ईरान युद्ध लंबा चला तो बढ़ जाएंगे इन सामानों के दाम... स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की जगह इस रूट का होगा इस्तेमाल
ईरान युद्ध लंबा खिंचने से भारत में महंगाई बढ़ने की आशंका है। खाद्य तेल, दवा और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे कई उत्पादों के कच्चे माल का आयात महंगा हो जाएगा। कं ...और पढ़ें

कच्चे तेल का सह उत्पाद प्लास्टिक दाने की कीमत में पिछले दो दिनों में 12 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है
राजीव कुमार, नई दिल्ली। ईरान युद्ध लंबा चला तो महंगाई दर प्रभावित हो सकती है। भारत खाद्य तेल से लेकर दवा, इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम जैसी कई जरूरी चीजों के निर्माण से जुड़े कच्चे माल का आयात करता है और अब इन सब की लागत बढ़ सकती है। कच्चे तेल का सह उत्पाद प्लास्टिक दाने की कीमत में पिछले दो दिनों में 12 प्रतिशत तक बढ़ चुकी है।
प्लास्टिक का इस्तेमाल रोजाना इस्तेमाल होने वाले कई चीजों में होता है। खाद्य तेल के दाम में भी मजबूती का रुख दिख रहा है। दूसरी तरफ, ईरान युद्ध के विराम को लेकर कोई संकेत नहीं मिलने से निर्यातकों की चिंता बढ़ती जा रही है। कंटेनर कंपनियों ने कंटेनर के किराये में 150 प्रतिशत तक का इजाफा कर दिया है। जिन 20 टन के कंटेनर का किराया 1100 डॉलर चल रहा था, अब उनका किराया 3500-3700 डॉलर तक पहुंच गया है।
कंटेनर कंपनियां वार सरचार्ज के रूप में इतना अधिक किराया वसूल रही है। जिन लोगों के माल बीच समंदर में हैं, कंटेनर कंपनियां माल को वापस मंगाने का दबाव उन पर डाल रही हैं। बासमती चावल निर्यात संघ के उपाध्यक्ष पंकज गोयल ने बताया कि तकरीबन एक से डेढ़ लाख टन चावल रास्ते में हैं। उन्हें वापस मंगाने पर हमारी लागत और बढ़ जाएगी। हमने इस सिलसिले में विदेश व्यापार महानिदेशक से मुलाकात भी की है। खाड़ी देश व सेंट्रल एशिया के देशों में निर्यात होने वाले अन्य आइटम भी यही हाल है।
केप ऑफ गुड होप के रास्ते से माल भेजने में लगेगा अधिक समय
कनफेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के पूर्व प्रेसिडेंट संजय जैन ने बताया कि यूरोप, अमेरिका व दक्षिण अमेरिका के इलाके में अब केप ऑफ गुड होप के रास्ते से माल भेजा जाएगा, जिससे हमारी लागत 30-40 प्रतिशत तक बढ़ जाएगी। इतना ही नहीं पुराने रूट की तुलना में इस रास्ते से माल भेजने पर 15 दिन अधिक समय लग सकता है।
व्यापारियों ने बताया कि भारत दवा निर्माण के लिए बड़ी मात्रा में कच्चे माल का आयात करते और युद्ध लंबा चला तो इनका आयात भी प्रभावित होगा। मोबाइल फोन से लेकर टीवी, फ्रिज जैसे कई उत्पाद आयात लागत बढ़ने पर महंगे हो जाएंगे, क्योंकि इनके निर्माण से जुड़े कच्चे माल का भारी मात्रा में आयात किया जाता है।
इस युद्ध से वैश्विक सप्लाई चेन होगी प्रभावित
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट आर्गेनाइजेशंस (फियो) के पूर्व चेयरमैन अश्विनी कुमार ने बताया कि युद्ध लंबा चला तो निर्यातकों के भुगतान विभिन्न देशों में फंस जाएंगे। इस युद्ध से सिर्फ भारतीय आयात-निर्यात ही नहीं, वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित होने जा रही है।
जब माल पहुंचेगा ही नहीं और उसकी बिक्री नहीं होगी तो पैसा फंसना लाजिमी है। कई व्यापार मेले रद हो रहे हैं या वहां व्यापारी नहीं पहुंच पा रहे हैं। अभी जर्मनी में हार्डवेयर का बड़ा शो हो रहा है, लेकिन भारत के व्यापारियों ने वहां जाना टाल दिया। कुछ व्यापारी गए हैं जो रास्ते में फंसे हैं।
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