इबोला की वैक्सीन विकसित करने के लिए दिए जाएंगे 60 मिलियन डॉलर, मॉडर्ना और दो अन्य समूहों को दी गई जिम्मेदारी
महामारी की तैयारी संबंधी नवाचारों के लिए गठबंधन (सीईपीआई) ने मॉडर्ना और दो अन्य समूहों को इबोला बुंडीबुग्यो वैक्सीन विकसित करने के लिए लगभग 60 मिलियन ...और पढ़ें

इबोला के लिए बनेगी वैक्सीन। (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। महामारी की तैयारी संबंधी नवाचारों के लिए गठबंधन (सीईपीआई) कांगो में फैले घातक वायरस इबोला बुंडीबुग्यो के टीके के विकास में तेजी लाने के लिए मॉडर्ना और दो अन्य समूहों को लगभग 60 मिलियन डॉलर देगा।
सीईपीआई के प्रमुख रिचर्ड हैचेट ने बताया कि इबोला बुंडीबुग्यो के टीके को कुछ ही महीनों में परीक्षण के लिए तैयार करना संभव है। इबोला बुंडीबुग्यो के लिए अभी तक कोई भी स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है।
साथ में चेतावनी भी दी
हैचेट ने कहा, "इस घातक बीमारी के खिलाफ लड़ाई में हर दिन मायने रखता है।" उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में टीकों की उपलब्धता की उम्मीद से इस बारे में बातचीत शुरू करने में मदद मिलनी चाहिए कि कौन इन्हें खरीदेगा और इनके वितरण के लिए धन कौन देगा। लेकिन उन्होंने चेतावनी दी कि वैक्सीन का विकास अप्रत्याशित हो सकता है और कांगो में चुनौतीपूर्ण सुरक्षा स्थिति परीक्षणों को जटिल बना देगी।
282 मामलों की हो चुकी है पुष्टि
अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र और विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, इस प्रकोप से 282 पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिनमें 42 मौतें शामिल हैं, और लगभग 1,100 संदिग्ध मामले हैं।
कांगो में हुई मौतों के अलावा, युगांडा में नौ मामलों की पुष्टि हुई है, जिनमें एक मौत शामिल है। वैश्विक स्वास्थ्य एजेंसियों ने इस प्रकोप को सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है।
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