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'भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, ऐसा सोचने वाला हिंदू नहीं', न्यूयॉर्क में बोले मोहन भागवत

Updated: Sun, 30 Aug 2026 09:04 AM (IST)

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने न्यूयॉर्क में 'वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी' कार्यक्रम में मानवता की एकता पर जोर दिया। उन्होंने ...और पढ़ें

मोहन भागवत ने ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में मानवता की एकता पर जोर दिया (फोटो: पीटीआई)

मोहन भागवत ने ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में मानवता की एकता पर जोर दिया (फोटो: पीटीआई)

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डिजिटल डेस्क, न्यूयॉर्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार को न्यूयार्क में आयोजित ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में मानवता की एकता पर जोर दिया। भारत के सदियों पुराने 'वसुधैव कुटुंबकम' के सोच का परोक्ष रूप से जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि धर्म और पूजा-पद्धतियां अलग हो सकती हैं, लेकिन पूरी इंसानियत एक ही है।

उन्होंने 2018 में नई दिल्ली में हुए कार्यक्रम का हवाला देते हुए कहा कि वहां मौजूद कई मुस्लिमों ने मुझ से पूछा था कि आप हिंदू राष्ट्र की बात करते हैं, क्या मुस्लिमों को देश से बाहर निकाल दिया जाएगा तो मैंने उनसे कहा था-' नहीं, यह हिंदुत्व नहीं है। अगर कोई यह सोचता है कि भारत में मुसलमान नहीं होना चाहिए तो वह असल में हिंदू नहीं है।'

धर्म गुरुओं के सम्मेलन में पहुंचे भागवत

धर्म गुरुओं के सम्मेलन को संबोधित करते हुए भागवत ने कहा कि सत्य एक है, लेकिन अलग-अलग लोग अपनी समझ और दृष्टिकोण के अनुसार उसे अलग-अलग तरीके से व्यक्त करते हैं। इसकी वजह भी है क्योंकि हम एक इंसान है और हम उस सॉफ्टवेयर के कैदी हैं जो हमारे दिमाग में बना है।

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उन्होंने कहा कि वे स्वयं धार्मिक विद्वान या धार्मिक अथॉर्टी नहीं हैं, लेकिन जिस समाज में वे काम करते हैं, उसकी परंपरा यह मानती है कि धर्म अलग हो सकते हैं, जबकि मानवता एक ही है। भागवत ने कहा- 'सत्य एक है और मानवता उसी सत्य की उपज है, इसलिए इंसानियत भी एक है।'

तीन देशों की वैश्विक संपर्क यात्रा का पहला चरण

संघ प्रमुख ने दुनिया में मौजूद विभिन्न धर्मों और उनकी धार्मिक परंपराओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में धर्मों को काफी हद तक उनके रीति-रिवाजों और अनुष्ठानों के आधार पर परिभाषित किया जाता है। उन्होंने माना कि धार्मिक अनुशासन और अनुष्ठान किसी व्यक्ति के लिए आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने का एक महत्वपूर्ण माध्यम हो सकते हैं।

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मोहन भागवत इस सप्ताह की शुरुआत में न्यूयॉर्क पहुंचे थे। यह उनकी तीन देशों की वैश्विक संपर्क यात्रा का पहला चरण है। वह अमेरिका के बाद कनाडा और ब्रिटेन की भी यात्रा करेंगे। उनका यह दौरा आरएसएस के शताब्दी वर्ष के आयोजनों के तहत विदेशों में रहने वाले विभिन्न संगठनों के निमंत्रण पर हो रहा है।

'संघ में केवल सेवा करने वालों की जगह'

आरएसएस के अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर के अनुसार, न्यूयॉर्क का यह आयोजन विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोगों को एक मंच पर लाने वाला अंतरधार्मिक कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य खुले संवाद, पारस्परिक सम्मान, समझ और साझा उद्देश्य को बढ़ावा देना है।

संघ प्रमुख ने कहा कि जो लोग कुछ पाने की इच्छा से संघ में आना चाहते हैं, वह न आएं। संघ में केवल सेवा करने वालों की जगह है। उन्होंने कहा कि हरियाणा में 1996 में विमान हादसा हुआ, संघ कार्यकर्ताओं ने वहां बिना धार्मिक भेदभाव राहत अभियान चलाया। भागवत ने कहा कि अगर हम समाज को शिक्षित करना बंद कर देंगे तो उसमें भटकाव आने लगेगा।

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