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नेपाल के बाद उत्तराखंड में बाढ़ का खतरा! संकट में भिलंगना घाटी के ग्लेशियर, खतलिंग 5.33 किमी खिसका

Updated: Sun, 30 Aug 2026 09:39 AM (IST)

उत्तराखंड की भिलंगना घाटी के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं, जिसमें खतलिंग ग्लेशियर 5.33 किमी पीछे खिसक गया है। ...और पढ़ें

वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के ताजा अध्ययन में सामने आई चिंताजनक तस्वीर।

वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान के ताजा अध्ययन में सामने आई चिंताजनक तस्वीर।

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सुमन सेमवाल, देहरादून। टिहरी की भिलंगना घाटी के ग्लेशियरों में बर्फ घटने की रफ्तार तेज हुई है। वाडिया हिमालय भूविज्ञान संस्थान ने 1973 से 2025 तक खतलिंग, फेटिंग, दूधगंगा, रतंगरियां, जोगिन और एक अनाम ग्लेशियर के बर्फीले द्रव्यमान, ऊंचाई, क्षेत्रफल और आगे के सिरे में बदलावों का अध्ययन किया। खासकर खतलिंग ग्लेशियर 5.33 किमी पीछे खिसका।

सर्मिष्ठा हलदर और राकेश भांभरी का यह शोध 28 अगस्त 2026 को स्प्रिंगर के रीजनल एनवायर्नमेंटल चेंज जर्नल में प्रकाशित किया गया।

2014 के बाद तेजी से घटा द्रव्यमान

वर्ष 1973–2000, 2000–2014 व 2014–2025 की तुलना में सभी छह में बर्फ का नुकसान बढ़ा। खतलिंग में सालाना 0.53 मीटर जल-समतुल्य की कमी हुई। इसी तरह अनाम ग्लेशियर में 0.92 मीटर, दूधगंगा में 0.88 मीटर, फेटिंग में 0.52 मीटर, जोगिन 0.34 और रतंगरियां 0.29 मीटर जल-समतुल्य सालाना कमी हुई। जल-समतुल्य खोए बर्फीले द्रव्यमान को पानी की मात्रा में व्यक्त करने की इकाई है, यह बर्फ की इतनी मोटाई पिघलने का सीधा माप नहीं।

दो ग्लेशियरों में बढ़ी बर्फ

वर्ष 2000–2014 में रतंगरियां और जोगिन का बर्फीला संतुलन सकारात्मक था। रतंगरियां में 0.24 और जोगिन में 0.13 मीटर जल-समतुल्य सालाना बढ़त हुई, लेकिन 2014–2025 में दोनों में कमी शुरू हो गई।

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खतलिंग का 5.33 किमी खिसकना खतरनाक

1973–2024 में खतलिंग का आगे का सिरा 5.33 किमी पीछे खिसका। फेटिंग 1.825 किमी पीछे हुआ और दोनों 2000 के करीब अलग हो गए। 1973–2001 में खतलिंग की अधिकतम दर 150 मीटर प्रति वर्ष रही। रतंगरियां में 2001–2014 में 29 मीटर और दूधगंगा में 2014–2024 में 20 मीटर प्रति वर्ष की अधिकतम दर दर्ज हुई।

क्षेत्रफल भी घटा

वर्ष 1973–2024 में खतलिंग का क्षेत्रफल 2.79, फेटिंग 0.71, दूधगंगा 0.64, अनाम ग्लेशियर 0.50, जोगिन 0.35 और रतंगरियां 0.23 वर्ग किमी घटा।

ग्लेशियर के सामने बढ़ती झील चिंता

अनाम ग्लेशियर के सामने झील का क्षेत्रफल वर्ष 2011 के 0.23 से बढ़कर 2024 में 0.36 वर्ग किमी हुआ। औसत गहराई 7.6 और अधिकतम 18.6 मीटर है। पूर्व अध्ययन के अनुसार झील का पानी वर्ष 1994 के 10.4 लाख घन मीटर से बढ़कर 2025 में 1.074 करोड़ घन मीटर हुआ। बढ़ती झील भविष्य में ग्लेशियर झील फटने से बाढ़ का खतरा बढ़ा सकती है।

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