होर्मुज, यूरेनियम और नाकाबंदी..., 86 दिन बाद भी क्यों अटकी हुई है अमेरिका-ईरान के बीच डील?
मिडिल ईस्ट में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच तीन महीने से जारी युद्ध का कोई हल नहीं निकल पा रहा है। होर्मुज पर नाकाबंदी से इस युद्ध का असर पूरी दुनिय ...और पढ़ें

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच क्यों अटकी हुई है डील? (जागरण)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में युद्ध को छिड़े हुए करीब तीन महीने का वक्त हो गया है, लेकिन अमेरिका-इजरायल और ईरान ने मिलकर इस युद्ध को लेकर अभी तक कोई हल नहीं निकाला है। इस युद्ध का परिणाम मिडिल ईस्ट के साथ ही पूरी दुनिया को भुगतना पड़ रहा है।
अमेरिका-इजरायल के ईरान पर 28 फरवरी को हमला करने के साथ ही यह युद्ध शुरू हो गया था। यूरेनियम को लेकर छिड़ा यह युद्ध स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर आकर रुक गया है। अमेरिका और ईरान, दोनों देशों ने होर्मुज पर नाकाबंदी की हुई है, जिसे पूरी दुनिया में कच्चे तेल और गैस की स्पलाई चेन बाधित हो गई है।
दुनिया में इस युद्ध की वजह से मचे हाहाकार के बावजूद अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच अंतिम समझौता होने की संभावना दूर ही नजर आ रही है। दोनों पक्षों की ओर से जोरदार कूटनीतिक गतिविधियों और प्रगति के बार-बार किए जा रहे दावों के बावजूद अभी भी कोई ठोस नतीजा निकलता नहीं दिख रहा है।
पश्चिम एशिया की मौजूदा जंग रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने, ईरानी तेल निर्यात पर लगी बाधाएं हटाने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर नई बातचीत शुरू करने की दिशा में बातचीत आगे बढ़ रही है, लेकिन यूरेनियम संवर्धन, प्रतिबंधों में राहत, हिजबुल्लाह, लेबनान और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन जैसे मुद्दे अब भी सबसे बड़ी रुकावट बने हुए हैं।
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आखिर क्यों नहीं हो पा रही अमेरिका-ईरान के बीच डील?
अमेरिका-ईरान के बीच समझौता न होने की सबसे बड़ी वजह ईरान के पास मौजूद अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के पास करीब 2000 किलोग्राम संवर्धित यूरेनियम है, जिसमें लगभग 450 किलोग्राम ऐसा है जिसे 'नियर वेपन ग्रेड' माना जाता है।
अमेरिका चाहता है कि ईरान इस स्टॉक को खत्म करे या किसी तीसरे देश को सौंप दे। अमेरिकी अधिकारियों का साफ कहना है, 'अगर ईरान अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम नहीं छोड़ेगा तो उसे वैश्विक प्रतिबंधों में राहत नहीं मिलेगी।'
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो का भी मानना है कि 'परमाणु समझौता 72 घंटे में किसी कागज पर लिखकर पूरा नहीं हो सकता।'
ईरान भी यूरेनियम संवर्धन के अपने अधिकार से पीछे नहीं हटना चाहता। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने कहा, 'हम दुनिया को भरोसा दिलाने के लिए तैयार हैं कि हम परमाणु हथियार नहीं चाहते, लेकिन अपने सम्मान और अधिकारों पर समझौता नहीं करेंगे।'
युद्ध के केंद्र में- Hormuz
होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस की सप्लाई होती है। युद्ध शुरू होने के बाद से ईरान ने इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पर कड़ा नियंत्रण कर लिया है।
ईरानी नौसेना के होर्मुज पर नाकाबंदी के बाद अमेरिका ने भी ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी बढ़ाई, जिससे वैश्विक तेल कीमतों में भारी उछाल आ गया। इस जलमार्ग से किसी भी देश के जहाज का निकलना मुश्किल हो गया है।
