रेंज 2000 किमी, एयर डिफेंस को देती है चकमा... कितनी खास है इजरायल की ब्लू स्पैरो मिसाइल, जिसने खामेनेई की ली जान?
ईरान-इजरायल संघर्ष में ब्लू स्पैरो मिसाइल चर्चा में है। दावा है कि इजरायल ने इसका इस्तेमाल अयातुल्ला अली खामेनेई को निशाना बनाने के लिए किया। राफेल एड ...और पढ़ें

दुश्मन के एयर डिफेंस को चकमा देकर दूर के लक्ष्य पर पहुंचती है यह मिसाइल (फोटो: रॉयटर्स)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान और इजरायल एक-दूसरे पर खतरनाक मिसाइल दाग रहे हैं लेकिन एक खास मिसाइल अचानक चर्चा में आ गई है। दावा किया जा रहा है कि ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को मार गिराने के लिए इजरायल ने ब्लू स्पैरो मिसाइल का इस्तेमाल किया है।
आइये जानते हैं कि यह मिसाइल इतनी खतरनाक क्यों हैं और इजरायल ने इसे कैसे विकसित किया। एयर लांच्ड बैलिस्टिक मिसाइल ब्लू स्पैरो मिसाइल इजरायल की राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स कंपनी ने बनाई है। यह एक एयर-लॉन्च्ड बैलिस्टिक मिसाइल है यानी लड़ाकू विमान से लांच की जाती है।
शुरू में यह मिसाइल इजरायल के एरो एयर डिफेंस सिस्टम को टेस्ट करने के लिए टारगेट मिसाइल के रूप में इस्तेमाल होती थी। इसमें ब्लैक स्पैरो, ब्लू स्पैरो और सिल्वर स्पैरो तीन प्रकार की मिसाइलें हैं। इसका गाइडेंस सिस्टम इतना उन्नत है कि यह छोटे से टारगेट जैसे टेबल या कुर्सी को भी सटीकता से निशाना बना सकती है। दुश्मन के एयर डिफेंस को चकमा देकर दूर के लक्ष्य पर पहुंचती है।
- लंबाई 6.5 मीटर
- वजन 1900 किलोग्राम
- रेंज 2,000 किलोमीटर
ब्लू स्पैरो की भूमिका
सीआईए ने महीनों तक खामेनेई की लोकेशन ट्रैक की और जब वे एक जगह पर थे तो इजरायल ने हमला किया। हमले में खामेनेई के साथ उनकी पत्नी और कुछ अन्य लोग मारे गए जबकि उनके बेटे मोहम्मद को गंभीर चोट आई। इजरायल के लड़ाकू विमानों ने 1,000 किलोमीटर से ज्यादा दूर से मिसाइलें दागीं ताकि ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम उन पर हमला न कर सकें।
इराक में मिले मलबे से पुष्टि हुई कि ब्लू स्पैरो का इस्तेमाल हुआ क्योंकि इसका बूस्टर और पार्ट्स वही मिले। यह हमला इतना सटीक था कि खामेनेई के कंपाउंड को सीधे निशाना बनाया गया। हाइपरसोनिक क्लास के करीब है मिसाइल ब्लू स्पैरो की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी रेंज और तेज गति से हमला करना है। यह मिसाइल हाइपरसोनिक क्लास के करीब है।
हाइपरसोनिक मिसाइलें गति पांच मैक या इससे अधिक होती है। ब्लू स्पैरा दुश्मन के एयर डिफेंस को चकमा दे सकती है। इस युद्ध में इजरायल ने रैंपेज, राक्स, एयर लोरा जैसी अन्य स्टैंड-ऑफ मिसाइलों के साथ ब्लू स्पैरो का इस्तेमाल किया ताकि ईरान के एयर डिफेंस, रडार और कमांड सेंटर को पहले नष्ट किया जा सके। ब्लू स्पैरो जैसी मिसाइलों ने दिखाया है कि इजरायल की तकनीक कितनी मजबूत है।
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