अमेरिकी सेना पर 1.5 ट्रिलियन डॉलर खर्च की तैयारी, एआई-रोबोटिक्स पर क्यों जोर दे रहे हैं ट्रंप?
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अगले वित्तीय वर्ष में रक्षा बजट को बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने की घोषणा की है। ...और पढ़ें

अमेरिकी रक्षा बजट को बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर करने की घोषणा (फाइल फोटो)

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जागरण न्यूज नेटवर्क, वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अगले वित्तीय वर्ष में अमेरिकी रक्षा बजट को बढ़ाकर 1.5 ट्रिलियन डॉलर (करीब 1.5 खरब डालर) करने की घोषणा की है। पेंसिलवेनिया में आयोजित डिफेंस एंड इनोवेशन समिट को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि यह निवेश केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नहीं, बल्कि अमेरिका में बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करने के लिए भी किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि उनके प्रशासन ने पहले ही रक्षा क्षेत्र में रिकॉर्ड निवेश किया है और अब सेना को भविष्य की चुनौतियों के अनुरूप तैयार करने का समय है। रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि उनका लक्ष्य अमेरिकी सैन्य उपकरणों का अधिकतम निर्माण देश के भीतर कराना है, जिससे रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को नई गति मिलेगी।
उन्होंने दावा किया कि पहले कार्यकाल में अपनाई गई 'मेक इन अमेरिका' नीति को दूसरे कार्यकाल में और तेज किया जाएगा। उन्होंने हालिया सैन्य अभियानों का जिक्र करते हुए कहा कि अमेरिका अपनी सैन्य क्षमता और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए निर्णायक कार्रवाई करने में सक्षम है।
ट्रंप ने स्पष्ट किया कि आने वाले समय का युद्ध आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), रोबोटिक्स, स्वायत्त प्रणालियों, क्वांटम तकनीक, हाइपरसोनिक हथियारों और अंतरिक्ष आधारित रक्षा क्षमताओं पर आधारित होगा।
उन्होंने कहा कि सरकार रक्षा क्षेत्र में तकनीकी कंपनियों, स्टार्टअप और निवेशकों के साथ मिलकर अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों के विकास और त्वरित तैनाती पर काम कर रही है। उनका कहना था कि प्रतिभा और नवाचार ही अमेरिका की सैन्य बढ़त बनाए रखेंगे।
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एएनआई के अनुसार, रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि पेंटागन पारंपरिक और धीमी खरीद प्रक्रिया को छोड़कर तेज, प्रतिस्पर्धी और नवाचार आधारित मॉडल अपना रहा है। उन्होंने कहा कि रक्षा क्षेत्र की नौकरशाही में सुधार कर निजी क्षेत्र और नई तकनीकी कंपनियों के लिए अवसर बढ़ाए जा रहे हैं।
उनके अनुसार, एआई, स्वायत्त हथियार प्रणाली, क्वांटम कंप्यूटिंग, अंतरिक्ष तकनीक और हाइपरसोनिक हथियारों की दौड़ में जो देश अभी बढ़त बना लेगा, वही भविष्य की सैन्य शक्ति तय करेगा।
आईएएनएस के अनुसार, ट्रंप ने अमेरिकी शिपबिल्डिंग उद्योग को पुनर्जीवित करने की योजना का भी एलान किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन विदेशी सहयोगियों के साथ मिलकर जहाज निर्माण क्षमता बढ़ाएगा और दशकों से कमजोर पड़ चुके अमेरिकी नौसैनिक औद्योगिक आधार को मजबूत करेगा।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को अपनी नौसेना के लिए अधिक युद्धपोतों की आवश्यकता है और देश के शिपयार्डों को फिर से वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाया जाएगा।हाल के महीनों में ईरान के साथ बढ़े तनाव और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन की बढ़ती सैन्य सक्रियता के बीच ट्रंप प्रशासन रक्षा आधुनिकीकरण, घरेलू हथियार उत्पादन और अत्याधुनिक सैन्य तकनीकों में निवेश को अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति का प्रमुख आधार बना रहा है।
(न्यूज एजेंसी रॉयटर्स, एएनआई, आईएएनएस के इनपुट के साथ)