जब किसी व्यक्ति की ब्रेन की सेल्स असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं, तो ऐसे में कहा जा सकता है कि वह व्यक्ति ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहा है। यह दो तरह का होता है, जिसमें कि पहला प्राइमरी ट्यूमर और मेटास्टेटिक ब्रेन ट्यूमर शामिल है।
जब किसी व्यक्ति के साथ लगातार सिर में दर्द, मतली और उल्टी, धुंधला दिखना, ठीक से सुनाई न देना, चलने या खड़े होने में परेशानी और चिड़चिड़ापन आदि परेशानियां होने लगती है, तो ऐसे में वह व्यक्ति ब्रेन ट्यूमर से जूझ रहा है।
आज हम आपको ब्रेन ट्यूमर से जुड़े कुछ ऐसे मिथकों के बारे में बताएंगे, जिनके बारे में आपको जरूर जानना चाहिए। आइए इसके बारे में विस्तार से जानें, ताकि आपको सही जानकारी हो सकें।
अगर आपके सिर में भयंकर दर्द हो रहा है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि ऐसा ब्रेन ट्यूमर के कारण हो रहा है। सिर में दर्द माइग्रेन, तनाव और पानी की कमी से हो सकता है।
आज के समय में ब्रेन ट्यूमर किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है। इसमें बच्चों से लेकर बूढ़े तक सभी शामिल है। यह केवल मिथक ही है कि ब्रेन ट्यूमर केवल बूढ़े लोगों को होता है।
समाज में यह धारणा बेहद आम है कि हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर का ही रूप होता है। यह बात सच नहीं है। इसमें झूठ के सिवा कुछ भी नहीं। हर ब्रेन ट्यूमर कैंसर नहीं होता। कई बार ट्यूमर बेनाइन यानी गैर-कैंसरयुक्त होता है।
ब्रेन ट्यूमर का सीधा सा मतलब होता कि मौत तय है। यह महज मिथक ही है। आज के समय में साइंस ने इतनी तरक्की कर ली है कि विभिन्न तकनीकों के जरिए ब्रेन ट्यूमर को कंट्रोल किया जा सकता है।
हम आशा करते हैं कि अभी हमने आपके सामने जो ब्रेन ट्यूमर से जुड़े कुछ मिथक रखें, वो आप समझ गए होंगे। वहीं, ब्रेन ट्यूमर से बचने के लिए सही लाइफस्टाइल को फॉलो करना बेहद जरूरी है।
लेख में उल्लेखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं। लाइफस्टाइल से जुड़ी तमाम बड़ी खबरों के लिए पढ़ते रहें jagran.com