ट्रंप ने शांति वार्ता के लिए वेंस को ही क्यों चुना, क्या बातचीत के लिए आगे आएगा ईरान?
अस्थायी युद्ध विराम खत्म हो रहा है और जेडी वेंस दूसरे दौर की वार्ता के लिए तैयार हैं, लेकिन ईरान की ओर से अभी तक वार्ता में शामिल होने की पुष्टि नहीं ...और पढ़ें
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच अस्थायी युद्ध विराम बुधवार को खत्म हो रहा है। इस्लामाबाद में पहली शांति वार्ता विफल होने के बाद अब दूसरी वार्ता होगी या नहीं इस पर भी संशय बना हुआ है। युद्ध विराम आगे बढ़ेगा या ट्रंप एक बार फिर ईरान के विरुद्ध हमलावर रुख अपनाएंगे।
इन सभी आशंकाओं के बीच जानकारी सामने आ रही है कि अमेरिका के उप राष्ट्रपति जेडी वेंस दूसरे दौर की वार्ता के लिए तैयार हैं और इस बार बातचीत दौरान उनके और ईरानी प्रतिनिधि मंडल के बीच में कोई मध्यस्थ नहीं होगा। यह वार्ता पाकिस्तान में होनी तय की गई है, लेकिन ईरान की ओर से अभी तक वार्ता में शामिल होने की पुष्टि नहीं की गई है।
इस आशंका के बीच एक बात निश्चित प्रतीत होती है कि अस्थायी सीजफायर के बाद युद्ध जरूर शुरू हो जाएगा। दुनिया भर के लिए हालात बेहद गंभीर हैं। युद्ध विराम को लेकर आशा की किरण जगी हुई थी। हालांकि, तब से दोनों पक्षों द्वारा युद्ध विराम का उल्लंघन हुआ है, जिससे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव आया है और मंहगाई के संकट का डर पैदा हो गया है, जो गरीब देशों को तबाह कर सकता है।
ट्रंप ने वेंस को ही क्यों चुना?
ईरान के साथ पहले दौर की विफल शांति वार्ता के लिए वेंस ही अमेरिका की ओर से प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। उनकी छवि उदारवादी युद्धविरोधी नेता के रूप में उनके समर्थक दुनिया के सामने पेश करते हैं। शायद यही वजह है कि ट्रंप ने उन्हें शांति वार्ता के लिए चुना है।
'शांतिदूत' के रूप में वेंस
जेडी वेंस के लिए शांति वार्ता की सफलता न केवल अमेरिका के लिए बल्कि खुद उनके लिए भी बहुत जरूरी है। 2028 के चुनाव से पहले अगर उनकी छवि 'शांति दूत' के तौर पर उभरकर आती है, तो आगामी राष्ट्रपति चुनाव में भी उन्हें इसका फायदा मिलेगा।
अल जजीरा की एक रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में किए गए एक सरल्वे में वेंस को 1600 से अधिक मौजूद लोगों द्वारा किए गए मतदान में 53 प्रतिशत से अधिक वोट मिले। वहीं विदेश मंत्री मार्को रूबियो 35 प्रतिशत वोटों के साथ दूसरे नंबर पर रहे।
वहीं इप्सोस के सर्वे में सामने आया है कि केवल 7 प्रतिशत अमेरिकी ही जमीनी आक्रमण का समर्थन कर रहे हैं और 66 प्रतिशत लोग चाहते हैं कि लड़ाई जल्द से जल्द समाप्त हो, भले ही अमेरिका अपने लक्ष्यों को प्राप्त न कर पाए। ऐसे में युद्ध की समाप्ति के लिए बातचीत करने वाले व्यक्ति के तौर पर वेंस की साख और भी बढ़ जाएगी।
क्या शांति वार्ता के लिए मानेगा ईरान?
पहले दौर की विफल शांति वार्ता के बाद दूसरे दौर की बातचीत के लिए ईरान की तरफ से प्रतिनिधमंडल आएगा या नहीं, इस पर अभी भी संशय बरकरार है। बुधवार को युद्ध विराम समाप्त हो रहा है। और होर्मुज अभी भी दुनिया के लिए एक संवेदनशील मुद्दा बना हुआ है।
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