इस सरकारी योजना से युवा होंगे मालामाल... मिलेगा 25 लाख तक का लोन और सब्सिडी की डबल डोज
यह योजना उत्तराखंड के युवाओं और प्रवासियों को 25 लाख रुपये तक का ऋण और सब्सिडी प्रदान करती है। आइए इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।

HighLights
25 लाख तक का ऋण और सब्सिडी उपलब्ध
33,600 से अधिक युवा हुए लाभान्वित
पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने में सहायक
निर्मला बोहरा, उत्तराखंड। मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना के तहत उत्तराखंड के युवाओं और प्रवासियों को खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए 10 लाख से 25 लाख रुपये तक का ऋण और सब्सिडी दी जाती है।
सरकार की यह योजना युवाओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। उन्हें रोजगार मांगने वाले से रोजगार देने वाला बना रही है। सरकार द्वारा एमएसएमई नीति के तहत A, B, C, D श्रेणियों के आधार पर परियोजना लागत का 15% से 25% तक का अनुदान दिया जाता है।
उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से होने वाले पलायन को रोकने और स्थानीय युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की यह योजना आज बड़ी आर्थिक क्रांति बन चुकी है। राज्य सरकार इस योजना के जरिए युवाओं को खुद का व्यवसाय शुरू करने के लिए वित्तीय सहायता देती है।
पर्वतीय और सीमांत जिलों में ज्यादा प्रभावी
मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना उत्तराखंड के पर्वतीय और सीमांत जिलों में ज्यादा प्रभावी साबित हो रही है। चमोली, अल्मोड़ा, पौड़ी गढ़वाल, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जिलों में युवाओं ने पारंपरिक कृषि से हटकर डेयरी फार्मिंग, होमस्टे (पर्यटन), बेकरी उद्योग, और कंप्यूटर सेवा केंद्र जैसे उद्यम स्थापित किए हैं।
33,600 से अधिक लोग लाभान्वित
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मुताबिक मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना 2.0 के माध्यम से 33,600 से अधिक लोग लाभान्वित हुए हैं। इस योजना से न केवल युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए आर्थिक सहायता मिल रही है, बल्कि वे आत्मनिर्भर बनकर अन्य लोगों के लिए भी रोजगार के अवसर सृजित कर रहे हैं।

ऐसे करें आवेदन
- आधिकारिक पोर्टल https://msy.uk.gov.in/ पर जाएं।
- होमपेज पर रजिस्टर बटन पर क्लिक करें। फिर डीटेल भरें।
- प्राप्त यूजरनेम और पासवर्ड से पोर्टल पर लॉगइन करें।
- अब फॉर्म में मांगी गई जानकारी भरें। फिर सबमिट कर दें।
कितना मिलता है अनुदान?
- मैन्युफैक्चरिंग उद्योगों के लिए अधिकतम 25 लाख रुपए।
- सर्विस सेक्टर के लिए अधिकतम 10 लाख रुपए।
ये हैं पात्रता की शर्तें
- आवेदक उत्तराखंड का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए।
- किसी विशेष शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता नहीं।
लाभ और उद्देश्य
- पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकना
- युवाओं को आत्मनिर्भर बनाना
- ग्रामीण आर्थिकी मजबूत करना
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