Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck
    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    Donald Trump ने लगाया 50% टैरिफ, Makhana कारोबारियों ने कहा, इससे कोई फर्क नहीं पड़ेगा

    Updated: Sun, 10 Aug 2025 02:55 PM (IST)

    हाल के वर्षों में अमेरिका के साथ अन्य देशों में मखाना की मांग में बढ़ोतरी हुई है। इसकी वजह से कीमत में बढ़ोतरी हुई है। उस अनुपात में उत्पादन नहीं बढ़ा है। 25-30 टन अमेरिका सिंगापुर दुबई ब्रिटेन मलेशिया आस्ट्रेलिया और अन्य देशों में इसका निर्यात किया जाता है। मधुबनी से हर माह करीब 500 टन मखाना की सप्लाई होती है। सीधे अमेरिका भेजने वाली कंपनियां कम है।

    Hero Image
    मधुबनी की फैक्ट्री में मखाना पैकिंग करतीं महिलाएं। जागरण

     ब्रज मोहन मिश्र, मधुबनी। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत से वस्तुओं के निर्यात पर 50 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया है। मधुबनी और आसपास के जिलों से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मखाने का निर्यात दुनिया के अन्य देशों के साथ अमेरिका में भी होता है, लेकिन मखाना कारोबारी इस टैरिफ वार को लेकर चिंतित नहीं हैं।

    विज्ञापन हटाएं सिर्फ खबर पढ़ें

    क्योंकि उत्पादन के मुकाबले मांग देश-दुनिया में ज्यादा है। यह मांग सिर्फ अमेरिका ही नहीं अन्य देशों में भी है। इसी के चलते दो वर्षों में कीमत तीन गुना से ज्यादा बढ़ चुका है। साथ ही दुनिया का करीब 90 प्रतिशत मखाना भारत में होता तो उसकी पूर्ति कोई दूसरा देश नहीं कर सकता।

    अनुमान के मुताबित मधुबनी से हर माह करीब 500 टन मखाना देश-दुनिया में भेजा जाता है। इसमें करीब 25-30 टन अमेरिका, सिंगापुर, दुबई, ब्रिटेन, मलेशिया, आस्ट्रेलिया और अन्य देशों में जाता।

    मिथिला नेचुरल्स के डायरेक्ट मनीष आनंद की कंपनी मिथिला नेचुरल्स यूएसए कोर्प कोलोराडो (अमेरिका) में है। वे कहते हैं कि भारतीय बाजार में बड़ी-बड़ी कंपनियां जैसे हल्दीराम, बिग बास्केट, अपना क्लब हर महीने 100 टन से ज्यादा मखाना केवल मधुबनी से मंगवा रही हैं। ये कंपनियां अमेरिका जैसे देश में सीधे कम ही मखाना भेजती हैं।

    मनीष कहते हैं, महाराष्ट्र और गुजरात के व्यापारी अन्य प्रोडक्ट के साथ मखाना अमेरिका भेजते हैं। उनके अनुसार जितनी मांग बढ़ी है, उसके अनुपात में उत्पादन नहीं बढ़ा है। यही वजह है कि मखाने की कीमत 350 से बढ़कर 1100 रुपये प्रति किलोग्राम हो गई है।

    ग्रेड 6 मखाना 1400 रुपये किलो तक पहुंच गया है। मधुबनी मखाना के मालिक रोहित कुमार कहते हैं कि अमेरिका में अभी उनकी कंपनी सीधे तौर पर कम मखाना भेजती है। ज्यादा खपत भारतीय बाजार में है। इसके चलते बहुत असर नहीं पड़ेगा।

    मखाना मां महाकाली प्राइवेट लिमिटेड के अमित कुमार कहते हैं कि अभी अमेरिका के टैरिफ का मधुबनी के मखाना कारोबार पर असर नहीं है। भारतीय बाजार में ही बहुत मांग है। एक-एक कंपनी 30-30 टन मांग करती है।

    50 एकड़ में मखाना की खेती करने वाले जामुनी सहनी कहते हैं पिछले कुछ सालों में मखाना की मांग कई गुना बढ़ी है। उस हिसाब से खेती नहीं बढ़ी।

    फिर भी करीब 8000 हेक्टेयर में जिले में खेती हो रही है। कई किसान उनसे भी बड़े रकबे में खेती कर रहे हैं। वैसे मिथिलांचल और कोसी क्षेत्र में करीब 35 हजार एकड़ में मखाना की खेती होती है। हर साल करीब 28 हजार टन उत्पादन होता है।