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    किस भी पल मिसाइल गिरने का खतरा... भागकर बचा रहे जान, देहरादून के समीर ने फोन पर बताई आपबीती

    Updated: Wed, 04 Mar 2026 02:32 AM (IST)

    सहसपुर, देहरादून के लगभग 10 परिवार बहरीन में मिसाइल हमलों के कारण अपने बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंतित हैं। ...और पढ़ें

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    बहरीन में फंसे समीर।

    अवनीश चौधरी, देहरादून। खाड़ी देशों पर मिसाइल हमलों से सहसपुर के लगभग 10 परिवारों की सांसें अटकी हैं, जिनके बच्चे रोजी-रोटी के लिए बहरीन में बसे हैं।

    एक तरफ आसपास की इमारतों पर लगातार मिसाइल गिर रही हैं, दूसरी ओर इंटरनेट कनेक्शन लगातार बाधित हो रहा है।

    ऐसे में परिजन हर आधे-एक घंटे पर फोन करके हालचाल पूछ रहे हैं, डर है कि न जाने कब उनसे संपर्क कट जाए।

    ग्राम पंचायत सहसपुर के बीडीसी सदस्य अमजद इलाही का छोटा भाई समीर अहमद (27) भी इस समय बहरीन में हर पल खतरे का सामना कर रहा है।

    उसने फोन पर जो आपबीती सुनाई, वह डराती है। समीर ने बताया कि वह अमेरिकी दूतावास के पास रहता है।

    दो दिन पहले दूतावास पर मिसाइल गिरी थी, तब से आसपास की इमारतों पर मिसाइल गिरने का सिलसिला जारी है।

    उसके आसपास की कुछ इमारत बिलकुल तबाह हो चुकी हैं। उनका भी ज्यादातर समय सड़क पर बीत रहा है, क्योंकि मिसाइल की आवाज होते ही इमारत से बाहर आना पड़ता है।

    समीर ने बताया कि पिछले तीन दिन में स्थिति इतनी भयावह हो चुकी कि परसों रात उसकी पूरी बिल्डिंग खाली करा ली गई।

    जैसे ही मिसाइल हमले की आवाज आती है, लोग अपनी इमारतों से निकलकर सड़कों और खुले मैदानों में आ जाते हैं ताकि मलबे में दबकर जान न जाए।

    इधर, सहसपुर से परिवार वाले सलामती की दुआ करने के साथ हर आधे घंटे पर उससे फोन पर बात कर रहे हैं।

    तीन साल बाद घर लौटकर गया था वापस, अनजान था खतरे से

    समीर पिछले कई साल से बहरीन के आटोमोबाइल सेक्टर में नौकरी कर रहा है। उनके भाई अमजद ने बताया कि समीर हाल में तीन साल के लंबे इंतजार के बाद सहसपुर स्थित घर आया था।

    कुछ ही दिन पहले वह वापस लौट गया था, तब परिवार को जरा भी अंदाजा नहीं था कि जिस बेटे को वे दुआएं देकर विदा कर रहे हैं, वह वहां जाते ही युद्ध के हालात में फंस जाएगा।

    बुजुर्ग मां की पथराई आंखें, कटने लगा है इंटरनेट

    बीसीडी सदस्य अमजद ने बताया कि उनके पिता जीवित नहीं हैं, घर में बुजुर्ग मां ही हैं, उनका तनाव से हाल बेहाल है। वे दिन-भर टीवी पर नजरें गड़ाए रहती हैं और बस एक ही सवाल पूछती हैं, क्या समीर की फ्लाइट टिकट हो गई...मेरा बेटा कब वापस आएगा...।

    अमजद ने बताया कि क्षेत्र के करीब 10 युवक वहां फंसे हैं, जिनकी सुरक्षित वापसी के लिए परिजन ऊपर वाले से प्रार्थना कर रहे हैं।

    उन्होंने समीर को कहा है कि स्थिति सामान्य होते ही पहली फ्लाइट से घर वापस आ जाओ। उन्होंने स्थानीय प्रशासन से भी गुहार लगाई उनका चिंता केंद्र सरकार तक पहुंचाएं और खाड़ी देशों में फंसे देहरादून के सभी बच्चों की सुरक्षित घर वापसी का रास्ता खोजा जाए।

    यहां हर पल मिसाइल गिरने का खतरा है। लगातार आसपास अटैक हो रहे हैं। जब मिसाइल का धमाका होता है तो पूरी इमारत किसी कागज की तरह कांपती है, जैसे कोई बड़ा जलजला (भूकंप) आ गया हो। उनके पास की इमारतों पर मिसाइलें गिरी हैं और वहां मौतें होने की भी सूचना है। हमें नहीं पता कि अगली मिसाइल कहां गिरेगी, बस सड़कों पर समय गुजारकर स्थिति सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
    - समीर अहमद, बहरीन से फोन पर

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