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    उत्तराखंड के इस गांव में गुलदार का ऐसा खौफ, भय के कारण तीन बुजुर्ग महिलाओं ने छोड़ा घर

    By Sudhir RawatEdited By: Sunil Negi
    Updated: Sat, 29 Nov 2025 03:31 PM (IST)

    पौड़ी जिले के खिर्सू ब्लाक स्थित कोटी गांव में गुलदार के डर से तीन बुजुर्ग महिलाओं ने गांव छोड़ दिया। गांव में तेंदुए के लगातार दिखने से दहशत का माहौल है। वन विभाग को सूचना देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई, जिससे ग्रामीणों में निराशा है। महिलाएं अब अपने रिश्तेदारों के साथ रहने को मजबूर हैं। शाम होते ही लोग घरों में दुबक जाते हैं।

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    सांकेतिक तस्वीर।

    सुधीर रावत, जागरण श्रीनगर गढ़वाल: पर्वतीय क्षेत्र में गुलदार और भालू के बढ़ते हमलों से सहमे ग्रामीण अब सुरक्षित ठौर तलाशने लगे हैं। इसी कड़ी में पौड़ी जिले के खिर्सू ब्लाक स्थित कोटी गांव से तीन बुजुर्ग महिलाएं हरिद्वार, देहरादून व श्रीनगर गढ़वाल शिफ्ट हो गईं।

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    बीते 20 नवंबर को कोटी गांव में 64-वर्षीय महिला को गुलदार निवाला बना लिया था। इस घटना के बाद कई लोगों ने अपने बुजुर्ग माता-पिता को शहर ले जाने का निर्णय लिया।

    कोटी में वन्य जीवों के हमलों से सहमे ग्रामीण न तो जंगल चारापत्ती लेने जा पा रहे, न खेतों में काम करने के लिए ही। बच्चों को स्कूल छोड़ने और लाने भी समूह में जाना पड़ रहा है। हालिया घटना के बाद तो लोगों को घरों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो गया है।

    शिक्षा विभाग में कार्यरत कृष्ण कुमार बताते हैं कि उन्होंने दो साल पहले गांव में नया मकान बनाया था, जिसमें उनकी 65-वर्षीय मां कांति देवी अकेले रहती थीं। वह भी लगातार गांव आते-जाते रहते थे। पिछले एक माह से तो वह गांव से ही स्कूल आना-जाना कर रहे थे, लेकिन हालिया घटना के बाद उन्हें मां को श्रीनगर लाना पड़ा।

    कोटी निवासी संदीप सिंह बताते हैं कि दो साल पहले उन्होंने गांव मकान की मरम्मत कराई थी, लेकिन गुलदार की दहशत के चलते अब उन्हें अपनी 56-वर्षीय मां कुशला देवी को देहरादून ले जाना पड़ा है।

    हरिद्वार में अपना व्यवसाय कर रहे कोटी निवासी जसपाल सिंह ने भी एक साल पहले गांव में नया घर बनाया था। उनकी 68-वर्षीय मां सरला देवी यहां अकेले रहती थीं, लेकिन अब सुरक्षा को देखते हुए वह भी उन्हें साथ ले जा रहे हैं।

    कमजोर परिवारों के सामने संकट

    ग्राम प्रधान करिश्मा देवी ने बताया कि कोटी गांव के तीन बुजुर्ग महिलाएं पलायन कर गई हैं। कहा कि आर्थिक रूप से सक्षम परिवार तो गांव छोड़ सकते हैं, लेकिन कमजोर परिवारों के सामने कोई विकल्प नहीं।

    इसलिए सरकार को ग्रामीणों की सुरक्षा के लिए ठोस योजना बनानी चाहिए, ताकि पलायन पर अंकुश लग सके। कहा कि पहले गांव में बड़ी संख्या में लोग रहते थे, लेकिन रोजगार की खातिर पलायन के चलते अब 20 से 22 परिवार ही रह गए हैं। ऐसे में गुलदार का आतंक पलायन को और बढ़ा रहा है।

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