ईरानी मदद से हूती का 48 घंटे में अहम ठिकानों पर कब्जा, यमन की सरकारी सेना से तटीय क्षेत्र और द्वीप छीने
हूती ने अमेरिका और सऊदी अरब के समर्थन वाली यमन की सरकारी सेना से तटीय क्षेत्र और द्वीप छीने। इतना ...और पढ़ें

ईरानी मदद से हूती का 48 घंटे में अहम ठिकानों पर कब्जा (फोटो- रॉयटर)
HighLights
तनाव बढ़ते ही आईआरजीसी के विशेषज्ञ पहुंच गए थे सना
लाल सागर और बॉब-अल-मंदेब पर कब्जे से सभी हैरान
एपी, काहिरा। पिछले हफ्ते यमन के हूती लड़ाकों ने जिस तेजी से लाल सागर के तटीय क्षेत्र और बॉब-अल-मंदेब स्ट्रेट के नजदीकी द्वीपों पर कब्जा किया, उसने रणनीतिक विशेषज्ञों को हैरान कर दिया।
हूती ने अमेरिका और सऊदी अरब के समर्थन वाली यमन की सरकारी सेना से तटीय क्षेत्र और द्वीप छीने। इतना ही नहीं हूती ने सऊदी अरब की राजधानी रियाद और उसके चार समुद्र तटीय शहरों पर भी हमले किए।
इन हमलों में हूती ने सैन्य अड्डे, ऑयल रिफायनरी और तेल ठिकानों को निशाना बनाया, साथ ही 1,200 किलोमीटर लंबी ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन को क्षतिग्रस्त किया।
विशेषज्ञ हूती के इस युद्ध कौशल के लिए ईरानी सैन्य सलाहकारों को जिम्मेदार मानते हैं। इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आइआरजीसी) ने हूती को इस प्रकार से प्रशिक्षित किया है कि वह किसी भी सरकारी सेना का मुकाबला करने में सक्षम हो गया है।
पता चला है कि सितंबर में तनाव बढ़ते ही आइआरजीसी के अधिकारी यमन में सना और हूती के अन्य ठिकानों पर पहुंच गए और वहां से उन्होंने हूती लड़ाकों की कार्रवाई का निर्देशन किया।
इसका नतीजा यह हुआ कि हूती ने तेजी से लाल सागर के तटीय इलाकों और उसे अरब सागर से जोड़ने वाले बॉब-अल-मंदेब स्ट्रेट के नजदीकी द्वीपों पर महज 48 घंटों में कब्जा कर लिया।
रणनीतिक दृष्टि से इसका ईरान को भी लाभ हुआ है। क्षेत्र में उसके मजबूत सहयोगी के रूप में हूती खड़ा हुआ है।
इससे ईरान होर्मुज स्ट्रेट के बाद अब बॉब-अल-मंदेब के जरिये होने वाले तेल निर्यात को बाधित करने की स्थिति में आ गया है। अमेरिका का हमला बढ़ने की स्थिति में ईरान इस आशय की धमकी पहले ही दे चुका है।
