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    चुनाव की थकान मिटा रहा IPL, कार्यकर्ताओं के लिए बना 'स्ट्रेस बस्टर'

    By Vishal ShresthaEdited By: Naveen Kumar
    Updated: Thu, 16 Apr 2026 08:41 PM (IST)

    बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच आईपीएल लोगों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं के लिए 'स्ट्रेस बस्टर' बन गया है। ईडन गार्डन्स में मैच देखने के लिए भारी भीड़ उम ...और पढ़ें

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    चुनाव के भारीपन को कम कर रहा आईपीएल(प्रतीकात्मक फाइल तस्वीर)

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    विशाल श्रेष्ठ, जागरण, कोलकाता। बंगाल में चुनावी सरगर्मी के बीच आइपीएल भी खूब छाया हुआ है बल्कि इसने चुनाव के भारीपन को कम कर दिया है। लोग इसका खूब आनंद ले रहे हैं। ईडन गार्डेंस स्टेडियम में होने वाले आइपीएल मैच दर्शकों से खचाखच भर रहे हैं। दूर-दराज से लोग मैच देखने आ रहे हैं। टिकटों को लेकर होड़ मची है।

    कोलकाता के बालीगंज इलाके में चुनावी मंच से नेता भाषण दे रहे हैं-जवाब चाई, जवाब दाओ (जवाब चाहिए, जवाब दो। तभी नीचे श्रोताओं की भीड़ में खड़ा एक व्यक्ति दूसरे से पूछता है-'विराटेर पंचाश होलो कि? (विराट का अर्धशतक हो गया क्या?)।

    पार्टी कार्यकर्ता दूर कर रहे दबाव

    कोलकाता में चुनाव प्रचार चरम पर है। रोजाना ढेरों सभाएं हो रही हैं, जुलूस निकल रहे हैं, प्रत्याशी घर-घर जाकर वोट की अपील कर रहे हैं। पार्टी कार्यालयों में गहमागहमी बढ़ गई हैं। इतनी व्यस्तता के बावजूद पार्टी कार्यकर्ता मोबाइल फोन खंगालने का समय निकाल ही ले रहे हैं-अपनी पसंदीदा टीमों अथवा खिलाड़ियों के रन जानने के लिए।

    एक पार्टी के कार्यकर्ता ने कहा-'मन हल्का करने के लिए बीच-बीच में ध्यान कहीं और ले जाना जरुरी है। आइपीएल हमारे लिए 'स्ट्रेस बस्टर' की तरह है।

    आइपीएल मैचों के दिन प्रचार धीमा

    कोलकाता में आइपीएल मैचों के दिन चुनाव प्रचार धीमा दिख रहा है। एक पार्टी कार्यकर्ता ने कहा-'मैच वाले दिन सभा-जुलूस करने से ट्रैफिक जाम की समस्या हो सकती है। इससे मैच देखने स्टेडियम जाने वाले में हमारे प्रति नाराजगी पैदा हो सकती है।

    हमारे लिए एक-एक वोट महत्वपूर्ण है इसलिए हम मैच वाले दिन शाम को सभा-जुलूस करने से बच रहे हैं। वैसे भी इस दिन कोई राजनीति की बातें करना या सुनना नहीं चाहता। हमारे लिए यह 'रिलैक्सिंग डे' की तरह है।

    मतदान जरुरी, मनोरंजन भी उतना ही महत्वपूर्ण

    ईडन में कोलकाता-हैदराबाद का मैच देखने आए आइटी पेशेवर सुप्रतिम सरकार ने कहा-'मतदान नि:संदेह जरुरी है, पर मनोरंजन भी उतना ही महत्वपूर्ण है।' कालेज छात्रा प्रिया दास कहती हैं-'चुनाव हमारे भविष्य के लिए जरुरी है। हम उसके बारे में गंभीरता से सोचते हैं लेकिन हमें भी थोड़ा ब्रेक चाहिए।'

    राजनीतिक विश्लेषक प्रो शुभ्रांशु मुखर्जी का मानना है कि आइपीएल का असर विशेषकर शहरी व युवा मतदाताओं पर दिखता है, हालांकि यह अस्थायी है। क्रिकेट माहौल बनाता है लेकिन चुनाव नतीजे तय करते हैं। दोनों का असर अलग स्तर पर है।

    इंटरनेट मीडिया पर भी आइपीएल हावी

    इंटरनेट मीडिया पर आइपीएल संबंधी कंटेंट चुनाव प्रचार की सामग्रियों पर भारी पड़ रहे हैं। कंटेंट क्रिएटर रिया सेन कहती हैं-'चुनाव का कंटेंट गंभीर होता है। आइपीएल मनोरंजक है इसलिए युवा उससे जल्दी व बड़ी संख्या में कनेक्ट हो जाते हैं।

    मनोविज्ञानी अभिषेक हंस ने कहा-'आज किसी के पास समय नहीं है। काम का भारी दबाव है, इसलिए सभी कम समय में अधिक से अधिक मनोरंजन चाहते हैं, जो आइपीएल उन्हें प्रदान करता है। अधिकांश लोगों ने तय कर लिया है कि उन्हें किसे वोट देना है इसलिए वे चुनाव पर ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे बल्कि अपनी मनोरंजन संबंधी जरुरतों को पूरा करना उनकी प्राथमिकता है।