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    क्या ईरान ने अमेरिका-ब्रिटेन के बेस डिएगो गार्सिया पर किया हमला? तेहरान से दूरी 4000km, दावे के बाद मचा हड़कंप

    Updated: Sun, 22 Mar 2026 11:10 PM (IST)

    अमेरिका और इजरायल के साथ तनाव के बीच हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य ठिकाने पर कथित मिसाइल हमले की खबर ने चिंता बढ़ा दी है। ...और पढ़ें

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    डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमला ईरान ने किया इनकार (फाइल फोटो)

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    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। अमेरिका और इजरायल के साथ जारी तनाव के बीच हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया सैन्य ठिकाने पर कथित मिसाइल हमले की खबर ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है। हालांकि ईरान ने साफ तौर पर इन आरोपों से इनकार किया है, वहीं ब्रिटेन ने इसे लापरवाह धमकी बताया है।

    बताया जा रहा है कि यह हमला उस समय हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। उनका कहना है कि इसका उद्देश्य ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम सिर्फ नागरिक उपयोग के लिए है।

    संयुक्त राष्ट्र की परमाणु एजेंसी और अमेरिका की खुफिया प्रमुख तुलसी गबार्ड ने भी कहा है कि ईरान परमाणु बम बनाने के करीब नहीं था। इसके बावजूद युद्ध शुरू हुआ, जिससे हालात और बिगड़ गए।

    क्या डिएगो गार्सिया पर हमला हुआ?

    अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गुरुवार रात से शुक्रवार सुबह के बीच डिएगो गार्सिया स्थित अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य बेस को दो बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश हुई।

    द वॉल स्ट्रीट जर्नल और CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, एक मिसाइल बीच रास्ते में ही फेल हो गई, जबकि दूसरी को अमेरिकी युद्धपोत से दागे गए इंटरसेप्टर ने हवा में ही नष्ट कर दिया। हालांकि इस मामले में अमेरिका ने अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है। ईरान के एक वरिष्ठ अधिकारी ने भी साफ कहा है कि इस हमले में उनका कोई हाथ नहीं है।

    क्या बदल सकता है युद्ध का समीकरण?

    विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह हमला सच है, तो यह युद्ध के समीकरण को बदल सकता है। दोहा इंस्टीट्यूट के प्रोफेसर मुहनद सेलूम के अनुसार, इससे संकेत मिलता है कि ईरान के पास 4,000 किमी से ज्यादा दूरी तक मार करने वाली मिसाइलें हो सकती हैं।

    उन्होंने कहा कि अगर इन मिसाइलों की दिशा बदली जाए तो ये लंदन तक भी पहुंच सकती हैं, जिससे यूरोप की चिंता बढ़ सकती है। इससे अमेरिका और यूरोपीय देशों की रणनीति पर भी असर पड़ सकता है। वहीं अब्बास अराघची ने पहले ही कहा था कि ईरान ने जानबूझकर अपनी मिसाइल रेंज 2000 किमी तक सीमित रखी है, ताकि वह किसी के लिए खतरा न बने।

    ब्रिटेन और इजरायल की प्रतिक्रिया

    ब्रिटेन की विदेश मंत्री यवेट कूपर ने इस कथित हमले की निंदा करते हुए इसे लापरवाह बताया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन सीधे हमले में शामिल नहीं है, लेकिन अपने लोगों और सैनिकों की रक्षा करेगा। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने भी कहा कि साइप्रस स्थित बेस का इस्तेमाल ईरान के खिलाफ नहीं किया जाएगा।

    वहीं इजरायल के सेना प्रमुख एयाल जमीर ने दावा किया कि ईरान ने 4000 किमी रेंज वाली मिसाइल का इस्तेमाल किया। उन्होंने कहा कि ये मिसाइलें यूरोप के कई शहरों तक पहुंच सकती हैं।

    क्यों अहम है डिएगो गार्सिया बेस?

    • डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में स्थित एक अहम सैन्य ठिकाना है, जहां करीब 2500 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं। यह बेस अमेरिका के कई बड़े सैन्य अभियानों में इस्तेमाल हो चुका है।
    • यह इलाका चागोस द्वीप समूह का हिस्सा है और लंबे समय से ब्रिटेन के नियंत्रण में है। हाल ही में इसे मॉरीशस को सौंपने को लेकर भी विवाद चल रहा है।

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