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    खूनी हुआ थाईलैंड का सोंगक्रान फेस्टिवल, छह दिनों में 216 लोगों ने गंवाई जान

    Updated: Fri, 17 Apr 2026 11:15 PM (IST)

    विश्व स्तर पर ‘दुनिया की सबसे बड़ी जल प्रतियोगिता’ के नाम से मशहूर थाईलैंड का सोंगक्रान त्योहार पारंपरिक नववर्ष का प्रतीक है। चावल की कटाई के बाद अप्र ...और पढ़ें

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    खूनी हुआ थाईलैंड का सोंगक्रान फेस्टिवल, छह दिनों में 216 लोगों ने गंवाई जान (फोटो- रॉयटर)

    डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विश्व स्तर पर ‘दुनिया की सबसे बड़ी जल प्रतियोगिता’ के नाम से मशहूर थाईलैंड का सोंगक्रान त्योहार पारंपरिक नववर्ष का प्रतीक है।

    चावल की कटाई के बाद अप्रैल के मध्य में मनाया जाने वाला यह उत्सव परिवार के पुनर्मिलन, पूर्वजों और बुजुर्गों के प्रति सम्मान और बौद्ध मंदिरों के दर्शन का महत्वपूर्ण अवसर होता है। लेकिन इस वर्ष यह एक सप्ताह तक चलने वाला त्योहार दुखद मोड़ ले चुका है।

    थाईलैंड के आपदा निवारण एवं राहत विभाग तथा रोड सेफ्टी सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, 10 से 15 अप्रैल 2026 तक के छह दिनों में 1,108 से अधिक सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1,073 लोग घायल हुए और 216 लोगों की मौत हो गई।

    हर साल इस त्योहार के दौरान बैंकॉक जैसे बड़े शहरों से लाखों लोग अपने गृह प्रांतों में परिवार के साथ जश्न मनाने के लिए निकलते हैं, जिससे सड़कों पर भारी ट्रैफिक बढ़ जाता है। पहले पांच दिनों (10 से 14 अप्रैल) में ही 951 दुर्घटनाओं में 191 मौतें और 911 घायल दर्ज किए गए थे।

    न्यूयॉर्क पोस्ट और स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, लगभग 42 प्रतिशत मौतों का मुख्य कारण तेज गति से वाहन चलाना रहा, जबकि 27.4 प्रतिशत दुर्घटनाएं शराब पीकर ड्राइविंग के कारण हुईं। मोटरसाइकिल दुर्घटनाएं कुल मामलों में सबसे ज्यादा रही हैं और हेलमेट न पहनना भी बड़ा जोखिम साबित हुआ।

    इस त्योहार को थाईलैंड में ‘सात खतरनाक दिन’ के नाम से जाना जाता है। सरकार की लगातार चेतावनियों, सुरक्षा अभियानों और शराब पीकर गाड़ी चलाने पर सख्त कानूनों के बावजूद दुर्घटनाएं रुक नहीं रही हैं।

    सोंगक्रान सूर्य के मेष राशि में वार्षिक प्रवेश का प्रतीक है, जो राशिचक्र की पहली राशि मानी जाती है और नव वर्ष की पारंपरिक शुरुआत का संकेत देती है। ‘सोंगक्रान’ शब्द संस्कृत के ‘संक्रांति’ से लिया गया है, जिसका अर्थ ज्योतिषीय संक्रमण या परिवर्तन होता है। भारत के मकर संक्रांति और उत्तरायण जैसे फसल उत्सव भी इसी प्राचीन संस्कृत शब्द से जुड़े हैं।