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    पश्चिम एशिया में तनाव कम: ईरान ने सभी देशों के लिए खोला होर्मुज, दुनिया ने ली राहत की सांस

    Updated: Sat, 18 Apr 2026 02:02 AM (IST)

    पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव अब कम होता नजर आ रहा है। इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के युद्धविराम के लागू होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलड ...और पढ़ें

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    ईरान ने सभी देशों के लिए खोला होर्मुज (फोटो- रॉयटर)

    जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी तनाव अब कम होता नजर आ रहा है। इजरायल और लेबनान के बीच 10 दिनों के युद्धविराम के लागू होने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को सभी देशों के वाणिज्यिक जहाजों के लिए खोल दिया है।

    ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने एक्स पर इसकी पुष्टि की। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस कदम का स्वागत किया, हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि तेहरान के साथ पूर्ण समझौता होने तक ईरान के तेल से जुड़े जहाजों पर अमेरिकी नाकेबंदी जारी रहेगी।

    ईरान ने चेतावनी दी है कि वह होर्मुज को फिर से बंद कर सकता है

    इस पर ईरान ने चेतावनी दी है कि वह होर्मुज को फिर से बंद कर सकता है। ट्रंप ने इजरायल के प्रति सख्त रुख अपनाते हुए लेबनान पर बमबारी पर प्रतिबंध लगाने की भी घोषणा की और कहा कि अमेरिका हिजबुल्ला से “उचित तरीके से'' निपटेगा।

    गौरतलब है कि ईरान समेत कई देशों ने अमेरिका-ईरान टकराव के लिए इजरायल को जिम्मेदार ठहराया था। अब तक दोनों पक्ष एक-दूसरे की प्रमुख मांगों में से एक-एक को मान चुके हैं और शांति समझौते में अब मुख्य बाधा परमाणु मुद्दा ही बचा है।

    इसी के मद्देनजर पाकिस्तान में संभावित वार्ता के लिए तैयारियां तेज हो गई हैं। पहले दौर की विफलता के बाद दोनों पक्ष इस बार अधिक गंभीरता से बातचीत की तैयारी कर रहे हैं।

    होर्मुज के खुलने की खबर का वैश्विक बाजारों पर भी असर पड़ा है। कच्चे तेल की कीमतों में करीब 13 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 86 डालर प्रति बैरल तक आ गया।

    दरअसल, ईरान ने अमेरिका-इजरायल हमलों के विरोध में पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिकी सहयोगी देशों के लिए बंद कर दिया था। शांति समझौते के लिए ईरान के 10 सूत्रीय प्रस्ताव में लेबनान में युद्धविराम भी एक प्रमुख शर्त थी।

    इसके बाद ट्रंप ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और लेबनान के राष्ट्रपति जोसेफ औन से बातचीत कर तत्काल प्रभाव से युद्धविराम लागू कराने की घोषणा की थी।

    रॉयटर के अनुसार, अराघची ने अपने बयान में कहा कि युद्धविराम जारी रहने तक होर्मुज सभी के लिए खुला रहेगा, लेकिन जहाजों को ईरान के बंदरगाह एवं समुद्री संगठन द्वारा निर्धारित सुरक्षित मार्गों का पालन करना होगा।

    ट्रंप ने इस घोषणा को साझा करते हुए कहा कि ईरान ने भविष्य में होर्मुज को हथियार के रूप में इस्तेमाल न करने पर सहमति जताई है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका ईरान से संवर्धित यूरेनियम हासिल करेगा और इसके लिए किसी प्रकार का आर्थिक लेन-देन नहीं होगा।

    ट्रंप ने यह भी दावा किया कि अमेरिका और ईरान मिलकर होर्मुज से बारूदी सुरंगें हटाने का काम करेंगे, जबकि नाटो देशों की सहायता के प्रस्ताव को फिलहाल ठुकरा दिया गया है।

    लेबनान युद्धविराम का स्वागत, सतर्कता बरकरार

     

    लेबनान में युद्धविराम का विभिन्न देशों और पक्षों ने स्वागत किया है। हिजबुल्ला ने अपने लड़ाकों की सराहना करते हुए कहा कि युद्धविराम के बावजूद उनकी “अंगुलियां ट्रिगर पर'' रहेंगी। संगठन के अनुसार, उसने संघर्ष के दौरान ड्रोन और मिसाइलों सहित 2184 हमले किए।

    पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और फ्रांस के राष्ट्रपति इमैन्युएल मैक्रों ने भी युद्धविराम का समर्थन किया है। मैक्रों ने हिजबुल्ला से हथियार छोड़ने और इजरायल से लेबनान की संप्रभुता का सम्मान करने की अपील की।

    हालांकि, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संकेत दिया है कि दक्षिणी लेबनान में 10 किलोमीटर का सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखा जाएगा। ईरान के विदेश मंत्रालय ने लेबनान के “प्रतिरोध'' की सराहना करते हुए इसे क्षेत्रीय कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण बताया है।

    होर्मुज खुलने से भारत को बड़ी राहत

    जागरण ब्यूरो के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य का खुलना भारत के लिए बड़ी राहत लेकर आया है। दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक होने के नाते भारत अपनी 80-85 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति इसी मार्ग से करता है। करीब 49 दिनों तक चले संकट के कारण देश में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया था।

    पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता प्रभावित

    पेट्रोल, डीजल, एलपीजी और एलएनजी की उपलब्धता प्रभावित हुई, हालांकि सरकार ने खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं होने दी। इसके बावजूद सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर 24 रुपये प्रति लीटर और डीजल पर 103 रुपये प्रति लीटर तक का नुकसान उठाना पड़ा। इस दौरान शेयर बाजार में गिरावट और रुपये में कमजोरी भी दर्ज की गई, जिससे आयात बिल बढ़ा और विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव पड़ा।

    भारत की प्राथमिकता होर्मुज में फंसे अपने जहाजों को निकालना

    भारतीय रिजर्व बैंक को 2026-27 के लिए विकास दर का अनुमान घटाना पड़ा। एलपीजी संकट के चलते कुछ शहरों से मजदूरों के पलायन की खबरें भी सामने आईं। वर्तमान में भारत की प्राथमिकता होर्मुज में फंसे अपने जहाजों को निकालना है। शुरुआत में 24 जहाज फंसे थे, जिनमें से नौ को निकाला जा चुका है, जबकि 15 अभी भी वहां मौजूद हैं।

    अमेरिकी नाकेबंदी के कारण पिछले चार दिनों से कोई जहाज बाहर नहीं निकल पाया है। इसके अलावा सैकड़ों भारतीय नाविक भी जहाजों पर फंसे हैं, जिन्हें अब सुरक्षित निकाले जाने की उम्मीद बढ़ गई है।