'2021 के बाद हुई पुलिस की ज्यादती और राजनीतिक हिंसा की शिकायतें दर्ज करें', सीएम सुवेंदु ने दिए निर्देश
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पुलिस को पिछले पांच सालों की पुलिस ज्यादती और उत्पीड़न की शिकायतें अनिवार्य रूप से स्वीकार करने का निर् ...और पढ़ें
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पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी(फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने शनिवार को शीर्ष प्रशासनिक और पुलिस अधिकारियों के साथ अपनी पहली समीक्षा बैठक के बाद एक बड़ा फैसला सुनाया है। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि राज्य के सभी थानों को पिछले पांच वर्षों के दौरान हुई पुलिस ज्यादती और उत्पीड़न की शिकायतों को अनिवार्य रूप से स्वीकार करना होगा।
यह बैठक राजनीतिक रूप से बेहद प्रतीकात्मक रही, क्योंकि इसका आयोजन डायमंड हार्बर में किया गया था। डायमंड हार्बर पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे और टीएमसी महासचिव अभिषेक बनर्जी का लोकसभा क्षेत्र है।
इन चार श्रेणियों में दर्ज की जा सकेंगी नई शिकायतें
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने चार प्रमुख श्रेणियों का उल्लेख किया, जिनके तहत पीड़ित लोग अब थानों में अपनी नई शिकायतें या प्राथमिकी दर्ज करा सकते हैं, जिसमें राजनीतिक हिंसा, पुलिस बर्बरता, महिला उत्पीड़न, जबरन वसूली और रिश्वतखोरी शामिल है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों के साथ भी पिछले पांच सालों में अन्याय हुआ है, वे थानों में जाकर नई FIR दर्ज कराएं। पुलिस को हर हाल में इन शिकायतों को स्वीकार करना होगा। बंगाल अब शासक के कानून से निकलकर कानून के शासन की ओर बढ़ेगा।
मंत्रियों के निजी स्टाफ के इशारे पर नहीं चलेगी पुलिस
पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार पर निशाना साधते हुए सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि ममता सरकार ने प्रशासनिक अनुशासन और संस्थागत पदानुक्रम को पूरी तरह कमजोर कर दिया था। राज्य में डर का माहौल बना दिया गया था।
उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पहले पुलिस थानों को मंत्रियों के निर्देश पर चलाया जाता था। कई बार स्थिति यह होती थी कि मंत्रियों का निजी स्टाफ पुलिस अधिकारियों को सीधे निर्देश दे रहा होता था और जिले के पुलिस कप्तान को इसकी भनक तक नहीं होती थी। अब यह सब पूरी तरह बदल जाएगा।
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प्रशासनिक बैठकों में नहीं होगा राजनीतिक भाषणबाजी
अपनी सरकार के कामकाज का तरीका साफ करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अब से उनकी प्रशासनिक बैठकें राजनीतिक रंग नहीं लेंगी। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को उनकी ट्रेनिंग और पेशेवर मर्यादा के अनुसार काम करने दिया जाएगा।
बैठकों के दौरान अधिकारियों को नाम से पुकारना और उनके सामने राजनीतिक भाषण देना अब पूरी तरह बंद होगा। अधिकारी प्रशिक्षित पेशेवर हैं और वे नियमों के तहत ही काम करेंगे।
पुलिस वेलफेयर बोर्ड भंग
मुख्यमंत्री ने एक और बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल में गठित पुलिस वेलफेयर बोर्ड को तत्काल प्रभाव से भंग करने का एलान किया। अधिकारी ने आरोप लगाया कि यह बोर्ड अपने मूल उद्देश्यों से भटक गया था और एक राजनीतिक संगठन की तरह काम कर रहा था।
उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्त पुलिस अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श के बाद अगले तीन महीनों के भीतर एक नया प्रशासनिक ढांचा तैयार किया जाएगा।
इसके साथ ही उन्होंने जमीन पर होने वाली अवैध वसूली को रोकने के लिए कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आज से ऑटो चालकों, ई-रिक्शा चालकों या फेरीवालों से कोई भी अवैध वसूली नहीं करेगा। बिना आधिकारिक रसीद के कोई भी टोल या शुल्क न चुकाया जाए। यदि कोई भी पैसे की मांग करता है, तो लोग सीधे पुलिस स्टेशन जाकर शिकायत दर्ज कराएं।
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