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    औरंगाबाद के अस्पताल में बंदी की मौत के बाद स्वजनों का हंगामा, 26 अगस्त को शराब की तस्करी में गया था जेल

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 06:53 PM (IST)

    सदर अस्पताल में शनिवार को इलाज के दौरान विचाराधीन बंदी 37 वर्षीय धर्मेंद्र राम की मौत हो गई। बारुण थाना क्षेत्र के उर्दीना गांव के निवासी थे। 26 अगस्त को उत्पाद विभाग की टीम के द्वारा शराब की तस्करी में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। गुरुवार को कोर्ट में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में मंडल कारा भेजा गया था।

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    अस्पताल में बंदी की मौत के बाद स्वजनों का हंगामा

    जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। सदर अस्पताल में शनिवार को इलाज के दौरान विचाराधीन बंदी 37 वर्षीय धर्मेंद्र राम की मौत हो गई। बारुण थाना क्षेत्र के उर्दीना गांव के निवासी थे। 26 अगस्त को उत्पाद विभाग की टीम के द्वारा शराब की तस्करी में गिरफ्तार कर जेल भेजा था। गुरुवार को कोर्ट में पेशी के बाद उसे न्यायिक हिरासत में मंडल कारा भेजा गया था।

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    शनिवार सुबह जेल में अचानक तबीयत बिगड़ने पर जेल प्रशासन द्वारा उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल भेजा गया, जहां इलाज के दौरान मौत हो गई। स्वजनों ने लगाया लापरवाही का आरोप धर्मेंद्र की मौत के बाद स्वजन और ग्रामीण सदर अस्पताल पहुंचे। शव को लेकर रमेश चौक पहुंचे जहां सड़क पर रखकर जाम कर दिया।

    विचाराधीन बंदी की पत्नी संजू देवी समेत अन्य स्वजनों ने इलाज में लापरवाही से मौत होने का आरोप लगाते हुए हंगामा करने लगे। सड़क जाम और हंगामा की सूचना पर एसडीएम संतन कुमार सिंह, एसडीपीओ संजय कुमार पांडेय, थानाध्यक्ष उपेंद्र कुमार पहुंचे। विधायक विजय कुमार उर्फ डब्लू सिंह भी पहुंचे। जाम किए ग्रामीणों और स्वजनों को समझाने का प्रयास किए पर स्वजन कुछ समझने को तैयार नहीं थे।

    उत्पाद विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई और मुआवजा की मांग कर रहे थे। भीड़ में ज्यादा हंगामा कर रहे एक युवक को पुलिस ने जैसे ही बलपूर्वक कब्जे में लेकर वाहन में बैठाया और फिर स्वजनों को समझाया गया तब माहौल शांत हुआ। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। स्वजनों ने कहा कि गिरफ्तारी के बाद जब वे उत्पाद विभाग कार्यालय में मिलने गए थे तो मिलने नहीं दिया गया था।

    मौत के बाद लगी रही हथकड़ी

    विचाराधीन बंदी की मौत के बाद हाथ में हथकड़ी लगा रहा। चिकित्सकों द्वारा मृत घोषित किए जाने के बाद पुलिसकर्मियों ने हाथ से हथकड़ी नहीं खोला। स्वजनों ने कई सवाल उठाए। कहा कि मौत के बाद हथकड़ी क्यों लगी रही। जेल प्रशासन ने कहा कि पुलिसकर्मी स्वजनों के हंगामा से डर गए होंगे इसलिए हथकड़ी लगी रह गई होगी। इसकी जानकारी पुलिस बलों से ली जाएगी। पुलिसकर्मियों ने इस मामले पर कुछ कहने से इंकार दिया।

    पुलिस को भांजनी पड़ी लाठी

    रमेश चौक को जाम कर हंगामा करने और पुलिस से उलझने के बाद पुलिस को लाठी चलानी पड़ी। विचाराधीन बंदी की मौत के बाद रमेश चौक पर हंगामा की सूचना पर पुलिस बलों तैनात किया गया।