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    अभी नहीं करीब 200 साल पहले आई थी Electric Car, किसने बनाई थी और क्‍या थी खासियत

    Updated: Fri, 16 Jan 2026 11:00 AM (IST)

    दुनियाभर में प्रदूषण को कम करने के लिए अब Electric Cars को बढ़ावा दिया जा रहा है। लेकिन क्‍या आपको पता है कि कुछ साल पहले नहीं बल्कि दुनिया में 200 सा ...और पढ़ें

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    ऑटो डेस्‍क, नई दिल्‍ली। भारत के साथ ही दुनिया के सभी देशों में वाहनों से प्रदूषण की समस्‍या कम करने के लिए Electric Cars को बढ़ावा देने की कोशिश की जा रही है। लेकिन क्‍या आपको पता है कि दुनियाभर में कुछ साल पहले नहीं बल्कि करीब 200 साल पहले भी इलेक्‍ट्रिक कारों का उपयोग किया जा रहा था। कहां पर पहली इलेक्‍ट्रिक कार को बनाया गया था। क्‍यों उस समय इन कारों की मांग में कमी आई थी। हम आपको इस खबर में बता रहे हैं।

    प्रदूषण कम करने में मदद कर रहीं Electric Cars

    भारत सहित दुनियाभर में वाहनों से होने वाला प्रदूषण बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। इस तरह से होने वाले प्रदूषण को कम करने के लिए सभी देशों की सरकारों के साथ ही वाहन निर्माता भी कोशिश कर रहे हैं। कुछ सालों पहले तक सिर्फ पेट्रोल, डीजल और सीएनजी इंजन वाली कारों का ही उपयोग किया जा रहा था, लेकिन अब इलेक्‍ट्रिक कारें भी प्रदूषण कम करने की कोशिश कर रही हैं।

    कब बनी थी पहली इलेक्‍ट्रिक कार

    रिपोर्ट्स के मुताबिक इलेक्‍ट्रिक कारों की शुरुआत करीब 200 साल पहले ही हो गई थी। 1830 के दशक में स्‍कॉटलैंड में इस तकनीक का सबसे पहला प्रोटोटाइप बनाया गया था। इस कार को रॉबर्ट एंडरसन ने बनाया था। उस तरह की कार को बिना रिचार्जेबल बैटरी के साथ बनाया गया था और उनका उपयोग भी काफी सीमित था।

    1888 में भी बनी थी कार

    इलेक्‍ट्रिक की शुरुआत भले ही 1830 के दशक में हो गई थी। लेकिन 1888 में जर्मनी के फ्लोकेम इलेक्‍ट्रिक वैगन को बनाया गया था। इस कार का निर्माण जर्मन इंजीनियर एंड्रियास फ्लोकेन ने किया था।

    अमेरिका में भी चलती थीं इलेक्‍ट्रिक कारें

    यूरोप के साथ ही अमेरिका में भी इलेक्‍ट्रिक कारों का इतिहास पुराना रहा है। जानकारी के मुताबिक 1890 में अमेरिका में भी इलेक्‍ट्रिक तकनीक से टैक्‍सी भी चलाई गई थीं।

    क्‍यों बंद हुई कारें

    यूरोप और अमेरिका में इस तरह की तकनीक की कारों को बनाने की कोशिश तो की जा रही थी। लेकिन पेट्रोल इंजन के लगातार विकास और बेहतर होने के साथ ही पेट्रोल और डीजल कारों का चलन कम समय में काफी तेजी से बढ़ने लगा। जिस कारण कम तकनीक और कम बेहतर इलेक्‍ट्रिक कारों बंद हो गईं।

    भारत में कब आई तकनीक

    जानकारी के मुताबिक अमेरिका और यूरोप में भले ही इस तकनीक वाली कारों को 1830 से 1890 के बीच चलाया गया था। लेकिन भारत में इस तरह की तकनीक के साथ कारों को 1990 के दशक में लाया गया था। चेतन मैनी और टीम ने लवबर्ड नाम से इलेक्‍ट्रिक कार को विकसित किया था। लेकिन इस कार को कभी बाजार में नहीं लाया गया था। कार भले ही भारत में नहीं आई थी, लेकिन इससे भविष्‍य में इलेक्‍ट्रिक कारों की संभावनाओं को बढ़ा दिया गया था। 

    2001 में आई पहली कार

    1990 के दशक के बाद 2001 में भारत में पहली बार बिक्री के लिए Reva नाम की इलेक्‍ट्रिक कार को उपलब्‍ध करवाया गया था। जिसके बाद 2010 में जब प्रदूषण की चिंता बढ़ी तो फिर से इस तकनीक पर ध्‍यान दिया गया और अब कई प्रमुख वाहन निर्माता इस तकनीक के साथ अपनी कारों को ऑफर कर रहे हैं।