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    दो ध्रुवीय राजनीति के बीच नए विकल्प के रूप में उभर रहा जन सुराज, नीतीश-तेजस्वी की पीके बढ़ा रहे टेंशन

    Updated: Sun, 24 Aug 2025 03:13 PM (IST)

    शाहपुर में जन सुराज एक नई राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रही है। पार्टी हाशिये पर रहे समाज में अपनी पकड़ बना रही है और नए चेहरों को चुनावी मैदान में उतार रही है। ध्रुवीकरण की राजनीति से तंग आ चुके लोग अब नए विकल्प तलाश रहे हैं और जन सुराज उन्हें यह विकल्प प्रदान कर सकता है।

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    दो ध्रुवीय राजनीति के बीच नए विकल्प के रूप में अंगड़ाई लेता जन सुराज। (जागरण)

    दिलीप ओझा, शाहपुर(आरा)। वर्षों से दो ध्रुवीय राजनीति का केंद्र रहे विधानसभा में जन सुराज नई शक्ति बनकर दस्तक दे रही रही हैं।

    पार्टी बेहद ही संजीदगी से एक खास रणनीति के तहत अपनी पैठ ऐसे समाज मे बना रही है जो हमेशा से हासिये पर रही हैं। इसके लिए पार्टी नए व स्वच्छ चेहरे को चुनावी अभियान में लेकर आयी है।

    साथ ही पार्टी को नए कलेवर व जनता से जोड़ने के लिए स्थानीय लोगों पर ही दाव लगाया है। जिसका लाभ भी पार्टी को होता दिख रहा है। पार्टी से वंचित व बैद्धिक रूप से अगड़े लोग अधिक शामिल हो रहे हैं।

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    जनता तलाश रही नयापन

    पार्टी का प्रचार अभियान भी दूसरे दलों से बेहद ही अलग है। यह हो सकता है कि ध्रुवीकरण की राजनीति से तंग आ चुके लोग इस तरह की राजनीति को तिलांजली दे और राजनीति के नये विकल्प को अपना ले।

    क्योंकि वर्षों से परिवारवाद व आपसी कट्टरता वाले लोगों के बीच ही आमजन पिसते आये हैं। ऐसे में विकल्प के तौर पर जनता भी नयापन तलाश रही है। क्या पता जनता को यह नयापन जन सुराज में दिख जाए।

    छोटे छोटे नुक्कड़ सभाओं से लेकर बड़ी सभाओं तक में लोगों का आना राजनीतिक दलों के लिए चुनौती प्रस्तुत कर सकता है। इसका मुख्य कारण पार्टी से जुड़े लोगों का व्यवहार व पारिवारिक पृष्ठभूमि भी हैं। साथ ही जनता के बीच अपने को नए अंदाज में पेश करना भी है।

    जिसमे स्वतंत्रता सेनानी के घर की पृष्ठभूमि से आए आईआईटियन विनय कृष्ण मिश्र हो या फिर लोगों को चिकित्सकीय सहायता उपलब्ध कराने वाली पृष्ठभूमि की पूर्व सिविल सर्जन डॉ. ललितेश्वर झा की पत्नी अनुरानी झा हो।

    प्रशांत किशोर का शाहपुर से पुराना नाता

    वहीं, शिक्षविद पद्दमा ओझा भी स्थानीय विरासत को समेटे हुए हैं। इसके केंद्र में स्वयं पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर हैं। क्योंकि प्रशांत किशोर का शाहपुर से पुराना नाता रहा है। उनका बचपन व प्रारंभिक शिक्षा भी शाहपुर से ही हुई है।

    उनके पिता शाहपुर में प्रतिष्ठित चिकित्सक थे और उनके पारिवारिक मित्रों की जमात काफी बड़ी है। फिलहाल पार्टी का फोकस आम जनता के बीच किसी भी तरह से अपनी पहुंच बनाना और अपने पार्टी के संदेशों से उन्हें अवगत कराना है।