क्या पूरी तरह बंद होगा H-1B वीजा? अमेरिकी लेबर डिपार्टमेंट ने कहा-एक साल बाद बिल्कुल अलग दिखेगा सिस्टम
अमेरिकी श्रम विभाग ने H-1B वीजा कार्यक्रम में बड़े बदलाव और धोखाधड़ी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के संकेत दिए हैं। ...और पढ़ें

H-1B वीजा सिस्टम में बड़े बदलाव की तैयारी

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, वाशिंगटन। अमेरिकी श्रम विभाग के महानिरीक्षक एंथनी डी'एस्पोसिटो ने H-1B वीजा कार्यक्रम में बड़े पैमाने पर बदलाव और कार्रवाई के संकेत दिए हैं। वाशिंगटन में कमेंटेटर बेनी जॉनसन के साथ एक साक्षात्कार में उन्होंने चेतावनी दी कि विदेशी लेबर सिस्टम में जारी धोखाधड़ी के खिलाफ जांचकर्ता एक बहुत बड़ा मामला तैयार कर रहे हैं।
उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि उनकी टीम के पास दोषियों को गिरफ्तार करने के लिए हथकड़ियां तैयार हैं।
ट्रंप प्रशासन का आक्रामक रवैया
डी'एस्पोसिटो ने स्पष्ट किया कि ट्रंप प्रशासन विदेशी श्रम वीजा धोखाधड़ी की जांच को बेहद आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा रहा है। उनके अनुसार, यह महज कागजी कार्रवाई, हिसाब-किताब या नियमों के पालन से जुड़ा कोई सामान्य मामला नहीं है, बल्कि एक वास्तविक और गंभीर आपराधिक जांच है।
उन्होंने कहा कि व्हाइट हाउस और इस प्रशासन की नीतियां और ध्यान एक साफ कहानी बयां कर रहे हैं। जिस तरह से अमेरिका की जनता के सामने इस मामले को रखा जा रहा है, उससे लगता है कि आज से 365 दिनों बाद विदेशी लेबर वीजा प्रोग्राम की पूरी तस्वीर और स्वरूप बेहद अलग दिखाई देगा।
हालांकि कुछ मीडिया आउटलेट्स ने इसका मतलब H-1B प्रोग्राम के पूरी तरह बंद होने से निकाला, लेकिन उनके शब्दों का मूल अर्थ यह था कि एक साल के भीतर यह पूरी प्रणाली काफी बदल जाएगी।
'प्रोजेक्ट फायरवॉल' का बढ़ता दायरा
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी प्रशासन केवल H-1B तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विदेशी लेबर से जुड़ी फर्जी कंपनियों, कर्मचारियों के शोषण, नकली नौकरियों, वीजा मिलों और संभावित मानव तस्करी की व्यापक देशव्यापी जांच कर रहा है।
श्रम विभाग के ऑफिस ऑफ इंस्पेक्टर जनरल ने जानकारी दी है कि उसने 18 सितंबर तक दर्जनों समन जारी किए हैं और कई संदिग्ध ठिकानों पर सर्च वारंट निष्पादित किए हैं। इसके अलावा, 22 सितंबर को दिए एक बयान में डी एस्पोसिटो ने बताया कि उनका विभाग उन शैक्षणिक संस्थानों और कॉलेजों पर भी सख्त नजर रख रहा है जो J-1 वीजा का दुरुपयोग कर रहे हैं।
स्पॉन्सर्स, वित्तीय अनुदान (ग्रांट्स) और इसमें शामिल लोगों की गहन जांच की जा रही है तथा नियम तोड़ने वालों को गिरफ्तारी की सीधी चेतावनी दी गई है।
नीतिगत सख्ती और कड़े प्रतिबंध
यह कार्रवाई प्रशासन द्वारा अमेरिकी नौकरियों की सुरक्षा के लिए उठाए जा रहे नीतिगत कदमों के अनुरूप है। एक राष्ट्रपति कार्यकारी आदेश के तहत अब सभी फेडरल एजेंसियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया है कि वे जांच करें कि क्या विदेशी कर्मियों के लिए आवेदन करने वाले नियोक्ताओं ने हाल ही में उसी भूमिका वाले अमेरिकी कर्मचारियों को नौकरी से निकाला है।
इसके साथ ही, नए ऑफशोर आवेदनों के लिए 100,000 डॉलर की भारी-भरकम फीस तय की गई है और कुछ विदेशी H-1B धारकों के प्रवेश पर सितंबर 2027 तक पाबंदियां बढ़ा दी गई हैं।
रजिस्ट्रेशन में 92 प्रतिशत की गिरावट
व्हाइट हाउस के आंकड़ों के मुताबिक, पिछली पाबंदियों के बाद अमेरिका की शीर्ष IT आउटसोर्सिंग कंपनियों के H-1B रजिस्ट्रेशन में 92 प्रतिशत की भारी गिरावट देखी गई थी। इससे पहले, श्रम विभाग ने सितंबर 2025 में प्रोजेक्ट फायरवॉल लॉन्च किया था, जिसका उद्देश्य भर्ती में योग्य अमेरिकी नागरिकों को प्राथमिकता देना और H-1B प्रक्रिया का दुरुपयोग करने वाले नियोक्ताओं को जवाबदेह बनाना है।
