ईरान ने फिर से खोले अंडरग्राउंड साइट्स, खोद-खोदकर निकाल रहा मिसाइलें; सैटेलाइट तस्वीरों ने खोला राज
ईरान ने अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद अपनी भूमिगत मिसाइल साइटों को फिर से सक्रिय कर दिया है। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि ईरान बुलडोजर का उप ...और पढ़ें

ईरान ने खोले अंडरग्राउंड साइट्स। (फोटो- सोशल मीडिया)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान ने जमीन में दब अपने हथियारों को बाहर निकाल लिया है और इसके बाद वह इजरायल के साथ-साथ मिडिल-ईस्ट के अन्य देशों पर कहीं ज्यादा दूरी की मिसाइलें दागने के लिए तैयार है।
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स का कहना है कि हफ्तों तक अमेरिका और इजरायल की तरफ से की गई स्ट्राइक्स ने सड़कों को तबाह करके और सुरंगों के प्रवेश-द्वारों को मलबे से पाटकर ईरान की अपनी भूमिगत मिसाइल साइट्स तक पहुंच को सीमित कर दिया लेकिन सैटेलाइट्स इमेज से पता चलता है कि ईरान ने इसका जवाब देने के लिए बुलडोजर और डंप ट्रक जैसे साधारण उपकरणों का इस्तेमाल किया।
ईरान की मिसाइल क्षमताओं को तबाह करना आसान नहीं
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे संकेत मिलता है कि ईरान की मिसाइल क्षमताओं को सिर्फ सुरंगों के प्रवेश द्वारों को निशाना बनाकर तबाह नहीं किया जा सकता। हालांकि ईरान और अमेरिका होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए एक अस्थायी समझौते पर पहुंच गए हैं, लेकिन इसके विवरणों को अंतिम रूप देने में अभी भी महीनों का काम बाकी है।
ईरान की मिसाइल क्षमताओं का विश्लेषण करने वाले जेम्स मार्टिन सेंटर फॉर नॉनप्रोलिफरेशन स्टडीज के रिसर्च एसोसिएट सैम लेयर ने कहा, "अगर फिर से लड़ाई शुरू होती है, तो ईरान इस स्थिति में है कि वह मिसाइलें दागना जारी रख सके जब तक उसके पास लॉन्चर और क्रू मौजूद हैं भले ही मिसाइलों का उत्पादन रुक गया हो।"
उन्होंने आगे कहा, "ऐसा कुछ भी नहीं है जो लॉन्चरों को उन मिसाइलों के विशाल भंडार से लैस होने से रोक सके, जो ईरानियों के पास अभी भी मौजूद हैं।"
ईरान खोद खोदकर निकाल रहा मिसाइलें
लड़ाई के दौरान ईरान ने बहुत बड़े जोखिम के बीच सुरंगों के मुहानों की खुदाई का काम किया। वहीं अमेरिका और इजरायल अक्सर खुदाई के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों पर हमले करते रहे। इस काम की बदौलत तेहरान पूरे युद्ध के दौरान मिसाइलें दागना जारी रख पाया, हालांकि उनकी गति काफी धीमी हो गई थी। सात हफ्ते से भी ज्यादा समय पहले हुए संघर्ष-विराम के बाद से इन ठिकानों की खुदाई के ईरान के प्रयासों में काफी तेजी आई है।
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सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने अब उन 69 सुरंगों के प्रवेश द्वारों में से 50 को फिर से खोल दिया है, जिन पर अमेरिका और इजरायल ने 18 भूमिगत मिसाइल ठिकानों पर हमला किया था।
ईरान ने इन ठिकानों के अन्य हिस्सों की भी मरम्मत कर ली है, जिनमें वे सड़कें भी शामिल हैं जिन पर अमेरिका और इजरायल ने मिसाइल लॉन्चरों को उनका इस्तेमाल करने से रोकने के लिए बमबारी की थी। सैटेलाइट तस्वीरों से पता चलता है कि अब इन सभी गड्ढों को लगभग भर दिया गया है और दो जगहों पर तो सड़कों को दोबारा बना भी दिया गया है।
ईरान के अंडरग्राउंड मिसाइल ठिकानों का नेटवर्क उसकी मिसाइलों और लॉन्चरों को काफी सुरक्षा प्रदान करता है। इन ठिकानों को उसने 20 साल पहले बनाना शुरू किया था। ये ठिकाने सैकड़ों मीटर गहरी चट्टानों के नीचे स्थित हैं और यही कारण है कि अमेरिका और इजरायल की सेनाएं यहां सीमित हमले ही कर पाती हैं।
ईरान के पास अभी भी हजारों मिसाइलों का जखीरा
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान के पास अभी भी भूमिगत ठिकानों में लगभग 1,000 मिसाइलें जमा हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, जमीन की सतह से काफी नीचे मौजूद उस भंडार को जमीनी स्तर पर हुए हमलों से ज्यादा नुकसान पहुंचने की संभावना कम ही है। खास तौर पर इसलिए, क्योंकि पिछले साल हुए 'बारह-दिवसीय युद्ध' के दौरान भी इजरायली सेना ने सुरंगों के प्रवेश-द्वारों पर ठीक इसी तरह से हमले किए थे।
जैसे-जैसे ईरान अपनी मिसाइलों को फिर से पा रहा है और अपने मिसाइल अड्डों की कार्यक्षमता को बहाल कर रहा है, विश्लेषकों को चिंता है कि इस शस्त्रागार से उत्पन्न निरंतर खतरे को कम करके आंका जा रहा है। खासकर अमेरिकी मिसाइल इंटरसेप्टरों की घटती आपूर्ति को देखते हुए।
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