जयशंकर की वैश्विक मंच से अपील: बोले- एआई की ताकत को पहचानें, मगर डिजिटल दुनिया के नए खतरों से सतर्क रहें
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से मिलने वाले अवसरों का अधिकतम उपयोग करने के साथ-साथ इसके संभावित ...और पढ़ें

जयशंकर ने एआई की क्षमता का उपयोग करने और उभरते जोखिमों से निपटने पर दिया जोर
HighLights
जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए
भारत-जीसीसी संयुक्त कार्ययोजना 2024-28 की प्रगति की समीक्षा की
आईएएनएस, न्यूयॉर्क। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से मिलने वाले अवसरों का अधिकतम उपयोग करने के साथ-साथ इसके संभावित परिणामों और उभरते जोखिमों से निपटने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एआई में नवाचार को बढ़ावा देते हुए इसके सुरक्षा प्रभावों को भी ध्यान में रखना जरूरी है।
जयशंकर ने ग्रीस के विदेश मंत्री जार्ज गेरापेत्रितिस के साथ ‘अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के संदर्भ में एआई, विशेष रूप से समुद्री सुरक्षा पर जोर’ विषयक सत्र की सह-अध्यक्षता की।
उन्होंने बताया कि हाल में संपन्न 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाई गई नई दिल्ली घोषणा में एआइ संसाधनों तक लोकतांत्रिक पहुंच, सुरक्षित और भरोसेमंद प्रणालियों के विकास, मानव क्षमताओं में निवेश तथा आर्थिक विकास और सामाजिक कल्याण के लिए एआई के इस्तेमाल पर जोर दिया गया है।
समुद्री क्षेत्र में एआइ की भूमिका पर जयशंकर ने कहा कि इससे समुद्री गतिविधियों की निगरानी, खोज एवं बचाव, आपदा प्रतिक्रिया, संदिग्ध गतिविधियों की पहचान और बंदरगाहों तथा महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा मजबूत की जा सकती है।
इसके साथ ही विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयार्क में भारत-खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) ट्रोइका मंत्रिस्तरीय बैठक की सह-अध्यक्षता की।
उन्होंने भारत-जीसीसी संयुक्त कार्ययोजना 2024-28 की प्रगति की समीक्षा की और साझेदारी को आगे बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा की। उन्होंने भारत-जीसीसी मुक्त व्यापार समझौते की वार्ता शुरू होने का स्वागत किया। इससे पहले जयशंकर ने संयुक्त राष्ट्र साइबर अपराध कन्वेंशन पर हस्ताक्षर किए ।
ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्र का विकल्प नहीं, बल्कि समर्थक है: जयशंकर
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्र का विकल्प नहीं है, बल्कि उसका समर्थन करता है और इसके सुधारों पर जोर देता है। उन्होंने इसे गलत तुलना बताते हुए कहा कि ब्रिक्स या संयुक्त राष्ट्र में से किसी एक को चुनने की आवश्यकता नहीं है। ब्रिक्स संयुक्त राष्ट्र की मजबूती और उसके ढांचे में सुधार का पक्षधर है।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने कहा है कि ब्रिक्स (BRICS) और संयुक्त राष्ट्र (UN) जैसे समूहों में से किसी एक को चुनना "गलत विकल्प" है। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि छोटे समूह वैश्विक संगठन का समर्थन करते हैं और चाहते हैं कि उसमें सुधार हो।
जयशंकर ने कहा, "...मुझे लगता है कि यह एक गलत विकल्प है। UN तो UN है। हो सकता है कि उसमें कई कमियां हों। उसकी कई उपलब्धियां भी हैं, और ज़ाहिर है, जब आप उसमें सुधार करना चाहते हैं या उसे बदलना चाहते हैं, तो कमियों पर ध्यान देना स्वाभाविक है। लेकिन मुझे नहीं लगता कि इससे हमें UN को नज़रअंदाज़ कर देना चाहिए।"
