पश्चिम एशिया संकट के बीच जहाजों की बीमा कंपनियों ने पीछे खींचे हाथ, क्या तेल की कीमतों में आएगी भारी उछाल?
अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष के बीच समुद्री बीमा कंपनियों ने मध्य-पूर्वी खाड़ी क्षेत्र में जहाजों का युद्ध जोखिम बीमा रद्द करना शुरू कर दिया है। ...और पढ़ें

जहाजों की बीमा कंपनियों ने पीछे खींचे हाथ(फाइल फोटो)
जागरण न्यूज नेटवर्क, नई दिल्ली। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते संघर्ष के बीच समुद्री बीमा कंपनियों ने मध्य-पूर्वी खाड़ी क्षेत्र में जहाजों के लिए युद्ध जोखिम बीमा रद करना शुरू कर दिया है। इससे तेल टैंकरों की ढुलाई लागत में भारी उछाल की आशंका है।
अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रमुख समुद्री बीमा समूहों- गार्द, स्कल्द, नार्थस्टैंडर्ड, लंदन पीएंडआइ क्लब और अमेरिकन क्लब- ने एक मार्च की अधिसूचनाओं में बताया कि पांच मार्च से युद्ध जोखिम कवर रद कर दिया जाएगा। इन फैसलों के बाद क्षेत्र में मौजूद जहाजों को नया बीमा कवर लेना होगा, जो कहीं अधिक महंगा होगा।
मैकगिल एंड पार्टनर्स के समुद्री ब्रोकर प्रमुख डेविड स्मिथ ने बताया कि कई अंडरराइटर दरें बढ़ा रहे हैं और कुछ मामलों में होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों को फिलहाल बीमा शर्तें देने से भी इन्कार कर रहे हैं।
युद्ध जोखिम प्रीमियम में भारी बढ़ोतरी
उद्योग सूत्रों के अनुसार, युद्ध जोखिम प्रीमियम पिछले सप्ताह 0.2 प्रतिशत से बढ़कर 48 घंटों में एक प्रतिशत तक पहुंच गया है। उदाहरण के तौर पर 100 मिलियन डालर मूल्य के टैंकर के लिए एक यात्रा का प्रीमियम लगभग दो लाख डालर से बढ़कर 10 लाख डालर तक जा सकता है।
वेसल प्रोटेक्ट से जुड़े विशेषज्ञ मुनरो एंडरसन ने कहा कि बाजार होर्मुज के 'व्यावहारिक रूप से बंद' होने जैसी धारणा से प्रभावित है, भले ही औपचारिक नाकाबंदी न हो।
क्या हैं इसका महत्व
युद्ध जोखिम बीमा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सामान्य समुद्री पालिसियों में युद्ध और आतंकवाद से होने वाले नुकसान शामिल नहीं होते। बंदरगाह प्राधिकरण, बैंक और चार्टर कंपनियां पर्याप्त बीमा को अनिवार्य मानती हैं, इसलिए बिना बीमा जहाजों का संचालन संभव नहीं है।
विश्लेषकों का कहना है कि मध्य-पूर्व से एशिया तक तेल ढुलाई की लागत पहले ही छह साल के उच्च स्तर पर थी और अब बीमा महंगा होने से इसमें और तेजी आएगी। ब्रिटेन के अखबार द गार्जियन से बातचीत में मार्श के वैश्विक समुद्री प्रमुख मार्कस बेकर ने कहा कि बीमा दरें 50 से 100 प्रतिशत या उससे अधिक तक बढ़ सकती हैं।
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