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    'हमारी तलवार, तुम्हारा गला', ईरान में तख्तापलट का डर, कट्टरपंथियों ने अपने ही नेताओं को क्यों दी धमकी?

    Updated: Sat, 18 Jul 2026 09:57 PM (IST)

    ईरान में अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद भीषण सत्ता संघर्ष छिड़ गया है, जहां कट्टरपंथी राष्ट्रपति पेजेशकियन पर अमेरिका से समझौता करने का आरोप लगा ...और पढ़ें

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    HighLights

    1. खामेनेई के जनाजे में राष्ट्रपति पेजेशकियन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन।

    2. नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति से तख्तापलट का डर।

    3. कट्टरपंथियों ने अमेरिका से युद्धविराम तोड़ने और बदला लेने की मांग की।

    डिजिटल डेस्क, तेहरान। ईरान अपने दीर्घकालिक सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के निधन के बाद के हालातों से निपटने के लिए संघर्ष कर रहा है। सीएनएन के अनुसार, दिवंगत नेता को दी जाने वाली अंतिम विदाई, जो कि एक गंभीर और शोकपूर्ण अवसर होना चाहिए था, उसकी जगह एक भीषण सत्ता संघर्ष में बदल गई।

    देश के कट्टरपंथियों ने खुलेआम राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन का विरोध करना शुरू कर दिया है और वरिष्ठ अधिकारियों पर संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ शांति समझौता करने के आरोप लगाए जा रहे हैं।

    खामेनेई के जनाजे के दौरान दिखाई दिया यह गुस्सा अब ईरान के पूरे राजनीतिक तंत्र में फैल चुका है, जहां विश्वासघात, तख्तापलट की साजिश और आत्मसमर्पण जैसे गंभीर आरोप तेजी से गहराते जा रहे हैं।

    Ali Khamenei (1)

    जनाजा बना ईरान के अपने ही नेताओं के खिलाफ विरोध प्रदर्शन

    तेहरान की सड़कों पर जब राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब वहां मौजूद भीड़ सिर्फ शोक नहीं मना रही थी। कुछ लोगों ने अपना गुस्सा सीधे राष्ट्रपति पर निकाला और समझौतावादी की मौत के नारे लगाए।

    यही नहीं, विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने ट्रंप प्रशासन के साथ सीजफायर वार्ता में मदद की थी और ईरान के लिए कुछ प्रतिबंधों में ढील सुनिश्चित कराई थी, उन्हें जनाजे से बीच में ही निकलना पड़ा। भीड़ ने उन पर पत्थर फेंके और उन्हें गद्दार और बिकाऊ कहा।

    इन नाटकीय दृश्यों ने ईरान के कट्टरपंथी गुटों के भीतर बढ़ते असंतोष को उजागर कर दिया है। इन गुटों का मानना है कि देश के वर्तमान नेतृत्व ने खामेनेई की मौत का बदला लेने के बजाय वाशिंगटन के साथ समझौता करके उनकी क्रांतिकारी विरासत को धोखा दिया है।

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    कहां हैं ईरान के नए सर्वोच्च नेता?

    इस राजनीतिक उथल-पुथल को हवा देने वाली एक बड़ी वजह नए सर्वोच्च नेता मुजतबा खामेनेई की लगातार बनी हुई अनुपस्थिति है। उन्होंने अपने पिता की जगह तो ले ली है, लेकिन वे बड़े पैमाने पर जनता की नजरों से दूर बने हुए हैं।

    उनकी इस चुप्पी ने कट्टरपंथियों के बीच कई तरह की अटकलों को जन्म दे दिया है। कुछ लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या वे शासन करने में असमर्थ हैं या फिर उनके आसपास के अधिकारी उनकी अनुपस्थिति का फायदा उठाकर चुपचाप नियंत्रण अपने हाथों में ले रहे हैं।

    कट्टरपंथियों का दावा है कि राष्ट्रपति पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर गालिबफ और विदेश मंत्री अराक्छी नए सर्वोच्च नेता के निर्देशों का पालन किए बिना खुद ही सारे महत्वपूर्ण फैसले ले रहे हैं।

    अमेरिका के ईरान विशेषज्ञ अराश अजीजी ने सीएनएन को बताया कि मुजतबा खामेनेई की अनुपस्थिति ने अन्य अधिकारियों को देश के सबसे प्रमुख नेताओं के रूप में उभरने का मौका दे दिया है।

    उन्होंने कहा कि मुजतबा की लगातार अनुपस्थिति का मतलब है कि अधिकारियों की उन तक पहुंच नहीं है और गालिबफ व उनके सहयोगी प्रभावी रूप से देश चला रहे हैं, इसलिए धुर-कट्टरपंथियों ने गालिबफ और पेजेशकियन पर मुजतबा के खिलाफ तख्तापलट की साजिश रचने का आरोप लगाया है।

    Abbas Araghchi

    कट्टरपंथियों ने लगाया तख्तापलट का आरोप

    ये आरोप अब पूरी तरह सार्वजनिक हो चुके हैं। खामेनेई के जनाजे से कुछ दिन पहले, मुखर कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट किया था कि ईरान के लोगों के लिए चेतावनी, क्या देश में तख्तापलट होने वाला है?

