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    'तूफान से पहले की शांति', ईरान पर एक्शन को लेकर ट्रंप ने फिर दी वॉर्निंग

    Updated: Sun, 17 May 2026 09:09 AM (IST)

    अमेरिका के राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ईरान पर हमले की योजना बना रहे हैं और उन्होंने 'तूफान से पहले की शांति' की चेतावनी दी है। ईरान के विदेश मंत्री ने बा ...और पढ़ें

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    ट्रंप ने फिर दी ईरानको चेतावनी।

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका एक बार फिर ईरान पर हमले की योजना बना रहा है। इस तरह की चर्चा है कि राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अपने टॉप के अफसरों के साथ इसकी चर्चा की है। इन सब के बीच ट्रंप ने धमकी भरे लहजे में कहा कि यह तूफान से पहले की शांति है।

    अपने सोशल मीडिया पर शेयर की गई एक एआई वाली तस्वीर में ट्रंप को मेक अमेरिका ग्रेट अगेन वाली टोपी पहने हुए देखा जा सकता है और उनके बगल में यूएस नेवी के एक एडमिरल हैं। इस तस्वीर में ये दोनों उफनते पानी और बिजली कड़कने के बीच नेवी के एक जहाज पर सवार नजर आ रहे हैं और बैकग्राउंड में ईरानी जहाज दिखाई दे रहे हैं।

    ईरान को चेतावनी

    "यह तूफान से पहले की शांति" कैप्शन के साथ शेयर की गई इस तस्वीर के इस संदेश को ईरान के लिए एक चेतावनी के तौर पर देखा जा सकता है। दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स ने दावा किया है कि ट्रंप ईरान को लेकर एक अहम फैसला लेने वाले हैं। उनके शीर्ष सहयोगी हवाई हमले फिर से शुरू करने की योजना बना रहे हैं।

    ट्रंप ने यह तस्वीर ऐसे समय पर शेयर की, जब मिडिल-ईस्ट में 8 अप्रैल को हुआ सीजफायर अभी भी लागू है लेकिन अहम समुद्री मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर तनाव कम होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं।

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    ट्रंप ने ईरान को यह भी चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही कोई शांति समझौता नहीं हुआ तो उसके लिए बहुत बुरा समय आ सकता है। ट्रंप ने एक टेलीफोन इंटरव्यू में फ्रांसीसी ब्रॉडकास्टर BFMTV से कहा, "समझौते तक पहुंचने में उनका भी फायदा है।"

    ईरान ने क्या कहा?

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शुक्रवार को कहा कि उनकी सरकार को ट्रंप प्रशासन से ऐसे संदेश मिले हैं जिनसे लगता है कि वे नई बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन उन्होंने यह भी चेताया कि वॉशिंगटन के असली इरादों को लेकर अविश्वास अभी भी बना हुआ है।

    हालांकि पिछले महीने युद्धविराम पर सहमति बन गई थी, फिर भी एक स्थायी शांति समझौता अभी भी दूर का लक्ष्य बना हुआ है। खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका ने अपने कुछ प्रमुख युद्धपोतों की तैनाती बनाए रखी। हालांकि, दुनिया का सबसे बड़ा विमानवाहक पोत USS Gerald R Ford 11 महीने की तैनाती के बाद स्वदेश लौट आया।

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