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ईरान पर अमेरिकी दबाव बढ़ाने के लिए पाकिस्तान ‘गलत देश’, रिपोर्ट में अमेरिकी नीति को ठहराया गया गलत

Published: Fri, 23 Oct 2026 02:31 AM (GMT+05:30)

ईरान पर अमेरिकी दबाव को ठोस कदमों में बदलने की जिम्मेदारी पाकिस्तान को सौंपना वाशिंगटन के लिए गलत रणनीति हो ...और पढ़ें

ईरान पर अमेरिकी दबाव बढ़ाने के लिए पाकिस्तान ‘गलत देश’- रिपोर्ट

ईरान पर अमेरिकी दबाव बढ़ाने के लिए पाकिस्तान ‘गलत देश’- रिपोर्ट 

HighLights

  1. तेहरान से टकराव पाकिस्तान की ऊर्जा और सुरक्षा के लिए खतरा, बलूचिस्तान पर भी पड़ सकता है असर

  2. ईरानी गैस पाइपलाइन और सीमा पार ईंधन कारोबार में उलझा इस्लामाबाद, चीन के हित भी जुड़े

आईएएनएस, इस्लामाबाद। ईरान पर अमेरिकी दबाव को ठोस कदमों में बदलने की जिम्मेदारी पाकिस्तान को सौंपना वाशिंगटन के लिए गलत रणनीति हो सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के अपने आर्थिक और सुरक्षा हित ईरान के साथ कामकाजी संबंध बनाए रखने से जुड़े हैं।

तेहरान से तनाव बढ़ने पर इस्लामाबाद को ऊर्जा संकट के साथ-साथ संवेदनशील सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा चुनौतियों का भी सामना करना पड़ सकता है।

‘रियल क्लियर डिफेंस’ की रिपोर्ट में कहा गया है कि अमेरिकी प्रतिबंधों और ईरान की तेल से होने वाली कमाई पर दबाव ने तेहरान की आर्थिक गुंजाइश सीमित की है। लेकिन पाकिस्तान के लिए इन पाबंदियों को और सख्ती से लागू कराना आसान नहीं होगा।

ईरान से तनाव बढ़ने पर बलूचिस्तान में सुरक्षा दबाव बढ़ सकता है। वहीं, सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान की रक्षा संबंधी प्रतिबद्धताएं भी उसकी रणनीतिक स्थिति को जटिल बना सकती हैं।

ऊर्जा जरूरतें और चीन के हित बड़ी चुनौती

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के कारण ईरान के साथ संबंध बिगाड़ने से बचना चाहता है। ईरान-पाकिस्तान गैस पाइपलाइन वर्षों से अधूरी है।

ईरान ने अपनी ओर बुनियादी ढांचा तैयार किया है, लेकिन पाकिस्तान के हिस्से का काम अमेरिकी प्रतिबंधों और अन्य बाधाओं के कारण आगे नहीं बढ़ पाया। तेहरान इस्लामाबाद पर अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करने का दबाव भी बनाता रहा है।

चीन का हित भी इस समीकरण से जुड़ा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन ईरानी तेल खरीदता है और खाड़ी क्षेत्र से ऊर्जा की निर्बाध आपूर्ति चाहता है। ऐसे में पाकिस्तान के लिए अमेरिकी दबाव और अपने रणनीतिक साझेदारों के हितों के बीच संतुलन बनाना चुनौतीपूर्ण है।

सीमा पार ईंधन कारोबार भी बन सकता है दबाव का कारण

रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी पेट्रोल और डीजल बलूचिस्तान में सीमा पार तस्करी के नेटवर्क के जरिए पहुंचता है। इस कारोबार से स्थानीय व्यापारियों और समुदायों की आमदनी जुड़ी है। ईरानी ईंधन पर सख्ती का असर केवल तेहरान की कमाई पर नहीं, बल्कि सीमा से लगे पाकिस्तानी इलाकों की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

इसके अलावा, बलूचिस्तान के मकरान तटीय क्षेत्र के कुछ हिस्से ईरान से मिलने वाली बिजली पर निर्भर हैं। रिपोर्ट का कहना है कि तेहरान ईंधन आपूर्ति, बिजली या सीमा पार व्यापार में सख्ती के जरिए इस्लामाबाद पर दबाव बना सकता है। ऐसे में पाकिस्तान के सामने अमेरिकी मांगों और अपने आर्थिक-सुरक्षा हितों के बीच संतुलन साधने की कठिन चुनौती है।