बंगाल में 'डिपोर्टेशन' की तैयारी: घुसपैठियों के लिए बन रहे होल्डिंग सेंटर, अब जेल नहीं सीधे बाहर का रास्ता
पश्चिम बंगाल सरकार ने अवैध विदेशी नागरिकों, खासकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों के खिलाफ 'डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट' नीति लागू की है। ...और पढ़ें
-1779903478378_m.webp)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
राज्य ब्यूरो, कोलकाता। बंगाल में शुभेंदु अधिकारी की अगुवाई वाली नई भाजपा सरकार ने राज्य में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों, खासकर बांग्लादेशी और रोहिंग्या घुसपैठियों, के खिलाफ बड़ा अभियान शुरू किया है।
सरकार की नई डिटेक्ट-डिलीट-डिपोर्ट नीति के तहत राज्य के सभी जिलों में होल्डिंग सेंटर (हिरासत केंद्र) बनाए जा रहे हैं, जहां पकड़े गए अवैध प्रवासियों को निर्वासन से पहले रखा जाएगा।
शुभेंदु अधिकारी का घुसपैठियों को सख्त संदेश
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने हाल ही में घुसपैठियों को सख्त संदेश देते हुए कहा कि जल्दी जल्दी भागो, नहीं तो जो करना है सरकार करेगी। उनके इस बयान के बाद भारत-बांग्लादेश सीमा से लगे इलाकों में दहशत फैल गई।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिक, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल हैं, संभावित हिरासत और निर्वासन के डर से सीमा क्षेत्रों में इकट्ठा होने लगे हैं।
23 मई को राज्य सरकार ने सभी 23 जिलों के जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर “होल्डिंग सेंटर” स्थापित करने को कहा है। इन केंद्रों में उन विदेशी नागरिकों को रखा जाएगा जो अवैध रूप से राज्य में रह रहे हैं या जेल से रिहा होने के बाद भी निर्वासन की प्रक्रिया का इंतजार कर रहे हैं।
सरकारी आदेश के अनुसार यह कदम केंद्रीय गृह मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत उठाया गया है। राज्य सरकार का दावा है कि यह नीति लंबे समय से लंबित थी, जिसे अब औपचारिक रूप से लागू किया जा रहा है।
निर्देश में जिला प्रशासन से कहा गया है कि पकड़े गए विदेशियों और निर्वासन की प्रतीक्षा कर रहे विदेशी कैदियों के लिए उपयुक्त 'होल्डिंग सेंटर' स्थापित किए जाएं।
सूत्रों के अनुसार, हर जिले में कम से कम एक ऐसा केंद्र बनाया जाएगा और वहां लोगों को अधिकतम 30 दिनों तक रखा जा सकेगा।
यह कदम मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी द्वारा अवैध प्रवासियों को लेकर सार्वजनिक रूप से सरकार की “डिपोर्टेशन रोडमैप” की घोषणा के लगभग 72 घंटे बाद उठाया गया है।
सरकार का कहना है कि इन केंद्रों का उद्देश्य अवैध विदेशी नागरिकों की पहचान, रिकॉर्ड सत्यापन और उनके मूल देश में प्रत्यावर्तन की प्रक्रिया को व्यवस्थित करना है। हालांकि विपक्षी दल और मानवाधिकार संगठनों ने इस कदम को लेकर चिंता भी जताई है।
बांग्लादेशी घुसपैठियों के लिए दो और होल्डिंग सेंटर तैयार
बंगाल की नई भाजपा सरकार ने राज्य के विभिन्न जिलों में बांग्लादेशी घुसपैठियों को रोकने और उन्हें शीघ्र वापस भेजने के लिए होल्डिंग सेंटर बनाने की तैयारी तेज कर दी है।
खबरें और भी
उत्तर बंगाल में मालदा के बाद जलपाईगुड़ी जिले में दो होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं, जबकि कूचबिहार जिले में तीन होल्डिंग सेंटर तैयार किए जा रहे हैं।
अब बांग्लादेश से भारत में घुसने वाले लोगों को सीधे जेल नहीं भेजा जाएगा। उन्हें होल्डिंग सेंटर में रखा जाएगा फिर बीएसएफ के हवाले कर दिया जाएगा। उसके बाद बीएसएफ, बांग्लादेश बॉर्डर गार्ड्स (बीजीबी) के साथ समन्वय कर उन्हें पुशबैक की प्रक्रिया पूरी करेगा।
जलपाईगुड़ी जिला प्रशासन द्वारा चिह्नित किए गए दोनों होल्डिंग सेंटर सीमा क्षेत्र के काफी निकट हैं। जलपाईगुड़ी के जिलाधिकारी संदीप कुमार घोष ने कहा है कि सरकार की नई निर्देशिका के अनुसार ही होल्डिंग सेंटर बनाए जा रहे हैं। सभी प्रक्रियाएं कानून के दायरे में रखते हुए पूरी की जाएंगी।
जलपाईगुड़ी जिले में भारत-बांग्लादेश सीमा की लंबाई करीब 45 किलोमीटर है। पहले वापस भेजना काफी मुश्किलखुली सीमा का फायदा उठाकर बांग्लादेशी नागरिक अक्सर भारत में घुसपैठ करते हैं।
पहले उन्हें पकड़कर अदालत में पेश किया जाता था, फिर जलपाईगुड़ी केंद्रीय जेल में भेज दिया जाता था। सजा पूरी होने के बाद उन्हें बांग्लादेश वापस भेजने में बड़ी मुश्किलें आती थीं। क्योंकि उनके पास बांग्लादेशी दस्तावेज नहीं होते थे, इसलिए बांग्लादेश सरकार उन्हें अपने नागरिक के रूप में स्वीकार नहीं करती थी। जिसके कारण वह जेल से छूटने के बाद भी वर्षों तक भारत में फंस जाते थे।
नई व्यवस्था में इस समस्या का समाधान करने की कोशिश की जा रही है। अब घुसपैठियों को होल्डिंग सेंटर में रखकर तुरंत पुशबैक की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। अधिकारियों के अनुसार होल्डिंग सेंटरों में बुनियादी सुविधाएं जैसे रहने की व्यवस्था, भोजन और चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।