अमेरिका-ईरान के बीच होर्मुज को लेकर डील चल रही है, जिसके तहत कई बातें रखी गई हैं। इसके साथ ही ईरान होर्मुज पर अपना अधिकार छोड़ने को तैयार नहीं है।
- ईरान धीरे-धीरे होर्मुज को पूरी तरह खोले
- अमेरिका ईरानी बंदरगाहों से नाकाबंदी हटाए
- ईरानी तेल निर्यात को भी आंशिक राहत दी जाए
ट्रंप की कभी चेतावनी तो कभी समझौता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने पहले दावा किया था कि समझौता करीब-करीब तैयार हो गया है। ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा, 'डील के अंतिम पहलुओं पर चर्चा चल रही है और जल्द घोषणा होगी।'
ट्रंप ने समझौते की बात कहने के अगले ही दिन ईरान को लेकर अलग बात कही। ट्रंप ने बताया, 'मैंने अपने प्रतिनिधियों से कहा है कि जल्दबाजी न करें। समय हमारे पक्ष में है। औपचारिक समझौते तक अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी।'
डोनल्ड ट्रंप के इन बयानों के बदलने से यह माना जा रहा है कि अमेरिका को यह पता है कि ईरान अभी यूरेनियम और होर्मुज पर अमेरिकी शर्तें मानने के लिए तैयार नहीं है।
युद्ध खत्म करने के लिए ईरान की शर्तें
ईरान ने इन तीन महीनों के दौरान कई बार कहा है कि वो अमेरिका के सामने नहीं झुकेगा और अपनी शर्तों पर ही युद्ध को खत्म करेगा। ईरान युद्ध के पहले दिन से ही अमेरिका और इजरायल के सामने सरेंडर करने के लिए तैयार नहीं है।
ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा, 'कई मुद्दों पर सहमति बनी है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि समझौता तुरंत होने वाला है। फिलहाल बातचीत युद्ध रोकने पर केंद्रित है, परमाणु कार्यक्रम खत्म करने पर नहीं।' ईरान ने अमेरिका के सामने इस युद्ध को रोकने के लिए कुछ शर्तें रखी हैं।
- युद्ध खत्म करना
- आर्थिक दबाव कम करना
- तेल निर्यात बहाल करना
- क्षेत्रीय प्रभाव बनाए रखना
अमेरिका की क्या है शर्तें?
अमेरिका ने ईरान पर हमला करने के पहले वेनेजुएला पर भी हमला किया था और अमेरिकी सेना वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को उठाकर अपने साथ ले गई थी।
ट्रंप ने इजरायल के साथ मिलकर ईरान पर हमला किया, जिसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई। लेकिन ईरान ने अमेरिका के इस हमले का जवाब समस्त खाड़ी देशों को दिया और इस युद्ध में घसीट लिया।
अमेरिका को इस युद्ध के लंबा चलने की उम्मीद नहीं थी, क्योंकि इस जंग में US को भी काफी नुकसान हुआ है। अमेरिका ने ईरान के सामने इस युद्ध को खत्म करने की कई शर्तें रखी हैं।
- होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति सामान्य हो सके।
- ईरान को परमाणु हथियार से दूर रखना। इसका उद्देश्य ईरान से संवर्धित यूरेनियम छोड़ने के लिए मजबूर करना है।
- भविष्य में परमाणु कार्यक्रम पर कड़े निरीक्षण की व्यवस्था हो, इसके लिए समय-समय परमाणु को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत होती रहे।
- क्षेत्रीय युद्ध को पूरी तरह रोका जाए, जिससे इजरायल, हिजबुल्लाह और खाड़ी देशों के बीच बड़े युद्ध टाले जा सकें।
इस युद्ध में इजरायल क्या चाहता है?
वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, इजरायल इस बात से नाराज है कि अमेरिका ने बातचीत के अंतिम चरण में जानकर उसे जानकारी दी है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्धविराम का समर्थन तो किया, लेकिन साथ ही चेतावनी भी दी।
नेतन्याहू ने कहा, 'हम किसी भी समय फिर से युद्ध शुरू करने के लिए तैयार हैं। हमारी उंगली अब भी ट्रिगर पर है।' इजरायल खास तौर पर इस बात के खिलाफ है कि लेबनान और हिजबुल्लाह को इस समझौते में शामिल किया जाए।
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