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    कयामत से सिर्फ 85 सेकंड दूर.. क्या है डूम्‍सडे क्‍लॉक और क्यों इसके समय ने बढ़ाई पूरी दुनिया की धड़कनें?

    Updated: Thu, 29 Jan 2026 08:55 PM (IST)

    Doomsday Clock Update 2026: बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स ने 2026 में डूम्‍सडे क्‍लॉक को आधी रात से महज 85 सेकंड पहले सेट किया है। यह 1947 में घड़ी ...और पढ़ें

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    क्या 2026 में सचमुच विनाश के मुहाने पर खड़ी है दुनिया? फोटो- एआई जेनरेटेड

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    डिजिटल डेस्‍क, नई दिल्‍ली। 27 जनवरी 2026 को बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स ने अपनी 'डूम्सडे क्लॉक' को 12 बजने से महज 85 सेकंड पहले सेट किया है। यह अब तक सबसे खतरनाक लेवल है। इसी के साथ एक सवाल लोगों के जेहन में तैरने लगा है कि क्‍या दुनिया विनाश के बेहद करीब पहुंच गई है, क्‍योंकि यहां 12 बजने का मतलब तबाही तय है।

    इस घड़ी को सेट करने वाली संस्था Bulletin of the Atomic Scientists का कहना है -

    न्यूक्लियर वेपन और क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दों पर दुनिया भर के देशों के आपसी सहयोग लगातार कम हो रहा है। एआई नित नए खतरे पैदा करता जा रहा है। अमेरिका, रूस और चीन जैसे शक्तिशाली देश पहले से ज्‍यादा आक्रामक, टकराव वाले और राष्‍ट्रावादी हो रहे हैं।

    विश्व में जो आपसी समझ थी वो खत्म हो रही है और जो नियम बने थे वे भी टूट रहे हैं। 'जो जीतेगा, वही सब का मालिक होगा' वाली रेस देशों को अंत की ओर धकेल रही है।

    Doomes day inside 2


    'डूम्‍सडे क्‍लॉक' क्‍या होती है?

    शिकागो के एक नॉन प्रॉफिट संगठन ने साल 1947 में दूसरे विश्‍व युद्ध के बाद कोल्‍ड वॉर के तनाव के दौरान लोगों को चेतावनी देने के लिए Doomsday Clock बनाई थी। इसे प्रलय की घड़ी भी कहा जाता है। डूम्‍सडे क्लॉक बनाने का मकसद यह बताना है कि मानव जाति दुनिया के अंत के कितने करीब पहुंच गई है।

    फिर इस क्‍लॉक को सेट करने की जिम्मेदारी बुलेटिन ऑफ द एटॉमिक साइंटिस्ट्स को सौंप दी गई। इस संस्था को 1945 में मशहूर वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन और अमेरिका के लिए परमाणु हथियार बनाने वाले रॉबर्ट ओपनहाइमर ने बनाया था। तब से क्‍लॉक को सेट करने की जिम्मेदारी इसी संस्था के पास है।

    Doomes day inside

     

    'डूम्‍सडे क्‍लॉक' कैसे काम करती है?

    Doomsday Clock सामान्‍य घड़ियां आगे की ओर बढ़ते हुए समय बताती हैं, जैसे- 1 बजेगा, फिर 2 बजेंगे और फिर इसी तरह 12 तक बजते जाते हैं। फिर यह क्रम चलता रहता है। पर डूम्सडे क्लॉक टाइमर जैसे चलती है।  इसके बारे में कहावत है- ‘Time Left To Midnight’। यहां मिडनाइट का मतलब तबाही, प्रलय या फिर कयामत की रात जैसे शब्दों से है।

    यह समय बताती है, लेकिन इस तरह कि तबाही होने में अभी कितना वक्त बाकी है। जैसे-जैसे क्लॉक की सुई 12 बजने के नजदीक पहुंचेगी तो समझ जाना है कि दुनिया के हालात और ज्यादा विनाशकारी हो रहे हैं।

    ऐसे समझिए-

    • सुई आगे की ओर (Clockwise)- दुनिया ज्यादा खतरे में है।
    • सुई पीछे की ओर (Anti-clockwise) - दुनिया अपेक्षाकृत सुरक्षित।

    डूम्‍सडे क्‍लॉक का समय इस बार क्‍यों बदला?

    डूम्सडे क्लॉक का समय इस बार इसलिए बदला गया- परमाणु युद्ध का खतरा, रूस-यूक्रेन और अन्य युद्ध, बढ़ता जलवायु संकट, एआई व बायोटेक के जोखिम तथा वैश्विक सहयोग की कमी बढ़ गई है। वैज्ञानिकों ने माना कि मानवता अब पहले से ज्यादा विनाश के करीब है।

    'डूम्‍सडे क्लॉक' में कितनी बार बदला गया समय?