    जनाजे के बाद उन्होंने अपने इस बयान को और दोहराया कि तख्तापलट के खिलाफ हम पूरी मजबूती से खड़े हैं और अपने शहीद इमाम खामेनेई को विदाई देते हुए हम उनके खून का बदला लेने का संकल्प लेते हैं।

    कट्टरपंथियों का तर्क है कि ईरान के मौजूदा नेता संसद को दरकिनार कर रहे हैं, अमेरिका के साथ बातचीत के दौरान सर्वोच्च नेता के निर्देशों की अनदेखी कर रहे हैं और देश के क्रांतिकारी संस्थानों को कमजोर कर रहे हैं।

    एक अन्य कट्टरपंथी सांसद कामरान गजनफारी ने नेतृत्व पर सत्ता के पारंपरिक केंद्रों को बदलने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि वे सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका को कम करते हुए सुप्रीम काउंसिल फॉर राष्ट्रीय सुरक्षा की भूमिका को बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं। यह वही राजनीतिक तख्तापलट है जिसे उन्होंने डिजाइन किया है और कदम-दर-कदम अंजाम दे रहे हैं।

    राष्ट्रपति को दी गई सीधे गले काटने की धमकी

    यह बयानबाजी अब सिर्फ राजनीतिक आलोचना तक सीमित नहीं रही है। युद्ध दोबारा शुरू होने से पहले, सुरक्षा तंत्र से जुड़े एक धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक सार्वजनिक समारोह के दौरान राष्ट्रपति पेजेशकियन को सीधे तौर पर चेतावनी दी थी।

    उन्होंने कहा था कि मिस्टर प्रेसिडेंट, अगर नेता की शर्तें पूरी नहीं हुईं, तो हमारे हाथ में ब्लेड होगा और सामने आपका गला। उन्होंने आगे जोड़ा कि हम आपके लिए नरक बना देंगे। हालांकि इन टिप्पणियों की व्यापक निंदा हुई, लेकिन बख्शी के खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

    US and Iran war

    धराशायी हुआ अमेरिका के साथ युद्धविराम

    जब से अमेरिका के साथ ईरान का युद्धविराम टूटा है, तब से ये आंतरिक मतभेद और गहरे हो गए हैं। यह समझौता तब कमजोर होना शुरू हुआ जब ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज में जहाजों पर हमले शुरू कर दिए, जिसके जवाब में अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई की। इसके बाद कट्टरपंथियों ने इस समझौते को पूरी तरह से खारिज करने की मांग तेज कर दी।

    खामेनेई के कई सबसे वफादार समर्थकों के लिए वाशिंगटन के साथ कोई भी समझौता कभी स्वीकार्य नहीं था। वे इसके बजाय अमेरिका और इजराइल दोनों के खिलाफ सीधे सैन्य हमले की वकालत कर रहे हैं।

    ईरान के पूर्व विदेश मंत्री मनौचेहर मोत्तकी ने अमेरिकी सेना के खिलाफ सीधे एक्शन का सुझाव देते हुए कहा कि मेरा सुझाव है कि हमें क्षेत्र में मौजूद किसी एक अमेरिकी बेस पर जाना चाहिए, जहां सैकड़ों या शायद हजारों अमेरिकी आतंकवादी मौजूद हैं। अगर हम वहां से 100 सैनिकों को बंधक बनाकर ईरान ले आएं, तो यह काफी होगा।

    हाशिए पर धकेले जा रहे कट्टरपंथी नेता

    मंगलवार को महमूद नबावियन को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति से हटा दिया गया। उनके साथ एक अन्य सांसद को भी बाहर का रास्ता दिखाया गया जिन्होंने अमेरिका के साथ हुए समझौते का विरोध किया था।

    नबावियन इससे पहले ईरान की नेगोशिएटिंग टीम में शामिल रह चुके थे, लेकिन बाद में वे इस समझौते के सबसे बड़े आलोचकों में से एक बन गए। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने इस समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले ही इसकी गोपनीय जानकारियों को लीक करके इसे पटरी से उतारने का प्रयास भी किया था।

    विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का मौजूदा नेतृत्व जानबूझकर देश के सबसे कट्टरपंथी राजनीतिक खेमे के प्रभाव को कम कर रहा है।

    जर्मन इंस्टीट्यूट फॉर इंटरनेशनल एंड सिक्योरिटी अफेयर्स के हमीदरेजा अजीजी ने सीएनएन से कहा कि हम देख रहे हैं कि गालिबफ इन कट्टरपंथी तत्वों को हाशिए पर धकेलेने के लिए अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर रहे हैं। ये तत्व देश की व्यवस्था के लिए बहुत नुकसानदेह साबित हो रहे हैं और अपनी आपसी प्रतिद्वंद्विता को खुलेआम सामने ला रहे हैं, खासकर ऐसे समय में जब ईरान के भीतर हालात पहले से ही अस्थिर हैं।

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    बंटा हुआ नेतृत्व, लेकिन लक्ष्य एक

    इस कड़वे आंतरिक संघर्ष के बावजूद, ईरान का शीर्ष नेतृत्व एक व्यापक उद्देश्य पर पूरी तरह एकजुट है, होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपना नियंत्रण बनाए रखते हुए प्रतिबंधों से राहत पाना और इस संघर्ष को समाप्त करना।

    हालांकि, खामेनेई की अनुपस्थिति, युद्धविराम के लिए मौजूदा नेतृत्व का समर्थन और रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की बढ़ती ताकत ने उन कट्टरपंथियों के हौसले बुलंद कर दिए हैं जो संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल के साथ युद्ध को जारी रखना चाहते हैं।