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    उत्तर बिहार की छोटी-बड़ी 85 नदियों में अधिकतर सूख चुकीं, बारिश में कमी से हो रहा ऐसा या कोई और वजह

    Updated: Mon, 28 Jul 2025 06:00 PM (IST)

    North Bihar river नदियों की उपेक्षा गाद और बारिश नहीं होने के कारण नदियों में पानी नहीं है। बरसात में लबालब रहने वाली नदियां सूखे की चपेट में हैं। धारा ऐसे बह रही मानो कोई नहर हो। स्थिति ऐसी रही तो कई नदियों की धारा विलुप्त ही हो जाएगी।

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    मधुबनी में सिमट रही धौंस नदी की धारा, कभी यह रहती थी लबालब। जागरण

     जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। सावन में नदियों को लबालब देखा है, आज सूखीं। किनारों पर पपड़ियां और दरारें। कहीं-कहीं तो धूल भी। गुमसुम धारा...सूखा किनारा। आधा सावन बीत गया, उफान न कोलाहल। नदियों की साफ-सफाई व उड़ाही नहीं होने का प्रभाव उनकी जलग्रहण क्षमता पर पड़ रहा है। मौसम भी कम जिम्मेदार नहीं है।

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    उत्तर बिहार के जिलों में छोटी-बड़ी 85 नदियां हैं। इनमें कुछ बरसाती नदियों को छोड़ दें तो बाकी में पूरे साल पानी रहता था, लेकिन आज अधिकतर सूख चुकी हैं। मधुबनी के विभिन्न प्रखंडों में करीब दो दर्जन नदियां हैं। इनमें एक दर्जन सूख गई हैं। कमला नदी में इस समय बाढ़ की स्थिति रहती थी, अभी नाम का पानी है। पश्चिम चंपारण में एक दर्जन नदियां हैं। बगहा में आधा दर्जन नदियों में से ज्यादातर सूखी हैं।

    बाढ़ के समय पर दो से तीन फीट पानी

    मधुबनी के बेनीपट्टी प्रखंड में पांच नदियां अधवारा समूह की धौंस, खिरोई, बुढ़नद, थुम्हानी व बछराजा हैं, लेकिन एक में भी पानी नहीं है। इनमें चार नदियां तो पूरी तरह से सूख गई हैं। बछराजा में पूरे साल पानी रहता था। जुलाई में बाढ़ आती थी, लेकिन आज इसमें घुटना भर पानी है।

    लदनियां में त्रिशूला, धौरी एवं गांगन नदी में तो पानी है, लेकिन बाबूबरही के कमला एवं बलान ऐसी नदियां हैं, जिनमें पहले सालभर पानी भरा रहता था, आज छिछला भर है। सुगरबे, सोनी और धौरी में अभी बाढ़ की स्थिति होनी चाहिए थी, लेकिन पानी जहां-तहां है।

    झंझारपुर से कमला‑ बलान, भुतही‑ बलान, धौंस, यमुनी, सिमरा, रातो, मरहाकुल मिलाकर करीब सात प्रमुख नदियां गुजरती हैं। ये पूरी तरह सूखी हैं। लौकही में भुतही बलान, तिलयुगा, बिहुल और पांची प्रखंड क्षेत्र की जीवनरेखा कही जाने वाली नदियां हैं।

    इनमें तिलयुगा, पांची और भुतही बलान में सालभर पानी रहता था, मगर अब ये या तो बाढ़ के समय विकराल रूप धारण करती हैं या फिर सूख जाती हैं। मधेपुर में कोसी, कमला, भुतही बलान, गेहूंमा मुख्य रूप से बहती हैं। फिलहाल गेहूंमा सूखी है। मधवापुर के धौंस और रातो नदी में इन दिनों दो से तीन फीट पानी है। कलुआही में जीवछ, गेना (पुरानी कमला नदी), बाकिया, चिकना है। बाकिया, चिकना और कमला पूरी तरह सूख चुकी है।

    बारिश नहीं होने का प्रभाव

    सीतामढ़ी में बागमती, लखनदेई, लालबकेया तथा अधवारा समूह की झीम, गोगा, सिंगयाही, बांकी, रातो, मरहा, हरदी, बुधनद व धौंस नदियां है। इनमें झीम सूख गई है, जबकि गोगा, सिंगयाही व बुधनद में काफी कम पानी है। पूर्वी चंपारण में गंडक, बूढ़ी गंडक, तिलावे, धनौती, लालबकेया व बागमती में इस समय बाढ़ की स्थिति रहती है, पर वर्षा नहीं होने से जलस्तर में कम है।

    समस्तीपुर के बूढ़ी गंडक, गंगा और करेह में पानी है। पश्चिम चंपारण में नारायणी, सिकरहना समेत एक दर्जन पहाड़ी नदियां में जुलाई में प्रायः हर वर्ष बाढ़ की स्थिति रहती है। इस वर्ष ये नदियां बेदम सी बह रही हैं। बगहा अनुमंडल में गंडक, मसान समेत आधा दर्जन नदियां हैं।

    मसान में जलस्तर नीचे चला गया है, जबकि अन्य नदियां सूख चुकी हैं। गंडक में बाढ़ की स्थिति होनी चाहिए, जबकि जलस्तर कम है। दरभंगा के कोसी और कमला बलान में इस समय बाढ़ की स्थिति रहती है, लेकिन बहुत कम पानी है।

    डायवर्सन नदियों के सूखने का प्रमुख कारण

    नदी व पोखर बचाओ कार्यकर्ता नारायणजी चौधरी कहते हैं कि झंझारपुर से दरभंगा हवाई अड्डा तक कमला नदी की 11 शाखाएं हैं। बाढ़ नियंत्रण के नाम पर 10 शाखाओं का मुंह बंद कर दिया गया है। इससे तटबंध के अंदर पानी जमा होता है।

    पहले बिहार में बारिश नहीं भी होने पर नेपाल की बारिश का पानी यहां के चौर व खेत में फैलता था। अब पानी फैलना बंद हो गया है। पानी का डायवर्सन नदियों के सूखने का प्रमुख कारण है। सरकार को चाहिए कि बाहा, सोती, नाला, फोड़ी आदि का अध्ययन कर बरसात के समय तीन माह में इनमें नियंत्रित कर पानी छोड़ा जाए।

    कभी यहां 12 सौ मिलीमीटर से अधिक बारिश होती थी, लेकिन पिछले साल से आठ सौ एमएल से कम वर्षा हो रही है। छोटी-छोटी नदियां पानी बिना मर रही हैं। पहले बारिश के पानी से बड़ी नदियां रिचार्ज होती थीं। कमला जैसी नदी में कई जगहों पर अप्रैल-मई में एक बूंद पानी नहीं रहता है। नदी-पोखर में गाद भर गई है। इन सभी को गहरा करने की आवश्यकता है।

    प्रो. विद्यानाथ झा, जलविज्ञानी व पर्यावरणविद

    (इनपुट : सीतामढ़ी से विजय कुमार, दरभंगा से विनय कुमार, मधुबनी से प्रदीप, पश्चिम चंपारण से शशि मिश्र व मोतिहारी से सत्येंद्र झा।)