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    Bihar Chunav 2025: बिहार में गठबंधन की मजबूरी, नेताओं के लटके हैं चेहरे, कहीं टूट न जाए टिकट की आस

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 08:35 AM (IST)

    Bihar Chunav 2025 अक्टूबर-नवंबर में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए गठबंधन की मजबूती ने दावेदारों को मजबूर बना दिया है। उम्मीदवारी पर संशय से दावेदार हलकान हैं। टिकट की आस टूटती नजर आ रही है। पूर्व विधायक पप्पू यादव 46 हजार हस्ताक्षर युक्त सूची भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष को सौंपने जा रहे। वहीं पूर्व उम्मीदवार डा. मृणल शेखर अपने समर्थकों के साथ रणनीति बनाने में जुटे हैं।

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    Bihar Chunav 2025: बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के लिए गठबंधन की मजबूती ने दावेदारों को मजबूर बना दिया है।

    बिजेन्द्र कुमार राजबंधु, बांका। Bihar Chunav 2025 बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को लेकर जिले में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। पिछले चुनाव में किस्मत आज़माने वाले कई चेहरे इस बार भी टिकट की आस लगाए बैठे थे, लेकिन गठबंधन की मजबूती के कारण उनकी स्थिति असमंजस में है।

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    बांका की राजनीति में छह से अधिक नेताओं की दावेदारी चर्चा का विषय बनी हुई है। सवाल यही है कि इन नेताओं का अगला कदम क्या होगा।

    जिले में कुल पांच विधानसभा क्षेत्र हैं। इनमें दो पर जदयू, दो पर भाजपा और एक पर राजद का कब्जा है। अमरपुर सीट से भवन निर्माण मंत्री जयंत राज जदयू के संभावित प्रत्याशी हैं।

    उनके खिलाफ पिछले चुनाव में लोजपा से डा. मृणाल शेखर मैदान में उतरे थे और उन्हें 40 हजार वोट मिले थे। बाद में वे भाजपा में शामिल हो गए।

    इसी तरह पूर्व मंत्री सुरेंद्र कुशवाहा भी पिछली बार निर्दलीय लड़े थे और अब भाजपा में हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की भूमिका पर निगाहें टिकी हैं।

    बेलहर सीट पर भी समीकरण दिलचस्प हैं। यहां जदयू विधायक मनोज यादव फिर उम्मीदवार हो सकते हैं, लेकिन भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक राजकिशोर उर्फ पप्पू यादव इस सीट से भाजपा टिकट के प्रबल दावेदार हैं।

    उन्होंने हाल ही में हस्ताक्षर अभियान चलाकर 46 हजार लोगों के समर्थन की सूची प्रदेश अध्यक्ष को सौंपने की घोषणा की है।

    वहीं, पूर्व राज्यसभा सदस्य जर्नादन यादव के पुत्र मनोज यादव भी भाजपा की गतिविधियों में सक्रिय हैं और उनकी संभावनाओं को नज़रअंदाज नहीं किया जा सकता।

    पूर्व स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र कुशवाहा लंबे समय तक अमरपुर से राजद विधायक रहे हैं। 2015 में वे निर्दलीय लड़े थे और मात्र दो हजार वोट मिले थे।

    लोकसभा चुनाव के दौरान वे सक्रिय रहे, लेकिन जदयू के गिरिधारी यादव के मैदान में आने के बाद चुप हो गए। अब उनकी भूमिका को लेकर चर्चाएं हैं। डा. मृणाल शेखर भी अपने समर्थकों के साथ रणनीति बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

    बांका सीट से पिछले चुनाव में रालोसपा से लड़े कौशल सिंह अब भाजपा में शामिल होकर दावेदारी पेश कर रहे हैं। जबकि यहां भाजपा विधायक रामनारायण मंडल छह बार से लगातार चुनाव जीतते आ रहे हैं।

    इधर, लोजपा जिलाध्यक्ष बेबी यादव पिछली बार बेलहर से चुनाव लड़ी थीं, मगर इस बार उनकी दावेदारी को लेकर कोई हलचल नहीं दिख रही है।

    कुल मिलाकर, गठबंधन की मजबूती ने कई दावेदारों की स्थिति कमजोर कर दी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि ये नेता गठबंधन की मजबूती के आगे झुकते हैं या बगावत का रास्ता अपनाते हैं।