सनातन धर्म में चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व होता है। आइए जानते हैं कि नवरात्र में अष्टमी या नवमी तिथि पर हवन करना शुभ होगा?
पूजा-पाठ करने के बाद हवन करना शुभ होता है। इससे आसपान का वासावरण शुद्ध रहता है देवी-देवताओं की कृपा प्राप्त होती है।
चैत्र नवरात्र में अष्टमी और नवमी तिथि पर हवन करना शुभ होगा। इन तिथियों में ब्रह्म मुहूर्त में हवन कर सकते हैं। वहीं, नवमी तिथि पर कई दुर्लभ योग का निर्माण भी होगा।
पंचांग के अनुसार, चैत्र नवरात्र में अष्टमी तिथि पर हवन करने का शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 59 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।
पंचांग के अनुसार, नवमी तिथि पर हवन करने का मुहूर्त सुबह 11 बजकर 58 मिनट से दोपहर 12 बजकर 49 मिनट तक रहेगा।
अष्टमी या नवमी तिथि पर हवन करते समय ऊं स्वस्ति न इन्द्रश्चाग्निश्च स्वस्ति नः पथ्यावतीः या ऊं दुं दुर्गायै नमः मंत्र का जाप करें। इससे पूजा करने का फल मिलता है।
चैत्र नवरात्र की अष्टमी या नवमी तिथि पर हवन में घी, तिल, जौ, गुग्गल, लोबान, और अन्य हवन सामग्री का उपयोग कर सकते हैं। इन चीजों से हवन करने से मां दुर्गा प्रसन्न होती हैं।
हवन करने से घर से नकारात्मक ऊर्जा दूर और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। इसके साथ ही, साधक पर मां दुर्गा की कृपा बरसती है।
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