक आग
- जिला, घटनाएं, प्रभावित वन क्षेत्र
- देहरादून, 36, 54.46
- पौड़ी, 39 51.00
- चमोली, 98, 42.19
- रुद्रप्रयाग, 65, 45.62
- पिथौरागढ़, 32 28.55
- टिहरी, 18 24.00
- नैनीताल 16 18.55
- उत्तरकाशी 17 15.35
- अल्मोड़ा, 04, 3.1
- बागेश्वर, 02, 1.2
- (नोट: घटनाएं संख्या और क्षेत्र हेक्टेयर में)
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