'मौजूदा हालात के लिए एकमात्र ट्रंप जिम्मेदार', ईरान युद्ध के बीच पूर्व CIA चीफ का बड़ा बयान
पूर्व सीआईए प्रमुख लियोन पैनेटा ने ईरान युद्ध के मौजूदा हालात के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प् ...और पढ़ें

ईरान युद्ध के बीच पूर्व CIA चीफ का बड़ा बयान। (रॉयटर्स)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान युद्ध के बीच CIA के पूर्व चीफ लियोन पैनेटा ने मौजूदा हालात के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप को ही एकमात्र जिम्मेदार व्यक्ति बताया है।
'द गर्डियन' को दिए एक इंटरव्यू में पैनेटा ने समझाया कि कैसे दुनिया की सबसे शक्तिशाली सेना एक ऐसे मुश्किल में फंस गई है जिससे बाहर निकलने के लिए के लिए उसका अपना कमांडर-इंन-चीफ भी तैयार नहीं लगता।
पैनेटा ने उस ऑपरेशन की देखरेख की थी जिसने 2011 में ओसामा बिन लादेन मारा गया था।
तेल की कीमतों में लगातार इजाफा
होर्मुज जलसंधि, जिससे होकर दुनिया के कुल तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है, अब असल में बंद हो चुकी है। 28 फरवरी को एक इजराइली हमले में अपने सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद जिसे ट्रंप ने एक अभियान की शुरुआती चोट कहा था, ईरान ने इस जलमार्ग का इस्तेमाल अपनी सौदेबाजी की ताकत के तौर पर किया है। तेल की कीमतें तो तेजी से बढ़ी हैं, लेकिन ट्रंप की लोकप्रियता के आंकड़े नहीं बढ़े हैं।
ट्रंप प्रशासन ने नहीं की कोई तैयारी- पैनेटा
पैनेटा ने बताया कि यह कोई ऐसी बात नहीं थी जिसका अंदाजा पहले से न लगाया जा सके। उन्होंने कहा कि हर उस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद की बैठक में, जिसका मैं हिस्सा रहा हूं और जहां हमने ईरान के बारे में बात की है, यह मुद्दा हमेशा सामने आया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप प्रशासन ने जाहिर तौर पर इसके लिए कभी कोई तैयारी नहीं की, जो कि बुनियादी रणनीतिक योजना बनाने में एक बड़ी नाकामी है।
युद्ध के नतीजे उम्मीदों के बिल्कुल उलट- पैनेटा
इस युद्ध के नतीजे उन उम्मीदों के बिल्कुल उलट निकले हैं जो सोची गई थीं। खामेनेई के उत्तराधिकारी उनके बेटे मोजतबा हैं, जो उम्र में छोटे हैं, ज्यादा सख्त मिजाज हैं और जिनके बातचीत करने की संभावना बहुत कम है।
पैनेटा ने कहा, "हमारे पास अब एक युवा सर्वोच्च नेता है जो लंबे समय तक इस पद पर बना रहेगा। वह पहले वाले सर्वोच्च नेता के मुकाबले कहीं ज्यादा कट्टरपंथी है।"
युद्ध में अकेले पड़ते नजर आ रहे ट्रंप
ट्रंप अब बिल्कुल अकेले पड़ते नजर आ रहे हैं। जहां उन्होंने अपने राष्ट्रपति कार्यकाल का ज्यादातर समय NATO को एक बोझ और सहयोगी देशों को मुफ्तखोर समझने में बिताया है, वहीं अब उन्हें यह समझ आ रहा है कि गठबंधन रातों-रात या अपनी मर्जी से नहीं बनते।
ट्रंप द्वारा अन्य देशों से इस जलसंधि को फिर से खोलने में मदद मांगने के बावजूद, NATO के किसी भी बड़े सदस्य देश ने सार्वजनिक तौर पर अपने जहाज भेजने का कोई वादा नहीं किया है। ट्रंप ने तब से NATO को कागजी शेर और इसके सदस्यों को कायर कहा है, जबकि साथ ही उन्हें उनकी जरूरत भी है।
'सहयोगियों से सलाह लिए बिना युद्ध में जाना खुद को नुकसान पहुंचाना'
पनेट्टा ने 'द गार्डियन' को बताया कि सहयोगियों से सलाह लिए बिना युद्ध में जाना खुद को नुकसान पहुंचाने जैसा है, क्योंकि ट्रंप खुद उन्हीं देशों से मदद की गुहार लगाते पाए गए, जिन्हें उन्होंने नाराज कर दिया था। अमेरिकी राष्ट्रपति ने आज धमकी दी कि अगर 48 घंटों के भीतर जलडमरूमध्य पूरी तरह से फिर से नहीं खोला गया, तो वह ईरान के पावर प्लांट को पूरी तरह तबाह कर देंगे।
चौथे हफ्ते में चल रहे इस युद्ध के खत्म होने का कोई संकेत नहीं दिख रहा है और न ही इससे बाहर निकलने का कोई साफ रास्ता नजर आ रहा है।
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