    डूम्‍सडे क्लॉक में 1947  से लेकर अब तक कुल 27 बार समय बदला जा चुका है।  

    • 1947 में जब यह क्‍लॉक बनी थी तब इसमें रात के 12 बजने में 7 मिनट बाकी थे।  
    • 1949 में सोवियत संघ ने न्यूक्लियर बम बनाया तो 12 बजने में केवल 3 मिनट बचे थे।  
    • 1953 में अमेरिका ने हाइड्रोजन बम बनाया तब इसका समय आधी रात से 2 मिनट बाकी थे।  
    • 1963  में आंशिक परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि के बाद क्लॉक 12 बजने से 12 मिनट पहले सेट की गई।
    • 1991 में कोल्ड वॉर खत्म होने के बाद क्‍लॉक में 12:00 बजने से 17 मिनट बाकी थे, यानी समय 11:43 PM था।
    • 1998 में भारत-पाकिस्तान के न्यूक्लियर टेस्ट के बाद 12 बजने में 9 मिनट बचे थे, यानी समय 11:51 PM था।  
    • 2017 में बढ़ते परमाणु तनाव और जलवायु संकट के चलते आधी रात में सिर्फ  150 सेकंड (11:57:30 PM) का समय बचा था।
    • 2018 में दुनिया भर में तनाव बढ़ जाने पर क्‍लॉक में 12 बजने में 2 मिनट बाकी थे, यानी समय 11:58 PM था।
    • 2020 में  आधी रात में सिर्फ  100 सेकंड का समय बचा था, यानी समय 11:58:20 PM था।
    • 2023 में यूक्रेन युद्ध की वजह से 12 बजने में 90 सेकंड बचे थे, यानी- 11:58:30 PM पर सेट किया गया था।
    • 2025 में समय 12 बजने से 89 सेकंड पहले (11:58:31 PM) सेट किया गया।
    • 2025 में इसे 89 सेकंड पर सेट कर किया गया था
    • 2026 में इसे अब तक सबसे खतरनाक लेवल पर  12 बजने से 85 सेकंड पहले (11:58:35 PM) सेट किया गया है।
     
    Doomsday Clock Time change in year

    डूम्‍सडे क्लॉक में समय बदलने का मतलब है?

    डूम्‍सडे क्लॉक एक सिंबॉलिक घड़ी है। समय बदलकर परमाणु युद्ध का खतरा, दुनिया भर में चल रहे युद्ध, जलवायु संकट, जैविक खतरों और तकनीकी जोखिमों से आगाह किया जाता है।

    • अगर रात के 12 बजने में कम समय बाकी रहेगा तो खतरा बढ़ रहा है।
    • अगर 12 बजने में समय ज्यादा बच रहा है तो खतरा कम हो रहा है।  

    डूम्‍सडे  क्लॉक के बारे में यह भी जान लें..

    • यह एक सिंबॉलिक घड़ी है। यह समय नहीं बताती, मानवता के विनाश के खतरे की चेतावनी देती है।
    • हर वर्ष जनवरी में वैज्ञानिक प्रेस कॉन्फ्रेंस में नया समय बताते हैं और ग्लोबल रिस्क रिपोर्ट जारी करते हैं।
    • डूम्‍सडे क्लॉक के मुताबिक, 1991 में सबसे सुरक्षित समय (17 मिनट)  था और 2026 में सबसे खतरनाक समय (85 सेकंड) है।  
    • शुरुआत में सिर्फ न्यूक्लियर खतरे की चेतावनी देती थी। बाद में क्लाइमेट चेंज, AI, साइबर और बायोटेक को जोड़ा गया।
    • भारत की वजह से भी 1974 और 1998 में समय बदला गया। इन दोनों सालों में भारतीय परमाणु परीक्षण हुए थे।
    • 2007 में पहली बार जलवायु संकट को लेकर क्‍लॉक का समय बदला गया।
    • 2020 से पहले क्‍लॉक का समय मिनटों में गिना जाता था, उसके बाद खतरा इतना बढ़ा कि समय सेकंड में गिना जाने लगा।
    • इसका मकसद डर फैलाना नहीं, बल्कि नीति बदलाव के लिए चेतावनी देना है।
     

     यह भी पढ़ें- आधी रात से सिर्फ 85 सेकंड दूर... डूम्सडे क्लॉक को क्यों कहा जाता है तबाही की घड़ी?

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