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'संसद के इंतजार के बिना डिजिटल अरेस्ट जैसे घोटालों पर स्वतः संज्ञान ले रहा कोर्ट', लंदन में बोले CJI सूर्यकांत

Updated: Sun, 30 Aug 2026 09:27 PM (GMT+05:30)

प्रधान न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने लंदन में कहा कि भारतीय न्यायपालिका डिजिटल अरेस्ट जैसे गंभीर आर्थिक अपराधों पर संसद के ...और पढ़ें

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HighLights

  1. CJI ने लंदन में आर्थिक अपराध संगोष्ठी को संबोधित किया।

  2. डिजिटल अरेस्ट जैसे घोटालों पर कोर्ट स्वतः संज्ञान ले रहा।

  3. वैश्विक आर्थिक अपराधों से निपटने को आपसी सहयोग जरूरी।

डिजिटल डेस्क, लंदन। लंदन में आयोजित 43वें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अपराध संगोष्ठी के समापन सत्र को संबोधित करते हुए प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने भारतीय न्यायपालिका की सक्रियता और वैश्विक आर्थिक अपराधों पर गहरी चिंता व्यक्त की है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय न्यायपालिका डिजिटल अरेस्ट जैसे आधुनिक और गंभीर धोखाधड़ी मामलों में संसद के किसी नए कानून का इंतजार करने के बजाय पूरी तरह से सक्रिय रुख अपना रही है।

इसका जीवंत उदाहरण सुप्रीम कोर्ट द्वारा 'डिजिटल अरेस्ट' घोटाले पर लिया गया स्वतः संज्ञान है, जिसमें ठग फर्जी पुलिस अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बनकर नागरिकों को वीडियो काल के जरिये लूटते हैं। कोर्ट ने केंद्र और राज्यों को इस समस्या के दायरे का आकलन करने और इसके लिए कठोर तथा आनुपातिक दंड तय करने के निर्देश दिए हैं।

सीजेआई ने भारत के कानूनी ढांचे को एक त्रि-स्तरीय वास्तुकला बताया, जिसमें प्रिवेंशन आफ मनी लांड्रिंग एक्ट (पीएमएएलए) और भगोड़ा आर्थिक अपराधी अधिनियम जैसे मजबूत कानून शामिल हैं। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि ये तंत्र त्रुटिहीन नहीं हैं।

पीएमएलए के दुरुपयोग के मामलों में न्यायपालिका ने कड़ा हस्तक्षेप किया है। उन्होंने अपने द्वारा दिए गए अरविंद केजरीवाल फैसले का हवाला देते हुए कहा कि लंबी हिरासत को सजा में नहीं बदला जाना चाहिए और गिरफ्तारी के आधार लिखित में दिए जाने चाहिए।

आर्थिक अपराधों के वैश्विक और ऐतिहासिक स्वरूप पर बात करते हुए सीजेआइ ने कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि सदियों पहले भी सरकारी खजाने में हेरफेर की बात कही गई थी, और आज दुनिया भर में हर साल इतना काला धन खपाया जाता है जिससे पृथ्वी के हर व्यक्ति को लैपटाप दिया जा सकता है, जबकि रिकवरी एक प्रतिशत से भी कम है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि वैश्विक स्तर पर केवल चर्चाएं करने के बजाय आपसी कानूनी सहायता संधियों और वास्तविक संपत्ति जब्ती के माध्यम से अपराधियों की अवैध कमाई को वापस लाना ही सबसे बड़ा समाधान है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)