प्राइवेट बैंक की मनमानी पर RBI का डंडा, क्रेडिट कार्ड बंद न करने पर ग्राहक को देना पड़ा 3.21 लाख का जुर्माना
एक निजी बैंक ने क्रेडिट कार्ड बंद करने के अनुरोध पर समय रहते कार्रवाई न करने के कारण, एक ग्राहक को 3.21 लाख का मुआवजा मिला है। यह मामला तब सामने आया ज ...और पढ़ें

प्राइवेट बैंक को क्रेडिट लिमिट घटाना और क्लोजर रिक्वेस्ट टालना पड़ा महंगा (सांकेतिक तस्वीर)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बैंकिंग नियमों की अनदेखी एक प्रमुख निजी बैंक को भारी पड़ गई है। एक निजी बैंक ने क्रेडिट कार्ड बंद करने के अनुरोध पर समय रहते कार्रवाई न करने के कारण, एक ग्राहक को 3.21 लाख का मुआवजा मिला है। यह मामला तब सामने आया जब पीड़ित ग्राहक ने 'रेडिट' पर अपनी आपबीती साझा की।

शिकायतकर्ता के अनुसार, यह विवाद मई 2025 में शुरू हुआ था। उनके पास कोटक बैंक के दो क्रेडिट कार्ड ('मिंत्रा' और 'मोजो प्लैटिनम') थे। बैंक ने बिना किसी ठोस कारण के उनकी क्रेडिट लिमिट एक लाख से घटाकर मात्र दस हजार कर दी थी। इससे नाराज होकर ग्राहक ने ईमेल के जरिए दोनों कार्ड बंद करने का अनुरोध किया।
ग्राहक ने क्लोजर रिक्वेस्ट के बाद दो रिमाइंडर ईमेल भी भेजे, लेकिन बैंक की ओर से कोई संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्हें लगा कि कार्ड बंद हो चुके हैं, लेकिन अप्रैल 2026 में खातों के ऑडिट के दौरान उन्हें पता चला कि बैंक ने उन पर 1,180 रुपये का वार्षिक शुल्क लगा दिया है। पूछताछ करने पर बैंक ने दावा किया कि कार्ड कभी बंद ही नहीं किए गए थे।
बैंकिंग लोकपाल के हस्तक्षेप से मिला न्याय
जब बैंक के नोडल अधिकारी ने यह कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने की कोशिश की कि ईमेल से क्लोजर रिक्वेस्ट स्वीकार नहीं होती, आपको फोन करना चाहिए था, तब ग्राहक ने मामले को बैंकिंग लोकपाल के पास पहुंचाया।
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आरबीआई के नियमों के अनुसार, यदि कोई बैंक क्रेडिट कार्ड बंद करने के अनुरोध के सात दिनों के भीतर कार्रवाई नहीं करता है, तो उसे ग्राहक को देरी के लिए प्रतिदिन 500 रुपये का जुर्माना देना होता है।
इस मामले में लंबी देरी और बैंक की सेवा में कमी को देखते हुए, अंततः बैंक को झुकना पड़ा और ग्राहक के साथ 3.21 लाख रुपये की समझौता राशि पर सहमति बनी।
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