दबाव में न आने की रणनीति: पूर्व अमेरिकी मंत्री ने कहा- भारत की 'लॉजिकल' सोच के आगे ट्रंप को भी झुकना पड़ा
भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते की रूपरेखा तय होने के बाद नई संभावनाओं के खुलने की बात सामने आ रही है। अमेरिका के पूर्व सहायक ...और पढ़ें

एएनआई, वाशिंगटन। भारत और अमेरिका के बीच अंतरिम द्विपक्षीय व्यापार समझौते की रूपरेखा तय होने के बाद नई संभावनाओं के खुलने की बात सामने आ रही है।
अमेरिका के पूर्व सहायक वाणिज्य मंत्री रेमंड विकरी ने कहा कि भारत ने अधिकांश देशों की तुलना में अधिक तार्किक और सुनियोजित प्रक्रिया अपनाई है और अराजकता के बजाय विवरणों पर काम करने को प्राथमिकता दी है।
एक विशेष इंटरव्यू में विकरी ने कहा कि सामान्य तौर पर बड़े व्यापारिक समझौते विस्तृत बातचीत और तकनीकी बिंदुओं के अंतिम रूप लेने के बाद ही घोषित किए जाते हैं, जबकि हालिया अमेरिकी शैली अपेक्षाकृत जल्द घोषणा कर बाद में ढांचे में विवरण समेटने की रही है।
विकरी के अनुसार भारत अब भी औपचारिक समझौते की दिशा में आगे बढ़ने की बात कर रहा है, जो पारंपरिक और टिकाऊ तरीका है।
उन्होंने रूस से तेल आयात के मुद्दे पर अमेरिका-भारत सहयोग की जरूरत भी रेखांकित की। उनका कहना था कि भारत-रूस संबंध जटिल हैं और इन्हें अचानक समाप्त करना व्यावहारिक नहीं होगा, इसलिए संतुलित और दीर्घकालिक ²ष्टिकोण आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि स्थायी व्यापार समझौते के लिए दोनों पक्षों को इंटरनेट मीडिया घोषणाओं से आगे बढ़कर परिचालन स्तर पर ठोस प्रविधान करने होंगे, ताकि समझौता समय की कसौटी पर खरा उतर सके।
संयुक्त बयान के अनुसार अंतरिम ढांचा व्यापक भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (बीटीए) वार्ताओं के प्रति प्रतिबद्धता दोहराता है, जिसका उद्देश्य बाजार पहुंच बढ़ाना और आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना है।
उन्होंने कहा कि ये समझौता जिस तरह से हुआ है, वह ट्रंप के तौर-तरीकों से बिल्कुल अलग है। उनका अंदाज एकतरफा घोषणा करने की रही है, भले ही वह वास्तविकता के करीब हो या नहीं।
वहीं, भारत ने बारीकियों पर काम किया, किसी मामले में हड़बड़ी नहीं की और आज भी कुछ महीनों में किसी समझौते पर पहुंचने की बात हो रही है। और इसी तरह व्यापार समझौते सफल भी होते हैं। समयसीमा के हिसाब से देखा जाए तो ये समझौता असाधारण तरीके से हुआ है।
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