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    पाकिस्तान पर संकटों का पहाड़: रोटी-पानी और आर्थिक बदहाली के बाद अब बिजली संकट, दफ्तरों में छाया अंधेरा

    Updated: Fri, 17 Jul 2026 06:09 PM (IST)

    पाकिस्तान के सिंध प्रांत में शिक्षा विभाग के कार्यालय पिछले तीन हफ्तों से बिजली संकट से जूझ रहे हैं, जिससे ऑनलाइन सेवाएं और प्रशासनिक कार्य ठप हो गए ह ...और पढ़ें

    पाकिस्तान में बिजली संकट।

    पाकिस्तान में बिजली संकट।

    HighLights

    1. सिंध शिक्षा विभाग के दफ्तरों में तीन हफ्तों से बिजली संकट।

    2. बिल भुगतान के बावजूद के-इलेक्ट्रिक द्वारा बिजली कटौती जारी।

    3. ऑनलाइन सेवाएं, प्रशासनिक कार्य और जनसेवाएं पूरी तरह ठप।

    डिजिटल डेस्क, कराची। दुनियाभर में कटोरा लेकर घूम रहा नापाक पड़ोसी इन दिनों एक साथ कई सारी संकटों से जूझ रहा है। इसी बीच अन्न, जल और आर्थिकी पैमाने पर संघर्ष कर रहे पाकिस्तान के सामने अब एक बिजली संकट की एक नई चुनौती सामने आ गई है। पूरी मामले को ऐसे समझिए कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत के शिक्षा विभाग के कई बड़े दफ्तर पिछले लगभग तीन हफ्तों से बिजली कटौती की मार झेल रहे हैं।

    दफ्तरों में बिजली न होने से ऑनलाइन सेवाएं, जरूरी प्रशासनिक काम और जनता से जुड़े काम पूरी तरह ठप हो गए हैं। 'द एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे बड़ी बात यह है कि शिक्षा विभाग के अधिकारियों का दावा है कि उनके सभी बिजली बिलों का भुगतान किया जा चुका है, फिर भी बिजली काटी जा रही है।

    इन बड़े दफ्तरों पर पड़ा है बुरा असर

    सिंध प्रांत में जारी इस बिजली संकट का असर वहां के कई कार्यालयों पर साफ-साफ देखने को मिल रहा है। रिपोर्ट की माने तो डायरेक्टोरेट जनरल कॉलेजेस सिंध हो, रीजनल डायरेक्टोरेट गवर्नमेंट कॉलेजेस सिंध, या फिर रीजनल डायरेक्टोरेट प्राइवेट स्कूल्स कराची ये स्कूल। इन सभी स्कूलों और कॉलेजेस के कार्यालय बिजली संकट की मार झेल रहे हैं। इतना ही नहीं कामकाज के समय में घंटों बिजली गुल रहने की वजह से सरकारी कामकाज पूरी तरह रुक गया है।

    कंप्यूटर बंद, ऑनलाइन सेवाएं भी ठप

    बिजली न होने के कारण दफ्तरों के कंप्यूटर सिस्टम, इंटरनेट और प्रिंटिंग मशीनें बंद पड़ी हैं। इसके चलते जनता से जुड़ी कई जरूरी सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं। रिपोर्ट में इस बात पर जोर दिया गया है कि प्राइवेट स्कूलों का ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन रुक गया है, कंप्यूटर से बनने वाले सर्टिफिकेट जारी नहीं हो पा रहे हैं। इसके अलावा जनता की शिकायतों का निपटारा और सरकारी कॉलेजों में दाखिले से जुड़े काम लटक गए हैं।

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    केवल 3-4 घंटे मिल रही बिजली

    अधिकारियों के मुताबिक, 8 घंटे की शिफ्ट में से केवल 3 या 4 घंटे ही बिजली मिलती है। आमतौर पर सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक और फिर शाम 4 बजे के बाद बिजली पूरी तरह काट दी जाती है। निरीक्षण विभाग के डिप्टी डायरेक्टर ने बताया कि बिलों का पूरा भुगतान करने के बाद भी बिजली कंपनी 'के-इलेक्ट्रिक' कोई सुनवाई नहीं कर रही है।

    दफ्तर छोड़ बाहर बैठने को मजबूर कर्मचारी

    गौरतलब है कि दफ्तरों की इमारत में बिजली न होने से पंखे और एसी बंद हैं। भीषण गर्मी और उमस के कारण कर्मचारियों का कमरों के अंदर बैठना नामुमकिन हो गया है, जिसके चलते वे बाहर खुले में बैठकर काम करने को मजबूर हैं।

    दूसरी ओर, एडमिशन, स्कूल रजिस्ट्रेशन और दूसरे जरूरी काम से दफ्तरों के चक्कर काट रहे छात्र, माता-पिता, शिक्षक और स्कूल प्रिंसिपल घंटों इंतजार करने के बाद बिना काम कराए ही वापस लौटने को मजबूर हैं।