इजरायल-लेबनान युद्धविराम से नेतन्याहू असहज, अपने ही घर में घिरे; आम चुनावों पर पड़ सकता है असर
इजरायल और लेबनान के बीच हुए युद्धविराम ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को घरेलू राजनीति में असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। जहां अमेरिकी राष्ट्रपत ...और पढ़ें

इजरायल-लेबनान युद्धविराम से नेतन्याहू असहज (फोटो- रॉयटर)
न्यूयॉर्क टाइम्स, यरुशलम। इजरायल और लेबनान के बीच हुए युद्धविराम ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को घरेलू राजनीति में असहज स्थिति में ला खड़ा किया है। जहां अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इस समझौते को बड़ी उपलब्धि बता रहे हैं, वहीं इजरायल में इसे लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया है।
अधिकांश जनमत सर्वेक्षणों में सामने आया है कि इजरायली नागरिक हिजबुल्ला के खिलाफ सैन्य कार्रवाई जारी रखना चाहते थे, जब तक कि उसे पूरी तरह कमजोर या निरस्त्र न कर दिया जाए।
गौरतलब है कि बीते दो हफ्ते के दौरान नेतन्याहू को दो बड़े झटके लगे हैं। पहला, नेतन्याहू के न चाहते हुए भी ट्रंप ने ईरान के साथ दो हफ्ते का युद्धविराम लागू कर दिया।
इसके बाद, गुरुवार को ट्रंप ने इजरायल और लेबनान के बीच तत्काल प्रभाव से 10 दिनों का संघर्ष विराम घोषित कर दिया। यही नहीं, शुक्रवार को ट्रंप ने लेबनान पर इजरायली बमबारी को भी प्रतिबंधित कर दिया।
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि बस, बहुत हो चुका। लेबनान के आतंकी संगठन हिजबुल्ला से हथियार छीनने के लिए अमेरिका उचित प्रक्रिया अपनाएगा।
नेतन्याहू ने शुरुआत में सख्त रुख अपनाया था, लेकिन ट्रंप के दबाव के बाद उन्हें युद्धविराम पर सहमत होना पड़ा। विपक्ष और उनके अपने सहयोगी अब इसे उनकी कमजोरी के रूप में देख रहे हैं। पूर्व सैन्य प्रमुख गादी आइजनकोट ने कहा कि युद्धविराम “ताकत की स्थिति'' से होना चाहिए था, न कि बाहरी दबाव में।
रणनीतिक छवि को झटका
विश्लेषकों का मानना है कि इस घटनाक्रम ने नेतन्याहू की उस छवि को नुकसान पहुंचाया है, जिसमें वह खुद को ट्रंप के करीबी और इजरायल की सुरक्षा सुनिश्चित करने में सक्षम नेता बताते रहे हैं।
कार्नेगी एंडोमेंट के एरन डेविड मिलर के अनुसार, “नेतन्याहू ने युद्ध की शुरुआत को प्रभावित किया, लेकिन अंत को नहीं।''हालांकि, नेतन्याहू ने जनता को भरोसा दिलाने की कोशिश की है कि इजरायली सेना लेबनान के भीतर 10 किलोमीटर तक सुरक्षा क्षेत्र बनाए रखेगी, ताकि हिजबुल्ला के हमलों को रोका जा सके।
मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है- नेतन्याहू
उन्होंने “ऐतिहासिक शांति समझौते'' की संभावना भी जताई, लेकिन यह स्पष्ट है कि हिजबुल्ला की सहमति के बिना कोई भी समझौता टिकाऊ नहीं होगा। नेतन्याहू ने कहा है कि लेबनान में उनके देश ने बड़ी उपलब्धियां हासिल की हैं, लेकिन मिशन अभी पूरा नहीं हुआ है।
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